वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report: FSR) RBI द्वारा प्रकाशित अर्धवार्षिक रिपोर्ट है। यह जून और दिसंबर में प्रकाशित की जाती है। इस रिपोर्ट में वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC) की उप-समिति से प्राप्त सुझाव शामिल होते हैं।
- यह रिपोर्ट भारतीय वित्तीय प्रणाली की स्थिरता को प्रभावित करने वाले वर्तमान और नए खतरों का आकलन करती है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- राजकोषीय स्थिति:
- संप्रभु ऋण (Sovereign debt) सहन-सीमा के अधीन है;
- S&P द्वारा भारत की रेटिंग को बढ़ाकर ‘BBB’ कर दिया गया है,
- आर्थिक संवृद्धि दर, सरकार द्वारा लिए गए ऋण पर ब्याज दर से अधिक है, तथा
- विदेशी मुद्रा में कम देनदारियां हैं।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर आशान्वित: AI की संभावनाओं से बाजारों में उत्साह है, किंतु यह आशावाद अंतर्निहित कमजोरियों और वैश्विक प्रभावों के खतरों को छिपा सकता है।
- वित्तीय-प्रौद्योगिकियों (फिनटेक) से जुड़े जोखिम: फिनटेक क्षेत्रक में ऋण वृद्धि 36.1% रही। हालांकि, RBI ने उन कर्जदारों को लेकर चिंता जताई है, जिन्होंने पांच या अधिक कर्जदाताओं से बिना कुछ जमानत रखे यानी असुरक्षित ऋण लिया है।
- स्टेबलकॉइन्स: रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि विदेशी मुद्रा में स्टेबलकॉइन्स का व्यापक उपयोग भारत की मौद्रिक संप्रभुता को कमजोर कर सकता है और मौद्रिक नीति के प्रभाव को सीमित कर सकता है। साथ ही, यह धन-शोधन (Money Laundering) को बढ़ावा दे सकता है।
- भारतीय मुद्रा का प्रदर्शन: भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मूल्यह्रास देखा गया। इसके मुख्य कारण हैं; व्यापारिक मदों (Terms of Trade – TOT) में गिरावट, अमेरिका जैसे देशों में व्यापार साझेदारों की तुलना में ऊँचे शुल्क (टैरिफ) का भुगतान करना और देश में पूंजी निवेश कम होना।
- व्यापारिक मदें (Terms of Trade) एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक हैं, जो किसी देश के निर्यात मूल्यों और आयात मूल्यों के अनुपात को दर्शाती हैं।
- बैंकिंग क्षेत्रक की स्थिति: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCBs) मजबूत पूंजी बफर बनाए हुए हैं। विशेष रूप से, सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (GNPA) अनुपात सितंबर 2025 तक घटकर 2.2% पर आ गया। यह पिछले कई दशकों का न्यूनतम स्तर है।
वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC) के बारे में
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