FICCI और EY ने 'विकास इंजन के रूप में शहर' शीर्षक से रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

In Summary

  • 2047 तक 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था हासिल करने के लिए भारतीय शहर महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनमें एक तिहाई आबादी रहती है और ये जीडीपी का 60% उत्पन्न करते हैं।
  • शहरों को कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तपोषण में 2.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का अंतर और बुनियादी ढांचे में 840 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कमी शामिल है।
  • प्रमुख शहरों में केंद्रित विकास, अवैध आप्रवासन और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के साथ-साथ, जीडीपी में लगभग 30% का योगदान देता है।

In Summary

यह रिपोर्ट बताती है कि भारत के शहर, वर्ष 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारतीय शहरीकरण की स्थिति

  • भारत की शहरी व्यवस्था विविध और बहु-स्तरीय है। इसमें कुछ बड़े महानगर  तथा 7,400 से अधिक शहर और कस्बे शामिल हैं।
  • वर्तमान में भारत की लगभग एक-तिहाई आबादी शहरों में रहती है, लेकिन ये देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 60% योगदान देते हैं। यह योगदान 2050 तक बढ़कर 75% होने का अनुमान है।

भारतीय शहरों द्वारा सामना की जाने वाली मुख्य समस्याएं

  • वित्त: 2050 तक जलवायु अनुकूलन (Climate Resilience) के लिए भारतीय शहरों को लगभग 2.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी, जबकि नगर निकायों  का राजस्व GDP का केवल 0.6% है। 
    • अब तक केवल 20 नगर निगमों ने पूंजी बाजार से धन जुटाया है, जिसने मिलकर 476 मिलियन अमेरिकी डॉलर ही जुटाए हैं।
  • अवसंरचनाओं की कमी: वर्ष 2047 तक आवश्यक लगभग 70% शहरी अवसंरचना अभी तक निर्मित नहीं हुई है। अगले 15 वर्षों में इसके लिए लगभग 840 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।
  • संकेन्द्रित विकास: देश के शीर्ष 10 शहर अकेले भारत के GDP का लगभग 30% योगदान देते हैं। इससे क्षेत्रीय विकास में असंतुलन उत्पन्न होता है।
  • अन्य: अवैध आप्रवासन, जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरे; जैसे कि अत्यधिक गर्मी, बाढ़ आदि। 

आगे की राह: 6 रणनीतिक परिवर्तन

सेवा प्रदायगी से आर्थिक नेतृत्व की ओर

शहरी संस्थानों को केवल बुनियादी नागरिक सेवाएँ प्रदान करने तक सीमित न रहकर निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना तथा रोजगार सृजन पर भी ध्यान देना चाहिए।

केंद्रीकृत से विकेन्द्रित बहुकेंद्रित विकास की ओर

महानगरों पर दबाव कम करने के लिए टियर-II एवं टियर-III शहरों को प्रादेशिक विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

राजकोषीय निर्भरता से निवेश-आधारित शहरों की ओर

केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय पूंजी बाजारों तक पहुँच तथा संपत्ति मुद्रीकरण के माध्यम से शहरों को आत्मनिर्भर बनाया जाए।

अवसंरचना से आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता की ओर

सफलता का आकलन केवल निर्मित अवसंरचना की संख्या से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न आर्थिक मूल्य और प्रतिस्पर्धात्मकता के आधार पर किया जाए।

आंकड़ों से आर्थिक बुद्धिमत्ता की ओर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड एनालिटिक्स का उपयोग कर शहरी डेटा को निवेश एवं योजनागत निर्णयों के लिए उपयोगी अंतर्दृष्टि में परिवर्तित किया जाए।

जलवायु खतरों से जलवायु अनुकूलन की ओर

जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन करने तथा दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने के लिए शहरों में जलवायु अनुकूलन विकसित किया जाए।

Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

एडवांस्ड एनालिटिक्स

एडवांस्ड एनालिटिक्स (Advanced Analytics) डेटा से गहरी अंतर्दृष्टि निकालने के लिए उन्नत सांख्यिकीय तकनीकों, मशीन लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने की प्रक्रिया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

कंप्यूटर साइंस का एक क्षेत्र है जो ऐसी मशीनों का निर्माण करता है जो मानव बुद्धि के समान कार्य कर सकती हैं, जैसे सीखना, समस्या-समाधान और निर्णय लेना।

टियर-II एवं टियर-III शहर

टियर-II एवं टियर-III शहर (Tier-II and Tier-III Cities) भारत में जनसंख्या घनत्व, आर्थिक गतिविधि और बुनियादी ढांचे के आधार पर शहरों को वर्गीकृत करने की एक प्रणाली है। टियर-I शहर सबसे बड़े और सबसे विकसित होते हैं, जबकि टियर-II और टियर-III क्रमशः छोटे और कम विकसित होते हैं।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet