यह 100 सप्ताह का अभियान है, जिसमें प्रत्येक सप्ताह जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
- इसकी शुरुआत काशी में एक पायलट परियोजना के रूप में हुई थी, जिसे अब 'काशी घोषणा-पत्र' के तहत पूरे देश में लागू किया गया है।
काशी घोषणापत्र के बारे में
- 2025 में अपनाया गया काशी घोषणापत्र, युवा के नेतृत्व वाले नशा मुक्ति आंदोलन के लिए 5 साल का रोडमैप तैयार करता है। यह वास्तव में मादक पदार्थों के दुरुपयोग को लोक स्वास्थ्य और सामाजिक, दोनों दृष्टिकोणों से एक व्यापक चुनौती मानने पर एक प्रकार की राष्ट्रीय सहमति है।
- इसमें निम्नलिखित संस्थागत व्यवस्थाओं का प्रस्ताव किया गया है:
- संयुक्त राष्ट्रीय समिति का गठन;
- वार्षिक प्रगति रिपोर्ट जारी करना;
- प्रभावित व्यक्तियों को सहायता सेवाओं से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय मंच का निर्माण।
भारत में नशे के व्यसन की समस्या बढ़ने के प्रमुख कारण
- भारत की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति: भारत गोल्डन क्रिसेंट और गोल्डन ट्रायंगल के निकट स्थित है, जिससे सीमा-पार मादक पदार्थों की तस्करी को बढ़ावा मिलता है।
- सिंथेटिक ड्रग्स का विस्तार: एम्फेटामाइन-प्रकार के स्टिमुलैंट्स (ATS), सिंथेटिक ओपिओइड्स तथा नए साइकोएक्टिव पदार्थों की उपलब्धता तेजी से बढ़ रही है।
- संगठित अपराध और नार्को-आतंकवाद: मादक पदार्थों की तस्करी से प्राप्त धन संगठित अपराध, धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) तथा आतंकी नेटवर्क को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- तस्करी के बदलते तरीके: तस्कर समुद्री मार्गों, व्यावसायिक मालवाहक, आधुनिक तकनीक तथा एन्क्रिप्टेड संचार का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
- न्यायिक विलंब: नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) से संबंधित लगभग 3.96 लाख मामले लंबित हैं। देश में केवल 65 विशेष NDPS न्यायालय कार्यरत हैं, जिससे मामलों के निपटान में देरी होती है।
अन्य सरकारी पहलें
- मादक पदार्थ मांग न्यूनीकरण के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPDDR): इसका उद्देश्य व्यसन की रोकथाम, जन-जागरूकता प्रसार, उपचार, पुनर्वास तथा नशे की लत वाले लोगों को समाज से फिर से जोड़ने को बढ़ावा देना है।
- जागरूकता प्रसार: नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) तथा नवचेतना मॉड्यूल के माध्यम से नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाई जा रही है।
- उपचार और पुनर्वास: व्यसनियों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र तथा जिला नशा मुक्ति केंद्र (DDACs) के माध्यम से नशा मुक्ति उपचार और परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
- कानून प्रवर्तन: इसे नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD), एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTFs), संयुक्त समन्वय समिति (JCC) तथा राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है।