अधिकरण (ट्रिब्यूनल) व्यवस्था पर संसदीय समिति की रिपोर्ट | Current Affairs | Vision IAS

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कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने देश में 'अधिकरण (ट्रिब्यूनल) व्यवस्था की कार्यप्रणाली की समीक्षा' पर अपनी 166वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की।

भारतीय अधिकरण (ट्रिब्यूनल) प्रणाली में व्यवस्थागत समस्याएं और अनुशंसित सुधार

व्यवस्थागत समस्याएं 

सभी क्षेत्रों में समस्या का प्रभाव और उदाहरण

संसदीय समिति के सुझाव

अध्यक्ष और रजिस्ट्री संवर्गों में रिक्तियां 

  • सदस्यों के पद खाली होने से सुनवाई प्रभावित होती है जबकि रजिस्ट्री के पद खाली होने से न्यायालय का प्रशासन प्रभावित होता है।
    • आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT): 126 सदस्य पदों में 27 रिक्त। सभी 7 डिप्टी रजिस्ट्रार पद खाली।
    • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT): न्यूनतम 10-10 न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्यों की जगह केवल 5 न्यायिक और 6 विशेषज्ञ सदस्य।
  • नियुक्ति में सक्रियता: रिक्ति होने से पहले ही समय पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए।
  • रजिस्ट्री को प्राथमिकता: मंत्रालयों/भर्ती एजेंसियों के साथ समन्वय के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक रजिस्ट्री और सहायक पदों को भरा जाए।

 

संविदा और आउटसोर्स कर्मियों पर अत्यधिक निर्भरता

  • अस्थायी कर्मचारियों की वजह से कर्मचारी नौकरी छोड़कर चले जाते हैं, संस्थागत जानकारी का नुकसान होता है और विशेषीकृत न्यायालय प्रबंधन क्षमता कमज़ोर होती है।
    • राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT): 95% से अधिक प्रशासनिक कर्मचारी संविदा पर हैं।
    • दूरसंचार विवाद समाधान एवं अपील अधिकरण (TDSAT): 2001 से कर्मचारियों की संख्या 52 पदों पर ही सीमित (फ्रीज) है, जिससे आउटसोर्सिंग पर निर्भरता बढ़ रही है।
  • स्थायी संवर्ग: कर्मचारियों की संख्या की आवश्यकता का स्टाफ ऑडिट किया जाए और स्थायी पदों का सृजन किया जाए।
  • आरक्षित सूची: त्यागपत्र के बाद पद पर शीघ्र नियुक्ति के लिए प्रतीक्षा/आरक्षित सूची का उपयोग किया जाए।

 

लंबित मामलों का बढ़ता बोझ और समय-सीमा का उल्लंघन

  • मामलों के लंबित रहने से जनता और कर्जदारों का विश्वास कम होता है तथा विधिक राहत की प्रभावशीलता घटती है।
    • ITAT: केवल 5 महीनों में 19,275 मामले और लंबित हुए।
    • NCLT: कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) की समय-सीमा का बार-बार उल्लंघन होता रहा है।
  • सख्त लक्ष्य: मामलों के निपटारे और आदेश जारी करने के लिए मासिक लक्ष्य तय किए जाएँ।
  • मामलों का प्रबंधन: पुराने मामलों के लिए चरणवार डेटा का उपयोग किया जाए और विशेष पीठ गठित की जाए।

 

अपर्याप्त और पुरानी अवसंरचना

  • पुराने और किराए के भवनों के कारण विस्तार और आधुनिक न्याय प्रणाली प्रभावित होते हैं।
    • NCLT: न्यायालय कक्ष  राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (NCMS) मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
    • रेल दावा अधिकरण (RCT): अलग पूंजीगत बजट नहीं है और यह जोनल रेलवे पर निर्भर है।
  • विशेष पूंजीगत बजट: अधिकरणों के लिए अलग पूंजीगत बजट सुनिश्चित किया जाए।
  • आधुनिक न्यायालय: पुराने/किराए के भवनों की जगह आधुनिक और स्थायी न्यायिक परिसरों का निर्माण किया जाए।

 

पुरानी IT व्यवस्था और डिजिटल परिवर्तन की कमी

  • पुरानी IT व्यवस्था, अलग-अलग केस प्रबंधन प्रणाली और तकनीकी सहायता की कमी से न्याय तक पहुँच और डेटा सुरक्षा प्रभावित होती है।
    • NGT: कोई अलग आंतरिक IT विभाग नहीं।
    • NCLT: मौजूदा e-कोर्ट पोर्टल पुराना हो चुका है।

 

  • विशेष IT प्रभाग: सभी पीठों में स्थायी IT और तकनीकी पदों का सृजन किया जाए। 
  • अपग्रेड और ऑडिट: हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपग्रेड करने के लिए वित्त उपलब्ध कराया जाए, NCLT 2.0 को प्राथमिकता दी जाए और नियमित साइबर सुरक्षा ऑडिट हो।

क्षेत्रक-विशेष विशेषज्ञता और जनता की पहुंच में कमी

  • विशेषज्ञ प्रशिक्षण की कमी से तकनीकी मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है, भाषा संबंधी बाधाएं न्याय तक पहुँच को सीमित करती हैं।
    • TDSAT: 2001 से सदस्य संरचना में बदलाव नहीं; साइबर फ्रॉड, आधार और AI जैसे नए क्षेत्रों में विशेषज्ञता की कमी।
    • RCT: 23 पीठों में से केवल 9 में विधिक सहायता उपलब्ध है।
  • क्षमता निर्माण: तकनीकी संस्थानों के सहयोग से नियमित विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाए।
  • सुगम पहुंच के लिए सुधार: बहुभाषी जानकारी और एक समान ऑनलाइन फाइलिंग व्यवस्था विकसित की जाए। विधिक सहायता केंद्रों का विस्तार किया जाए।

 

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NCLT 2.0

राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) के संचालन और प्रक्रियाओं में सुधार और आधुनिकीकरण की एक पहल, जिसका उद्देश्य इसकी दक्षता और पहुंच को बढ़ाना है।

राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (NCMS)

न्यायालयों के प्रशासन, कार्यप्रवाह और डेटा प्रबंधन को मानकीकृत और बेहतर बनाने के लिए एक प्रस्तावित प्रणाली, जिसका उद्देश्य न्याय वितरण में दक्षता लाना है।

रेल दावा अधिकरण (RCT)

रेलवे यात्रियों को होने वाली चोटों या हानि के दावों का निपटान करने के लिए स्थापित एक निकाय।

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