बैंक ऑफ बड़ौदा के अध्ययन से पता चलता है कि सरकार ने ऋण चुकाने के बढ़ते दायित्वों के बीच बॉण्ड स्विचिंग के माध्यम से ब्याज भुगतान में 560 करोड़ रुपये की बचत की है।
बॉन्ड स्विचिंग के बारे में
- यह एक प्रक्रिया है जिसमें सरकार लघु अवधि में परिपक्व होने वाले सॉवरेन बॉण्ड को बेचकर दीर्घ अवधि में भुगतान वाले सॉवरेन बॉण्ड खरीदती है। इसका उद्देश्य सरकार के कर्ज भुगतान के दबाव को कम करना होता है।
- उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 27, वित्त वर्ष 28 और वित्त वर्ष 29 में परिपक्व होने वाले बॉण्ड्स को बेचकर वित्त वर्ष 32 के बाद परिपक्व होने वाले बॉण्ड्स की खरीद की जा रही है। इससे सरकार पर त्वरित ऋण भुगतान का दायित्व कम होता है।
- यह लेनदेन बाजार के भागीदारों के साथ या सीधे भारतीय रिजर्व बैंक के साथ किया जाता है।
- उद्देश्य: सरकार पर निकट भविष्य में कर्ज के भुगतान के दायित्व को कम करना और बॉण्ड बाजार मजबूत करना।
हाल ही में आयकर विभाग ने पैन 2.0 परियोजना का कॉन्ट्रैक्ट एक प्रौद्योगिकी कंपनी को दिया है।
पैन 2.0 परियोजना (2024) के बारे में
- उद्देश्य: पैन (PAN) और टैन (TAN) जारी करने और प्रबंधित करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाना।
- PAN नंबर आवंटन 1972 में शुरू हुआ। यह 10-अंकीय अल्फ़ान्यूमेरिक पहचान है। यह किसी व्यक्ति या संस्था के वित्तीय लेनदेन (जैसे आय रिटर्न) को आयकर विभाग विभाग से लिंक करता है।
- टैन (कर कटौती और संग्रहण खाता संख्या) 10-अंकीय अल्फ़ान्यूमेरिक कोड है जिसे आयकर विभाग द्वारा TDS/TCS काटने वाली संस्थाओं को जारी किया जाता है।
- विशेषताएं: एकल पोर्टल, पेपरलेस प्रोसेसिंग, विशिष्ट सुरक्षा उपाय (जैसे पैन डेटा वॉल्ट), आदि।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने PMMVY के लिए विशेष पंजीकरण अभियान जारी रखने की तिथि को बढ़ा दिया है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के बारे में
- योजना का प्रकार: यह केंद्र प्रायोजित योजना है। इसे मिशन शक्ति की उप-योजना 'समर्थ्य' के तहत संचालित की जा रही है।
- उद्देश्य:
- गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं (PW&LM) को पोषक आहार लेने और कार्य से अनुपस्थित रहने पर पारिश्रमिक की हानि की भरपाई हेतु प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से आर्थिक सहायता देना;
- उपर्युक्त माताओं को स्वास्थ्य-देखभाल सेवाएं प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- उपर्युक्त प्रावधान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 की धारा 4 के अनुरूप हैं।
- नकद प्रोत्साहन: प्रथम संतान के जन्म पर 2 किस्तों में 5,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। दूसरे संतान के रूप लड़की के जन्म होने पर एक किस्त में 6,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं।
हाल ही में संयुक्त अभियान दल ने लद्दाख के पैंगोंग त्सो क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटियों; माउंट मेरग-III और माउंट कांग्जू कांगरी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की।
- पैंगोंग पर्वत श्रेणी, लद्दाख पर्वतमाला की सहायक श्रेणी है। इस श्रेणी का नाम पैंगोंग त्सो (झील) के नाम पर पड़ा है।
पैंगोंग त्सो झील के बारे में
- ऊंचाई: यह समुद्र तल से 4,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- यह दुनिया की सबसे ऊँचाई पर स्थित खारे जल की झील है।
- इसका एक तिहाई हिस्सा भारत में तथा शेष दो तिहाई हिस्सा चीन में है।
- विशेषताएँ: इस झील के पानी का रंग कभी नीला, कभी धूसर-हरा और कभी लाल दिखाई देता है।
- खारा जल होने के बावजूद यह झील सर्दियों में पूरी तरह जम जाती है।
- आश्रय स्थली: गर्मियों के दौरान बार हेडेड गीज, ब्राह्मणी बत्तख, काली गर्दन वाले सारस और सीगल जैसी पक्षी प्रजातियां इस झील के पास देखी जाती हैं।
Article Sources
1 sourceनागालैंड के ज़ेलियांग सामुदायिक रिजर्व में एशियाई विशालकाय कछुए को फिर से लाया गया है।
एशियाई विशालकाय कछुए के बारे में
- पर्यावास: यह कछुआ प्रजाति बांग्लादेश, ब्रुनेई, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, और थाईलैंड के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय पर्वतीय सदाबहार वनों में पाई जाती है।
- सिंगापुर में यह प्रजाति अब विलुप्त हो चुकी है।
- प्रमुख विशेषताएँ: यह एशिया की मुख्य भूमि पर पाई जाने वाली सबसे बड़ी कछुआ प्रजाति है। यह एक कीस्टोन प्रजाति है, यानी इसका अस्तित्व पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए आवश्यक है।
- यह एकमात्र कछुआ प्रजाति है जो जमीन के ऊपर अंडे देने के लिए घोंसला बनाती है, जबकि अन्य कछुआ प्रजातियां जमीन में गड्ढा बनाकर अंडे देती हैं।
- संरक्षण स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट: क्रिटीकली एंडेंजर्ड,
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-1 में सूचीबद्ध।
- मुख्य खतरे: पर्यावास नष्ट होना; स्थानीय उपभोग के लिए शिकार करना, आदि।
हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण को लेकर जो आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
E20 ईंधन के बारे में:
- यह पेट्रोल और एथेनॉल का 80:20 अनुपात में मिश्रण है।
- राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति, 2018 (2022 में संशोधित): 2030 की बजाय अब एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025-26 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा गया है
- लाभ:
- ईंधन के प्रदर्शन में सुधार करता है, वाहन के संपूर्ण उपयोग काल के दौरान होने वाले उत्सर्जन को कम करने में योगदान देता है।
- ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है तथा किसानों और ग्रामीण क्षेत्र को आर्थिक लाभ प्रदान करता है।
- मुख्य चिंताएँ:
- कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता में कमी आने की आशंका,
- पुराने वाहनों में जंग लगना या ख़राब हो जाना, तथा
- इंजन में संशोधन की आवश्यकता के कारण रखरखाव लागत बढ़ना।
हाल ही में NMPB ने दो रणनीतिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य विलुप्ति का सामने कर रहे औषधीय पादपों के जर्मप्लाज्म का संरक्षण करना और एम्स (नई दिल्ली) में राष्ट्रीय औषधीय पादप उद्यान की स्थापना करना है।
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) के बारे में
- 2000 में स्थापित यह बोर्ड केंद्रीय आयुष मंत्रालय के एक अनुभाग के रूप में कार्य कर रहा है ।
- उद्देश्य: नीति संबंधी कार्यान्वयन के लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के माध्यम से औषधीय पादपों के उत्पादन क्षेत्र का विकास।
- कार्य:
- इन-सीटू एवं एक्स-सीटू संरक्षण को बढ़ावा देना;
- स्थानीय औषधीय पादपों और चिकित्सा महत्व वाली सुगंधित पादप प्रजातियों की खेती को बढ़ावा देना,
- अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना और जागरूकता बढ़ाना;जैसे-घर/स्कूल में हर्बल उद्यान स्थापित करना,
- गुणवत्ता आश्वासन और मानकीकरण का समर्थन करना; जैसे-गुड एग्रीकल्चरल एंड कलेक्शन प्रैक्टिसेस (GACPs),
- प्राकृतिक (पदार्थ) दवा, बीजों और रोपण सामग्री की गुणवत्ता के प्रमाणन को सुविधाजनक बनाना।
Article Sources
1 sourceदक्षिण अफ्रीका के एक विश्वविद्यालय ने वॉटरबर्ग बायोस्फीयर रिजर्व में राइजोटोप परियोजना (Rhisotope Project) शुरू की है। इसके तहत गैंडों के अवैध शिकार को रोकने के लिए आइसोटोप टैगिंग पद्धति को अपनाया गया है।
आइसोटोप टैगिंग कैसे कार्य करती है?
- रेडियोधर्मी समस्थानिक या रेडियो आइसोटोप: यह किसी तत्व का अस्थिर रूप होता है, जो अधिक स्थिर रूप में आने के लिए विकिरण उत्सर्जित करता है।
- इस विकिरण का पता लगाया जा सकता है, तथा यह जिस पदार्थ पर पड़ती है, उसमें आम तौर पर परिवर्तन उत्पन्न कर देती है।
- आइसोटोप टैगिंग: एक नॉन-इनवेसिव प्रक्रिया के माध्यम से गैंडे के सींगों में रेडियोधर्मी आइसोटोप की अत्यंत कम मात्रा को इंजेक्ट किया जाता है।
- अनधिकृत परमाणु सामग्रियों की पहचान करने के लिए दुनिया भर में सीमाओं, बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर लगाए गए रेडिएशन पोर्टल मॉनिटर (RPMs) टैग किए गए गैंडों के सींग (हॉर्न) का आसानी से पता लगा लेंगे।