शुभांशु शुक्ला द्वारा अंतरिक्ष में किए गए प्रयोग भारत को “विश्वबन्धु” (संपूर्ण मानवता का साथी) के रूप में प्रस्तुत करते हैं | Current Affairs | Vision IAS
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भारत का अंतरिक्ष आधारित प्रयोग संबंधी विज़न 'विश्वबन्धु' के रूप में भारत को मानवता के सामूहिक कल्याण में योगदान देने वाले एक वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करता है।

भारत को ‘विश्वबंधु ' बनाने में अंतरिक्ष क्षेत्रक की भूमिका

  • वैश्विक सहयोग: NISAR मिशन को "विश्व के साथ भारत का वैज्ञानिक सहयोग" कहा जाता है। यह डॉकिंग और इंटरऑपरेबिलिटी के लिए वैश्विक मानकों का पालन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
  • ओपन डेटा एक्सेस: सभी के लिए डेटा उपलब्ध होने से वैश्विक अनुसंधान को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, यह विशेष रूप से विकासशील देशों को सहायता प्रदान करता है।
  • वैश्विक चुनौतियों से निपटना: यह आपदा प्रबंधन, कृषि, जलवायु और संबंधित खतरे की निगरानी में सहायता करता है।
  • ग्लोबल कॉमन्स: यह भारत को साझा वैज्ञानिक संसाधनों के ज्ञान संबंधी योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
  • कूटनीतिक लाभ: यह तकनीक साझाकरण, क्षमता निर्माण और संधारणीय विकास में भारत की भूमिका को बढ़ाता है (जैसे नाविक/ NAVIC)।
  • कम लागत पर तकनीकी कौशल: इसरो के कम लागत वाले नवाचार जटिल दीर्घकालिक अंतरिक्ष प्रणालियों को डिजाइन करने और संचालित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।

भारत की अंतरिक्ष क्षेत्रक से संबंधित प्रमुख पहलें

  • नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार/NISAR) मिशन: यह आपदा प्रबंधन, जलवायु संबंधी निगरानी, ग्लेशियर की ट्रैकिंग और कृषि क्षेत्रक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला भू-प्रेक्षण मिशन है।
  • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना है।
  • मानवयुक्त चंद्र मिशन: इसके तहत 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है।
  • गगनयान कार्यक्रम: इसका उद्देश्य पृथ्वी की निचली कक्षा (निम्न भू-कक्षा) में मानव चालक दल को भेजना है। इसके लिए क्रू एस्केप सिस्टम और व्योममित्र ह्यूमनॉइड मिशन की एक महत्वपूर्ण परीक्षण उड़ान की योजना बनाई गई है।
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