प्रस्तावित भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2025 का शिक्षाविदों के साथ-साथ छात्रों ने भी सख्त विरोध किया।
भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) के बारे में
- स्थापना: 1931 में।
- संस्थापक: प्रशांत चंद्र महालनोबिस, जो भारत के महानतम सांख्यिकीविदों में से एक थे।
- पंजीकरण: सोसाइटीज़ पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत अप्रैल 1932 में। बाद में 1961 के पश्चिम बंगाल सोसाइटीज़ पंजीकरण अधिनियम के तहत पुनः पंजीकृत किया गया था।
- राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा: इसे संसद के 1959 के एक अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान का दर्जा प्राप्त हुआ था।
- मुख्यालय: कोलकाता।
- उद्देश्य:
- सांख्यिकी विज्ञान और इसके अंतर्विषयक अनुप्रयोगों को आगे बढ़ाना।
- गणित, कंप्यूटर विज्ञान, अर्थशास्त्र और सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान को बढ़ावा देना।
- योगदान:
- इसने राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) के विकास में योगदान दिया;
- भारत की आधिकारिक सांख्यिकीय प्रणाली, नियोजन और आर्थिक मॉडलिंग की नींव रखी आदि।
यह रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व बैंक समूह ने संयुक्त रूप से जारी की है। इस रिपोर्ट में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की दिशा में प्रगति का विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- सेवा कवरेज सूचकांक (SCI) द्वारा मापन की गई स्वास्थ्य सेवा कवरेज, 2000 और 2023 के बीच 54 से 71 अंकों तक बढ़ी है।
- आउट ऑफ़ पॉकेट व्यय के कारण वित्तीय कठिनाई का सामना करने वाले लोगों का हिस्सा 2000 और 2022 के बीच 34% से घटकर 26% हो गया है।
- आउट ऑफ़ पॉकेट व्यय का अर्थ स्वास्थ्य देखभाल पर स्वयं से खर्च करना होता है। बड़ी बिमारियों के मामले में यह कई बार बहुत अधिक हो जाता है और निर्धन भी बना देता है।
- हालांकि, 4.6 बिलियन लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं नहीं मिल रही है। 2.1 बिलियन लोग वित्तीय कठिनाई का सामना कर रहे हैं। इनमें से 1.6 बिलियन लोग निर्धन होने की कगार पर आ गए हैं या और अधिक निर्धन हो गए हैं।
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि भारत की वर्तमान उपग्रह-आधारित निगरानी प्रणालियां अपनी सीमित अवलोकन विंडो के कारण वास्तविक दहन का केवल एक अंश ही दर्ज कर पा रही हैं।
- यह निगरानी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के नेतृत्व में कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (CREAMS) के तहत की जा रही है। यह मुख्य रूप से MODIS और VIIRS ध्रुवीय-परिक्रमा उपग्रहों पर निर्भर करती है।
- MODIS: मॉडरेट रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोरेडियोमीटर।
- VIIRS: विज़िबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सुइट।
- ये दोनों उपग्रह-आधारित सेंसर्स हैं, जो सक्रिय आगजनी, वनस्पति और पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी करते हैं।
- ये उपग्रह पृथ्वी के ध्रुवों की परिक्रमा करते हैं और भारत का दिन के केवल निश्चित समय पर (सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे) तक अवलोकन करते हैं।
बायोस्टिमुलेंट्स संधारणीय भारतीय कृषि के लिए एक हरित समाधान प्रदान करते हैं।
बायोस्टिमुलेंट के बारे में
- बायोस्टिमुलेंट एक ऐसा पदार्थ, सूक्ष्मजीव या मिश्रण है, जो पोषक तत्वों की मात्रा से स्वतंत्र होकर पौधों की प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देकर उनके विकास में मदद करता है।
- कार्य:
- यह पौधों द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण और उपयोग की क्षमता में सुधार करता है;
- पौधों की सूखा या गर्मी जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता बढ़ाता है;
- फसल की गुणवत्ता में सुधार करता है और
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के खिलाफ अनुकूलता का समर्थन करता है।
- विनियमन: उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO), 1985 के तहत विनियमित।
- महत्त्व:
- बेहतर पोषक तत्व-उपयोग दक्षता बढ़ाता है;
- मृदा कार्बन पृथक्करण में योगदान करता है;
- उच्च जलवायु अनुकूलनशीलता प्रदान करता है;
- मृदा की सूक्ष्मजीव विविधता का समर्थन करता है;
- एक चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था में योगदान देता है आदि।
उत्तरी जापान के निकट एक शक्तिशाली 7.5 तीव्रता के भूकंप ने सुनामी को सक्रिय किया।
सुनामी के बारे में
- अर्थ: सुनामी एक विनाशकारी समुद्री लहर है, जो आमतौर पर जल के भीतर भूकंप, जल के भीतर या तटीय भूस्खलन, या ज्वालामुखी विस्फोट के कारण उत्पन्न होती है।
- घटना: प्रशांत प्रविष्ठन क्षेत्र (Subduction zone) विश्व के 90% भूकंप/ सुनामी उत्पन्न करते हैं। इन क्षेत्रों को “रिंग ऑफ फायर या अग्नि वलय” कहा जाता है।
भारत के प्रस्तावित CAFÉ III मानदंडों को वैश्विक एजेंसियों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
CAFÉ मानदंडों के बारे में
- अधिसूचित: इन्हें ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत 2017 में अधिसूचित किया गया था।
- चरण: पहला चरण: 2017-18 में तथा दूसरा चरण: 2022-23 में लागू किया गया था।
- उद्देश्य: CO₂ उत्सर्जन को कम करके ईंधन की खपत को कम करना। इससे तेल पर निर्भरता और वायु प्रदूषण को कम किया जा सकेगा।
- लागू: पेट्रोल, डीजल, द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG), सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक यात्री वाहन जिनका सकल वाहन भार (GVW) <3500 किलोग्राम है।
Article Sources
1 sourceऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने लगभग 50 मिलियन प्रकाश-वर्ष लंबे एक ब्रह्मांडीय तंतु की खोज की है। शोधकर्ताओं ने कम-से-कम 14 आकाशगंगाओं के माध्यम से इस तंतु का अवलोकन किया है।
ब्रह्मांडीय तंतु के बारे में
- ब्रह्मांडीय या आकाशगंगा तंतु ब्रह्मांड के खगोलीय जाल (Cosmic Web) में सबसे बड़ी रेशेनुमा संरचना हैं।
- एकल ब्रह्मांडीय तंतु एक ऐसी संरचना है, जो करोड़ों प्रकाश-वर्ष तक फैली हुई होती है। यह संरचना गुरुत्वाकर्षण के कारण गैस, डार्क मैटर और आकाशगंगाओं के लंबी व पतली धागेनुमा श्रृंखला में जुड़ने के परिणामस्वरूप बनती है। इस प्रकार, यह आकाशगंगाओं के विशाल समूहों को जोड़ती है।
- ये तंतु बड़े व खाली अंतरिक्ष क्षेत्रों को भी घेरते हैं, जिन्हें रिक्तियां (Voids) कहा जाता है।
- ब्रह्मांड विज्ञान में महत्व
- खगोलविदों को आकाशगंगा निर्माण और वितरण का अध्ययन करने में मदद करते हैं।
- सघन क्षेत्रों में पदार्थ को भेजने वाले मार्गों के रूप में कार्य करते हैं। इससे आकाशगंगाओं के समूहों का विकास प्रभावित होता है।
Article Sources
1 sourceएक प्रतिरक्षा और कैंसर कोशिका-लक्ष्यीकरण एंटीबॉडी थेरेपी ने मल्टीपल मायलोमा के अवशिष्ट निशानों को हटाने की क्षमता प्रदर्शित की।
मायलोमा के बारे में
- अर्थ: यह अस्थि मज्जा में प्लाज्मा कोशिकाओं का कैंसर है।
- प्लाज्मा कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने वाली श्वेत रक्त कोशिकाएं होती हैं।
- लक्षण: रीढ़/ छाती/ कूल्हों की हड्डियों में दर्द, थकावट, संक्रमण, मतली, कब्ज, वजन घटना, बार-बार पेशाब आना, भ्रम होना आदि।