जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025 लोक सभा में पेश किया गया | Current Affairs | Vision IAS
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यह पहल सरकार के "मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस" के संकल्प को दर्शाता है, क्योंकि इसमें 10 मंत्रालयों/ विभागों के 16 केंद्रीय कानूनों में 355 संशोधनों का प्रस्ताव किया गया है।

  • उद्देश्य: कानूनों के अनुपालन को सरल बनाकर, कानूनों को उपडेट करके और विश्वास-आधारित शासन व्यवस्था को बढ़वा देते हुए ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (EoDB) और ईज़ ऑफ लिविंग संबंधी सुधारों को आगे बढ़ाना। 
  • पृष्ठभूमि: यह विधेयक जन विश्वास अधिनियम, 2023 पर आधारित है। इसके तहत 42 केंद्रीय अधिनियमों के 183 प्रावधानों के तहत वर्णित कृत्यों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया था।

इस विधेयक के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर:

  • कृत्यों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना: यह 288 प्रावधानों के तहत वर्णित कृत्यों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है तथा मामूली गलती के लिए जेल की सजा के स्थान पर जुर्माने या चेतावनी का प्रावधान करता है।
    • वर्तमान विधेयक के तहत निम्नलिखित चार अधिनियमों के कुछ प्रावधानों में वर्णित कृत्यों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव किया गया है-
      • चाय अधिनियम, 1953, विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940.
        • ये अधिनियम पहले से ही जन विश्वास अधिनियम, 2023 में शामिल थे।
  • दंड का युक्तिकरण: दंड अपराध के अनुपात में होगा तथा बार-बार अपराध करने पर दंड में क्रमिक वृद्धि की जाएगी।
  • पहली बार उल्लंघन पर: 10 अधिनियमों के अंतर्गत उल्लेखित 76 अपराधों के मामले में पहली बार अपराध करने पर परामर्श या चेतावनी दी जाएगी।
  • ईज़ ऑफ लिविंग सुधार: इसके लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद अधिनियम, 1994 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में संशोधन हेतु विविध प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।
  • सरल निपटान प्रक्रिया: नामित अधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से दंड आरोपित करने का अधिकार दिया गया है, जिससे न्यायपालिका पर बोझ कम हो जाएगा।
  • जुर्माने में स्वतः वृद्धि: हर 3 साल में दंड और जुर्माना 10% बढ़ जाएंगे, ताकि नया कानून बनाने की जरूरत न पड़े।
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