गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर (1861–1941)
केंद्रीय गृह मंत्री ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बारे में
- प्रारंभिक जीवन: रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म कोलकाता में हुआ था। वे देवेंद्रनाथ टैगोर के सबसे छोटे पुत्र थे, जो ब्रह्म समाज के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुख्य रूप से घर पर ही हुई।

- साहित्यिक योगदान:
- उन्होंने 50 से अधिक काव्य कृतियाँ लिखीं, जिनमें मानसी (1890) और सोनार तरी (1894) प्रमुख हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में गीतांजलि (1912) शामिल है।
- 1913 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार: 1913 में उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। वे नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय और पहले गैर-यूरोपीय व्यक्ति थे। यह पुरस्कार मुख्य रूप से गीतांजलि की संवेदनशील और सुंदर कविताओं के लिए दिया गया था।
- रवींद्रनाथ टैगोर ने दो देशों के राष्ट्रगान लिखे-भारत (जन गण मन) और बांग्लादेश (आमार शोनार बांग्ला)
- सामाजिक और शैक्षिक योगदान: उन्होंने शांतिनिकेतन में एक प्रयोगात्मक विद्यालय की स्थापना की। शांतिनिकेतन आज यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है।
- राष्ट्रवाद और नाइटहुड: 1915 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘नाइटहुड’ की उपाधि प्रदान की, लेकिन 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने यह उपाधि वापस कर दी।
- प्रमुख विचार और मूल्य: मानवतावाद, देशभक्ति, विचारों की स्वतंत्रता, प्रकृति के प्रति प्रेम, रचनात्मकता, शांति
- टैगोर का दर्शन: मानवता, स्वतंत्र चिंतन और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर आधारित था।