भारत में साइबर अपराध पर संसदीय समिति की रिपोर्ट | Current Affairs | Vision IAS

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गृह कार्य संबंधी समिति विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने ‘साइबर अपराध: प्रभाव, सुरक्षा और निवारण’ पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

समिति की मुख्य टिप्पणियां और मुख्य सुझाव

मध्यवर्ती (इंटरमीडियरी) और डिजिटल प्लेटफॉर्म

शिकायत निवारण व्यवस्था में कमियां: वर्तमान शिकायत निवारण व्यवस्था में मानकीकृत प्रारूप, सार्वजनिक आँकड़े और डेटा संरक्षण कानूनों के साथ उचित समन्वय की कमी है।

  • एक मानकीकृत, सुगम्य और बहुभाषी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित की जाए, 
  • प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट ट्रैकिंग नंबर दिया जाए और समय पर समाधान न होने पर स्वतः उच्च स्तर पर भेजने की व्यवस्था हो।
  • शिकायतों से संबंधित गुमनाम/अनाम डेटा समय-समय पर सार्वजनिक किए जाएँ।

OTT कंटेंट और नाबालिगों की पहुँच: केवल स्व-विनियमन पर निर्भर रहने से बच्चों को उम्र के अनुरूप न होने वाले कंटेंट से पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया जा रहा है।

  • बाल विकास और विधि विशेषज्ञों वाली एक स्वतंत्र ‘पोस्ट-रिलीज़ समीक्षा समिति’ बनाई जाए।
  • प्रभावी प्रौद्योगिकी आधारित उम्र सत्यापन और माता-पिता द्वारा नियंत्रण अनिवार्य किए जाएँ।
  • कंटेंट वर्गीकरण नियमों का अनुपालन न करने पर कड़े दंड का प्रावधान हो।

फर्जी/भ्रामक विदेशी ऑनलाइन विज्ञापन: नागरिकों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों में विज्ञापनदाता की पहचान सत्यापित करने की व्यवस्था पर्याप्त सुदृढ़ नहीं है।

  • डिजिटल दस्तावेज के अनिवार्य सत्यापन और लाइव वीडियो पहचान की व्यवस्था की जाए।
  • जीरो-ट्रस्ट फ्रेमवर्क के सिद्धांतों के आधार पर निरंतर निगरानी की जाए।

वित्तीय अपराध और साइबर जांच

म्यूल अकाउंट और भुगतान में धोखाधड़ी: जटिल मुद्रा म्यूल नेटवर्क का पता लगाने के लिए विभिन्न संस्थाओं के धोखाधड़ी संबंधी डेटा को बेहतर तरीके से जोड़ना आवश्यक है।

  • सेंट्रल पेमेंट फ्रॉड इंफॉर्मेशन रजिस्ट्री (CPFIR) को पूरी तरह कार्यात्मक बनाया जाए।
  • CPFIR को एक इंटर-ऑपरेबल और रियल-टाइम रजिस्ट्री के रूप में विकसित किया जाए, ताकि पूरे वित्तीय क्षेत्र में साइबर खतरों का विश्लेषण किया जा सके।

CBI की क्षेत्राधिकार संबंधी सीमाएँ: कुछ राज्यों द्वारा सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट) वापस लेने से अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों की जांच में देरी होती है।

  • केंद्रीय गृह मंत्रालय को राज्यों के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर स्थायी सहयोग की व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
  • दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946 (DSPE Act) में संशोधन कर CBI को बड़े साइबर अपराधों की जाँच राज्य की पूर्व-सहमति के बिना करने की शक्ति देने पर विचार किया जाए।

शिकायत को FIR में रूपांतरण में देरी: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों को FIR में बदलने की मैनुअल प्रक्रिया में देरी होने से ठगी गई राशि की त्वरित वसूली और रिफंड प्रभावित होता है।

  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के माध्यम से पूरे देश में समयबद्ध रोडमैप बनाया जाए।
  • NCRP की शिकायतों को e-FIR में स्वतः बदलने की व्यवस्था विकसित की जाए।

शिक्षा, जागरूकता और विधिक सुधार

प्रारंभिक स्तर पर साइबर शिक्षा की कमी: स्कूलों में साइबर हाइजीन और साइबर सुरक्षा की शिक्षा सभी स्तरों पर समान रूप से लागू नहीं है।

  • प्रारंभिक कक्षाओं से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक सभी बोर्डों में अनिवार्य और चरणबद्ध साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम लागू किया जाए।
  • शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल और बहुभाषी शिक्षण कंटेंट तैयार किए जाएं

पुराने विधिक प्रावधान: प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण मौजूदा कानूनों में समय-समय पर संशोधन करना आवश्यक है।

  • साइबर कानूनों की नियमित समीक्षा और अद्यतन के लिए एक स्थायी और बहु-विषयक तंत्र बनाया जाए।

अलग-अलग कानूनों में विभाजित साइबर अपराध कानून: साइबर अपराध से संबंधित कानून कई अलग-अलग अधिनियमों में विभाजित होने के कारण जांच, कानून लागू करने और न्यायिक प्रक्रिया में चुनौतियां आती हैं।

  • एक व्यापक, एकीकृत और प्रौद्योगिकी-तटस्थ साइबर अपराध कानून बनाया जाए।
  • राष्ट्रीय स्तर पर अधिकार क्षेत्र रखने वाला एक विशेषीकृत एकीकृत साइबर अपराध कार्य बल स्थापित किया जाए।
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प्रौद्योगिकी-तटस्थ साइबर अपराध कानून

प्रौद्योगिकी-तटस्थ साइबर अपराध कानून एक ऐसा कानून है जो विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के बजाय अपराध के मूल सार को संबोधित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि कानून नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुकूल बना रहे।

साइबर हाइजीन

साइबर हाइजीन से तात्पर्य उन अच्छी प्रथाओं और आदतों से है जिनका पालन व्यक्तियों को अपनी ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए करना चाहिए। इसमें मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना, फिशिंग हमलों से बचना और सॉफ्टवेयर को अपडेट रखना शामिल है।

e-FIR

An electronic First Information Report that can be filed online, often for certain types of offenses. It aims to streamline the process of reporting crimes.

Title is required. Maximum 500 characters.

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