भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS
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  • आरबीआई की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में टिकाऊ संप्रभु ऋण, एआई के प्रति आशावाद जो कमजोरियों को छुपा रहा है, और उच्च हानि के साथ फिनटेक ऋण जोखिमों पर प्रकाश डाला गया है।
  • रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि विदेशी स्टेबलकॉइन भारत की मौद्रिक संप्रभुता के लिए खतरा बन सकते हैं और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा दे सकते हैं।
  • अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में मजबूत पूंजीगत भंडार दिखाई देता है, जिसमें सितंबर 2025 तक सकल राष्ट्रीय परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात घटकर कई दशकों के निचले स्तर 2.2% पर आ गया है।

In Summary

वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report: FSR) RBI द्वारा प्रकाशित  अर्धवार्षिक रिपोर्ट है। यह जून और दिसंबर में प्रकाशित की जाती है। इस रिपोर्ट में वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC) की उप-समिति से प्राप्त सुझाव शामिल होते हैं। 

  • यह रिपोर्ट भारतीय वित्तीय प्रणाली की स्थिरता को प्रभावित करने वाले वर्तमान और नए खतरों का आकलन करती है। 

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • राजकोषीय स्थिति
    • संप्रभु ऋण (Sovereign debt) सहन-सीमा के अधीन है;
    • S&P द्वारा भारत की रेटिंग को बढ़ाकर ‘BBB’ कर दिया गया है, 
    • आर्थिक संवृद्धि दर, सरकार द्वारा लिए गए ऋण पर ब्याज दर से अधिक है, तथा 
    • विदेशी मुद्रा में कम देनदारियां हैं।   
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर आशान्वित: AI की संभावनाओं से बाजारों में उत्साह है, किंतु यह आशावाद अंतर्निहित कमजोरियों और वैश्विक प्रभावों के खतरों को छिपा सकता है।  
  • वित्तीय-प्रौद्योगिकियों (फिनटेक) से जुड़े जोखिम: फिनटेक क्षेत्रक में ऋण वृद्धि 36.1% रही। हालांकि, RBI ने उन कर्जदारों को लेकर चिंता जताई है, जिन्होंने पांच या अधिक कर्जदाताओं से बिना कुछ जमानत रखे यानी असुरक्षित ऋण लिया है। 
  • स्टेबलकॉइन्स: रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि विदेशी मुद्रा में स्टेबलकॉइन्स का व्यापक उपयोग भारत की मौद्रिक संप्रभुता को कमजोर कर सकता है और मौद्रिक नीति के प्रभाव को सीमित कर सकता है। साथ ही, यह धन-शोधन (Money Laundering) को बढ़ावा दे सकता है।  
  • भारतीय मुद्रा का प्रदर्शन: भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मूल्यह्रास देखा गया। इसके मुख्य कारण हैं; व्यापारिक मदों (Terms of Trade – TOT) में गिरावट, अमेरिका जैसे देशों में व्यापार साझेदारों की तुलना में ऊँचे शुल्क (टैरिफ) का भुगतान करना और देश में पूंजी निवेश कम होना।  
    • व्यापारिक मदें (Terms of Trade) एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक हैं, जो किसी देश के निर्यात मूल्यों और आयात मूल्यों के अनुपात को दर्शाती हैं।
  • बैंकिंग क्षेत्रक की स्थिति: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCBs) मजबूत पूंजी बफर बनाए हुए हैं। विशेष रूप से, सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (GNPA) अनुपात सितंबर 2025 तक घटकर 2.2% पर आ गया। यह पिछले कई दशकों का न्यूनतम स्तर है। 

वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC) के बारे में

  • परिचय: 2010 में स्थापित FSDC केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष गैर-सांविधिक (Non-statutory) परिषद है। इसका उद्देश्य वित्तीय स्थिरता प्रणाली को मजबूत करना है।
  • संरचना: इसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। इसके सदस्यों में शामिल हैं;  RBI के गवर्नर; SEBI, IRDAI, PFRDA, IBBI के अध्यक्ष; संबंधित सरकारी सचिव तथा मुख्य आर्थिक सलाहकार।
  • कार्य: संपूर्ण वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बनाए रखने में समन्वय करना, विनियामक संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, वित्तीय क्षेत्रक का विकास करना, वित्तीय समावेशन और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना।
  • FSDC उप-समिति: इसकी अध्यक्षता RBI गवर्नर करते हैं। यह FSR को सुझाव देती है और व्यवस्था से जुड़े जोखिमों पर चर्चा करती है।
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गैर-सांविधिक (Non-statutory)

किसी कानून द्वारा स्थापित या शासित नहीं। FSDC एक गैर-सांविधिक परिषद है, जिसका अर्थ है कि यह संसद के एक अधिनियम द्वारा नहीं बनाई गई है, बल्कि कार्यकारी कार्रवाई द्वारा स्थापित की गई है।

सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (GNPA)

बैंकों के सकल ऋण का वह हिस्सा जो एक निश्चित अवधि से अधिक समय से गैर-निष्पादित (यानी, ब्याज या मूलधन का भुगतान नहीं किया जा रहा है) है। GNPA अनुपात में कमी बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCBs)

भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची में सूचीबद्ध बैंक। ये बैंक मजबूत पूंजी बफर बनाए हुए हैं और उनके सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (GNPA) अनुपात में कमी आई है।

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