गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने आपदा प्रबंधन पर अपनी समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
- आपदा प्रबंधन का अर्थ है—आपदाओं से निपटने के लिए तैयारी करना, आपदा के दौरान प्रभावी उपाय करना और आपदा के बाद पुनर्वास एवं पुनर्बहाली के लिए योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (2025 के संशोधन सहित) आपदा प्रबंधन की योजनाएं बनाने और उनके कार्यान्वयन की निगरानी के लिए संस्थागत तंत्र की व्यवस्था करता है।
समिति द्वारा चिन्हित प्रमुख समस्याएं और सुझाव | ||
विषय क्षेत्र | चिन्हित कमियां एवं मुख्य मुद्दे | सुझाव |
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति, 2009 | 2009 के बाद आपदा का स्वरूप काफी बदल गया है। जलवायु परिवर्तन, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और पूर्वानुमान में नई प्रौद्योगिकियों की क्षमताएं जैसी नई चुनौतियां सामने आई हैं। | 2009 के बाद के विकासक्रम को दर्शाने के लिए नीति की औपचारिक समीक्षा शुरू की जाए, जिसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, शहरीकरण के जोखिम, AI और भूस्थानिक (जियोस्पेशियल) तकनीक की भूमिका का अध्ययन शामिल हो। |
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) | NDMP पहली बार 2016 में जारी हुई और 2019 में संशोधित की गई। यह आपदा प्रबंधन संशोधन अधिनियम, 2025 से पहले की है। AI आधारित पूर्वानुमान और राष्ट्रीय आपदा शमन निधि से संबंधित हालिया विकासों को इसमें पूरी तरह शामिल नहीं किया गया है। | NDMP में शीघ्र संशोधन किया जाए, ताकि योजना वर्तमान विधिक, संस्थागत, वित्तीय और तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप हो। |
अग्निशमन सेवाओं से संबंधित कानून | 2019 में जारी अग्निशमन और आपातकालीन सेवा रखरखाव मॉडल विधेयक को अभी तक केवल 10 राज्यों ने अपनाया है। शहरों में आग लगने के तेजी से बढ़ते खतरों को देखते हुए यह गंभीर चिंता का विषय है। | केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को शेष सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को मॉडल विधेयक अपनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित और सहयोग करना चाहिए। इसके लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए। |
शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UDMA) | आपदा प्रबंधन संशोधन अधिनियम, 2025 के विधायी प्रावधानों के बावजूद, केवल एक राज्य (कर्नाटक) ने अपने शहरों के लिए एक विशेष UDMA का गठन किया है। | केंद्रीय गृह मंत्रालय को राज्य की राजधानी वाले शहरों और नगर निगम वाले शहरों के लिए UDMA गठित करने हेतु सभी राज्य सरकारों को परामर्श जारी करना चाहिए। |
खतरे की पहचान (मैपिंग) और नगर नियोजन | आपदा जोखिम क्षेत्रों की पहचान या मानचित्रण, उसका मानकीकरण और नगर नियोजन में उसका प्रभावी उपयोग अभी भी अधूरा है। | भूकंपीय माइक्रोजोनेशन और भूस्खलन प्रवण क्षेत्रों के मानचित्र निर्माण को नगर नियोजन नियमों में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। साथ ही, बड़ी अवसंरचनाओं और शहरी विकास परियोजनाओं के लिए आपदा जोखिम प्रभाव आकलन (DRIA) अनिवार्य किया जाए। |
आपदा प्रबंधन वित्तपोषण | आपदा प्रबंधन से संबंधित व्यय अभी भी मुख्य रूप से राहत और त्वरित कार्रवाई पर केंद्रित है। आपदा जोखिम को कम करने पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है। | शमन निधि (मिटिगेशन फंड) के उपयोग और परिणामों की निगरानी के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था बनाई जाए। साथ में, आपदा जोखिम शमन वित्तीय तंत्र को सुदृढ़ किया जाए। |
समुदाय और स्थानीय शासन | जमीनी स्तर पर आपदा से निपटने की क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है। ग्राम आपदा प्रबंधन योजनाएं (VDMPs) नियमित रूप से तैयार और अद्यतन नहीं किए जाते हैं। | आपदा मित्र जैसी सामुदायिक योजनाओं का विस्तार किया जाए, स्वयंसेवकों को पर्याप्त प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तथा ग्राम आपदा प्रबंधन योजनाओं को व्यवस्थित रूप से जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं में शामिल किया जाए। |