केंद्र सरकार ने स्कूली शिक्षा के लिए समग्र शिक्षा योजना को 30 सितंबर, 2026 तक बढ़ा दिया है।
इस योजना का उद्देश्य एनईपी 2020 और आरटीई अधिनियम को लागू करना, मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान को बढ़ावा देना और समानता एवं समावेश सुनिश्चित करना है।
2018 में शुरू की गई इस योजना में सर्व शिक्षा अभियान, आरएमएसए और शिक्षक शिक्षा को शामिल किया गया है, जिसमें 15 करोड़ से अधिक छात्र शामिल हैं।
In Summary
सुर्ख़ियों में क्यों?
केंद्र सरकार ने स्कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत योजना 'समग्र शिक्षा' की अवधि को 30 सितंबर तक या सक्षम प्राधिकारी द्वारा 16वें वित्त आयोग चक्र के लिए योजना को स्वीकृति मिलने की तिथि तक (जो भी पहले हो) बढ़ा दिया है। ज्ञातव्य है इसकी अवधि 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो गई थी।
प्रमुख उद्देश्य
योजना की प्रमुख विशेषताएं
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की सिफारिशों के कार्यान्वयन को सुगम बनाना।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE अधिनियम) के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाना।
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को सुदृढ़ बनाना।
आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को बढ़ावा देना।
समग्र, समावेशी और गतिविधि-आधारित शिक्षा के साथ-साथ इक्कीसवीं सदी के कौशलों को प्रोत्साहित करना।
शिक्षा की गुणवत्ता एवं अधिगम परिणामों में सुधार करना।
विद्यालयी शिक्षा में सामाजिक एवं लैंगिक अंतराल को कम करना।
सभी स्तरों पर समानता एवं समावेशन सुनिश्चित करना।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषदों (SCERTs), राज्य शिक्षा संस्थानों तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) को सुदृढ़ बनाना।
सुरक्षित, संरक्षित एवं अनुकूल अधिगम वातावरण उपलब्ध कराना।
व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास को प्रोत्साहित करना।
समग्र शिक्षा योजना के बारे में
प्रारंभ वर्ष: 2018
मंत्रालय: शिक्षा मंत्रालय
उद्देश्य: विद्यालयी शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना, वंचित समूहों एवं कमजोर वर्गों को शामिल करके समानता को बढ़ावा देना तथा पूर्व-प्राथमिक स्तर से लेकर कक्षा 12 तक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना।
योजना का प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना।
क्रियान्वयन एजेंसी:
राज्य स्तर पर: राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र स्तर पर राज्य कार्यान्वयन समिति (SIS)।
राष्ट्रीय स्तर पर: शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शासी परिषद तथा विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव की अध्यक्षता में परियोजना अनुमोदन बोर्ड।
वित्तीय भागीदारी का स्वरूप:
पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए: केंद्र और राज्यों के बीच 90:10 का अनुपात।
विधानमंडल रहित संघ राज्य क्षेत्रों के लिए: 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता।
अन्य सभी राज्यों के लिए: केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का अनुपात।
इस योजना में पूर्ववर्ती सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) तथा शिक्षक शिक्षा योजना को समाहित किया गया है।
सर्व शिक्षा अभियान: RTE Act, 2009 के अनुरूप आधारभूत अवसंरचना उपलब्ध कराकर प्रारंभिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण को सुनिश्चित करता है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान: माध्यमिक शिक्षा तक पहुँच और उसकी गुणवत्ता में सुधार करता है।
शिक्षक शिक्षा योजना: शिक्षकों के प्रशिक्षण तथा प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों को शैक्षणिक सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक अवसंरचना का विकास करती है।
कवरेज: इस योजना के अंतर्गत 11 लाख 60 हजार विद्यालय, 15 करोड़ 56 लाख से अधिक विद्यार्थी तथा सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के 57 लाख शिक्षक शामिल हैं।
प्रमुख हस्तक्षेप
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना: पूर्व-प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक नए विद्यालयों की स्थापना तथा विद्यालयों के उन्नयन का प्रावधान।
बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBVs) का उन्नयन।
समावेशी शिक्षा: कक्षा 1 से 12 तक के विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) को सहायता प्रदान करना।
निपुण भारत (आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान के लिए राष्ट्रीय मिशन): इस योजना के अंतर्गत निपुण भारत मिशन प्रारंभ किया गया है।
शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को सुदृढ़ बनाना:
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की निष्ठा (NISHTHA) योजना के अंतर्गत माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं।
नवाचार:
राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र परख (PARAKH – समग्र विकास के लिए प्रदर्शन, मूल्यांकन, समीक्षा और ज्ञान का विश्लेषण) की गतिविधियों को सहायता प्रदान करना।
समग्र प्रगति कार्ड (HPC), खेल अनुदान, पुस्तकालय
अनुदान आदि जैसी गुणात्मक और नवोन्मेषी पहलों के लिए प्रावधान करना।
योजना में भाषा शिक्षकों की नियुक्ति का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
डिजिटल पहलें: सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) प्रयोगशालाएं, डिजिटल बोर्ड से युक्त स्मार्ट कक्षाएं, आभासी कक्षाएं आदि की व्यवस्था करना।
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT - Information and Communication Technology)
Refers to the use of technology, including computers, internet, and digital devices, to enhance teaching and learning processes, create smart classrooms, and improve educational delivery in schools.
विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN - Children with Special Needs)
Refers to children who have disabilities or learning challenges and require specialized educational support and inclusive learning environments to facilitate their academic and personal growth.
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBVs - Kasturba Gandhi Balika Vidyalayas)
Residential schools established for girls from disadvantaged sections of society, particularly in educationally backward areas, to provide them with quality elementary education and support their overall development.
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