भारत की पवन ऊर्जा क्षमता बढ़कर 51.5 गीगावाट (GW) हुई | Current Affairs | Vision IAS
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केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने ग्लोबल विंड डे 2025 के अवसर पर बताया कि भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता मई 2024 में 193.58 GW थी, जो बढ़कर मई 2025 में 226.74 GW हो गई। 

  • इस तरह नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में एक साल में 17.13% की वृद्धि हुई है। इसी अवधि में पवन ऊर्जा क्षमता में 10.5% और सौर ऊर्जा क्षमता में 31.49% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष 15 जून को ‘विश्व पवन दिवस’ यानी ‘ग्लोबल विंड डे’ मनाया जाता है। 

भारत में पवन ऊर्जा की स्थिति

  • विश्व में भारत की स्थिति: भारत स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर है। साथ ही, भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक देश भी है।
  • ऊर्जा क्षमता में अधिक वृद्धि: भारत में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 2014 में 21.04 गीगावाट थी, जो मई 2025 में बढ़कर 51.5 गीगावाट हो गई।
  • नवीकरणीय ऊर्जा में योगदान: भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में सर्वाधिक हिस्सेदारी सौर ऊर्जा की है। इसके बाद पवन ऊर्जा का स्थान आता है।  
  • पवन ऊर्जा की सर्वाधिक संभावना वाले राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, आदि। 

पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहलें

  • केंद्रीयकृत डेटा संग्रह और समन्वय (CCDC) पवन पहल: इसका उद्देश्य पवन ऊर्जा संसाधनों के आकलन में सुधार करना और पवन ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयुक्त स्थलों की पहचान करना है।
  • राष्ट्रीय पवन-सौर हाइब्रिड नीति, 2018: यह नीति बड़े ग्रिड से जुड़े पवन-सौर ऊर्जा फोटोवोल्टिक हाइब्रिड सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करती है। इससे संसाधनों का प्रभावी तरीके से और अधिकतम उपयोग करने में मदद मिलती है।
  • ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना: यह योजना राष्ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति, 2015 के अनुरूप है।
  • अन्य पहलें: 
    • ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस नियम (2022) जारी किया गया है। 
    • नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व (RPO) मेकेनिज्म की शुरुआत की गई है, आदि। 

भारत में पवन ऊर्जा से जुड़ी चुनौतियां

  • अवसंरचना से जुड़ी चुनौतियां
    • पवन ऊर्जा सहित अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन स्थिर नहीं रहता। इसके कारण ग्रिड से आपूर्ति प्रभावित होती रहती है।
    • पर्याप्त ट्रांसमिशन अवसंरचना उपलब्ध नहीं है। 
    • पावर इवैक्यूएशन की समुचित व्यवस्था का अभाव है। 
      • पावर इवैक्यूएशन का अर्थ है ऊर्जा उत्पादन केंद्र से उत्पन्न बिजली को विद्युत ग्रिड तक सुरक्षित और कुशल तरीके से पहुँचाना।
  • आर्थिक चुनौतियां: लघु आकार की पवन ऊर्जा परियोजनाओं में भी अधिक निवेश की जरुरत पड़ती है। ऐसी परियोजनाओं में निवेश की लागत भी अधिक होती है और बिजली प्रशुल्क दरों में उतार-चढ़ाव के कारण वित्तीय नुकसान का खतरा भी बना रहता है।
  • तकनीकी समस्याएं
    • पवन ऊर्जा उत्पादन केंद्र की स्थापना और इनका संचालन जटिल कार्य है। 
    • उपकरणों को दुर्गम क्षेत्रों तक ले जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। 
    • नियमित रखरखाव में भी चुनौतियां आती हैं।

 

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