हाल ही में जम्मू-कश्मीर में बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) की परिघटना के कारण अचानक बाढ़ आ गई। ध्यातव्य है कि सामान्य मानसूनी वर्षा लगातार और व्यापक क्षेत्रों में होती है। इसके विपरीत, बादल फटना एक स्थानीयकृत घटना है, जो बहुत छोटे क्षेत्र को प्रभावित करती है।
‘बादल फटना’ क्या है?
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यदि 100 वर्ग किमी से कम क्षेत्र में एक घंटे के भीतर लगभग 100 मिमी या उससे अधिक वर्षा होती है, तो इसे बादल फटना कहा जाता है।
- यह कभी-कभी होने वाली परिघटना है, जो मुख्यतः निम्न परिस्थितियों में घटित होती है:
- पर्वतीय उत्थापन (Orographic Lift): जब पवनें पर्वतों से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो वे ठंडी होकर तेजी से संघनित हो जाती हैं (इन्फोग्राफिक देखिए)।
- हवा का मिश्रण: कभी-कभी गर्म वायु का खंड ठंडी वायु से मिलने पर अचानक संघनन होता है। इससे भी बहुत कम समय में अत्यधिक वर्षा हो सकती है।
- पूर्वानुमान: डॉप्लर रडार का उपयोग करके बादल फटने की संभावना का पूर्वाभास 6 घंटे और कभी-कभी 12-14 घंटे पहले लगाया जा सकता है।
- प्रभाव: इसके कारण अचानक बाढ़ आना, बांध टूटना, मलबा प्रवाह और भूस्खलन जैसी घटनाएं देखी जाती हैं। इससे जान-माल, घरों, सड़कों, सार्वजनिक अवसंरचनाओं और पारितंत्र को भारी नुकसान पहुँचता है।
आगे की राह
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP 2019):
- राज्य की जिम्मेदारी: शहरी स्थानीय निकायों तथा पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता बढ़ाना, ताकि वे बादल फटना और ओलावृष्टि जैसी घटनाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारी कर सकें और प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
- केंद्र की जिम्मेदारी: ओलावृष्टि, बादल फटने और जलवायु परिवर्तन से संबंधित डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (DBMS) विकसित करना।
- 'मिशन मौसम' के तहत:
- भारत अपने रडार नेटवर्क को वर्तमान के लगभग 40 से बढ़ाकर दोगुने से अधिक करने की योजना बना रहा है।
- हाइपरलोकल (अति-स्थानीय) घटनाओं का बेहतर पूर्वानुमान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाएगा।
पर्वतीय उत्थापन (Orographic Lifting) एवं बादल फटना |
6. तीव्र ढाल वाले पर्वतीय क्षेत्रों में यह अत्यधिक एवं अचानक हुई वर्षा आकस्मिक बाढ़ का कारण बनती है। |
5. अंततः संचित समस्त जल एक साथ नीचे गिरता है, जिसे बादल फटना कहा जाता है। |
4. ऊर्ध्वगामी वायु प्रवाह के लगातार बने रहने से नमी का विसरण (Dissipation) नहीं हो पाता और बादलों में जल निरंतर संचित होता रहता है। |
3. वायु का तीव्र ऊर्ध्वगामी (ऊपर की ओर) प्रवाह संघनित जल-बूंदों (वर्षा-बूंदों) को भूमि पर गिरने से रोकता है। |
2. ऊपर उठती हुई वायु ठंडी होकर संघनित होती है, जिससे बादलों का निर्माण होता है। |
1. आर्द्र वायु किसी पर्वत या पहाड़ी से टकराकर ऊपर उठती है। |