गृह कार्य संबंधी समिति विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने ‘साइबर अपराध: प्रभाव, सुरक्षा और निवारण’ पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
समिति की मुख्य टिप्पणियां और मुख्य सुझाव | |
मध्यवर्ती (इंटरमीडियरी) और डिजिटल प्लेटफॉर्म | |
शिकायत निवारण व्यवस्था में कमियां: वर्तमान शिकायत निवारण व्यवस्था में मानकीकृत प्रारूप, सार्वजनिक आँकड़े और डेटा संरक्षण कानूनों के साथ उचित समन्वय की कमी है। |
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OTT कंटेंट और नाबालिगों की पहुँच: केवल स्व-विनियमन पर निर्भर रहने से बच्चों को उम्र के अनुरूप न होने वाले कंटेंट से पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया जा रहा है। |
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फर्जी/भ्रामक विदेशी ऑनलाइन विज्ञापन: नागरिकों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों में विज्ञापनदाता की पहचान सत्यापित करने की व्यवस्था पर्याप्त सुदृढ़ नहीं है। |
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वित्तीय अपराध और साइबर जांच | |
म्यूल अकाउंट और भुगतान में धोखाधड़ी: जटिल मुद्रा म्यूल नेटवर्क का पता लगाने के लिए विभिन्न संस्थाओं के धोखाधड़ी संबंधी डेटा को बेहतर तरीके से जोड़ना आवश्यक है। |
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CBI की क्षेत्राधिकार संबंधी सीमाएँ: कुछ राज्यों द्वारा सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट) वापस लेने से अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों की जांच में देरी होती है। |
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शिकायत को FIR में रूपांतरण में देरी: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों को FIR में बदलने की मैनुअल प्रक्रिया में देरी होने से ठगी गई राशि की त्वरित वसूली और रिफंड प्रभावित होता है। |
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शिक्षा, जागरूकता और विधिक सुधार | |
प्रारंभिक स्तर पर साइबर शिक्षा की कमी: स्कूलों में साइबर हाइजीन और साइबर सुरक्षा की शिक्षा सभी स्तरों पर समान रूप से लागू नहीं है। |
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पुराने विधिक प्रावधान: प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण मौजूदा कानूनों में समय-समय पर संशोधन करना आवश्यक है। |
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अलग-अलग कानूनों में विभाजित साइबर अपराध कानून: साइबर अपराध से संबंधित कानून कई अलग-अलग अधिनियमों में विभाजित होने के कारण जांच, कानून लागू करने और न्यायिक प्रक्रिया में चुनौतियां आती हैं। |
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