यह रिपोर्ट बताती है कि भारत के शहर, वर्ष 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारतीय शहरीकरण की स्थिति
- भारत की शहरी व्यवस्था विविध और बहु-स्तरीय है। इसमें कुछ बड़े महानगर तथा 7,400 से अधिक शहर और कस्बे शामिल हैं।
- वर्तमान में भारत की लगभग एक-तिहाई आबादी शहरों में रहती है, लेकिन ये देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 60% योगदान देते हैं। यह योगदान 2050 तक बढ़कर 75% होने का अनुमान है।
भारतीय शहरों द्वारा सामना की जाने वाली मुख्य समस्याएं
- वित्त: 2050 तक जलवायु अनुकूलन (Climate Resilience) के लिए भारतीय शहरों को लगभग 2.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी, जबकि नगर निकायों का राजस्व GDP का केवल 0.6% है।
- अब तक केवल 20 नगर निगमों ने पूंजी बाजार से धन जुटाया है, जिसने मिलकर 476 मिलियन अमेरिकी डॉलर ही जुटाए हैं।
- अवसंरचनाओं की कमी: वर्ष 2047 तक आवश्यक लगभग 70% शहरी अवसंरचना अभी तक निर्मित नहीं हुई है। अगले 15 वर्षों में इसके लिए लगभग 840 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।
- संकेन्द्रित विकास: देश के शीर्ष 10 शहर अकेले भारत के GDP का लगभग 30% योगदान देते हैं। इससे क्षेत्रीय विकास में असंतुलन उत्पन्न होता है।
- अन्य: अवैध आप्रवासन, जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरे; जैसे कि अत्यधिक गर्मी, बाढ़ आदि।
आगे की राह: 6 रणनीतिक परिवर्तन | |
सेवा प्रदायगी से आर्थिक नेतृत्व की ओर | शहरी संस्थानों को केवल बुनियादी नागरिक सेवाएँ प्रदान करने तक सीमित न रहकर निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना तथा रोजगार सृजन पर भी ध्यान देना चाहिए। |
केंद्रीकृत से विकेन्द्रित बहुकेंद्रित विकास की ओर | महानगरों पर दबाव कम करने के लिए टियर-II एवं टियर-III शहरों को प्रादेशिक विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। |
राजकोषीय निर्भरता से निवेश-आधारित शहरों की ओर | केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय पूंजी बाजारों तक पहुँच तथा संपत्ति मुद्रीकरण के माध्यम से शहरों को आत्मनिर्भर बनाया जाए। |
अवसंरचना से आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता की ओर | सफलता का आकलन केवल निर्मित अवसंरचना की संख्या से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न आर्थिक मूल्य और प्रतिस्पर्धात्मकता के आधार पर किया जाए। |
आंकड़ों से आर्थिक बुद्धिमत्ता की ओर | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड एनालिटिक्स का उपयोग कर शहरी डेटा को निवेश एवं योजनागत निर्णयों के लिए उपयोगी अंतर्दृष्टि में परिवर्तित किया जाए। |
जलवायु खतरों से जलवायु अनुकूलन की ओर | जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन करने तथा दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने के लिए शहरों में जलवायु अनुकूलन विकसित किया जाए। |