कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में नाबालिगों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा रहा है | Current Affairs | Vision IAS

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  • कर्नाटक और आंध्र प्रदेश राज्य डिजिटल लत पर आर्थिक सर्वेक्षण की सिफारिशों के अनुरूप नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहे हैं।
  • चुनौतियों में आईटी अधिनियम, 2000 के तहत केंद्र सरकार का अधिकार क्षेत्र, प्रवर्तन संबंधी कठिनाइयाँ और बच्चों के अधिकारों और डिजिटल साक्षरता को लेकर चिंताएँ शामिल हैं।
  • ऑस्ट्रेलिया और स्पेन ने भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं, जिनमें नाबालिग उपयोगकर्ताओं के लिए आयु सत्यापन या प्रतिबंध अनिवार्य किया गया है।

In Summary

कर्नाटक सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए और आंध्र प्रदेश सरकार 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है।

  • ध्यातव्य है कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में डिजिटल व्यसन (digital addiction) को युवाओं के लिए एक प्रमुख खतरे के रूप में चिन्हित किया गया है। 
    • इसके साथ ही यह सुझाव दिया गया कि उम्र के आधार पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के उपयोग पर सीमाएँ लगाई जाए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्तर पर उपयोगकर्ताओं की उम्र के सत्यापन की व्यवस्था की जाए।

सोशल मीडिया पर आयु-आधारित प्रतिबंधों का महत्व

  • बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा: डिजिटल व्यसन, साइबर बुलिंग और हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट के संपर्क में आने के बारे में चिंताएँ बढ़ रही हैं।
  • अत्यधिक स्क्रीन टाइम: स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के अनियंत्रित उपयोग से बच्चों के संज्ञानात्मक (cognitive) और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना: पूरक पहलों के माध्यम से स्कूली बच्चों में पढ़ने की आदत डाली जा सकती है और ऑफलाइन गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जा सकता है।

प्रतिबंध को लागू करने में मुख्य चुनौतियां

  • अधिकार क्षेत्र को लेकर बाधाएं: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत इंटरनेट का विनियमन विशेष रूप से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस तरह सोशल मीडिया पर राज्य सरकारों द्वारा प्रतिबंध लगाने से संवैधानिक और विधिक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
  • प्रवर्तन: आयु-सत्यापन हेतु सटीक उपकरण नहीं होने और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों द्वारा नियमों का सख्ती से अनुपालन नहीं किए जाने से उपयोगकर्ताओं की आयु का सत्यापन और निगरानी करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
  • अधिकारों के उल्लंघन को लेकर चिंताएं और विरोध: आलोचकों का तर्क है कि सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध ‘बच्चों के सूचना, अभिव्यक्ति और भागीदारी के अधिकारों का उल्लंघन’ करता है। ये आलोचक दंडात्मक कार्रवाइयों की बजाय डिजिटल साक्षरता बढ़ाने का समर्थन करते हैं।
  • उद्योग-जगत की चिंताएं: प्रतिबंध के कारण नाबालिग कम विनियमित या असुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करना शुरू कर सकते हैं।

 बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले अन्य देश

  • ऑस्ट्रेलिया वर्ष 2025 के अंत में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए देशव्यापी सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने वाला विश्व का पहला देश बना। 
  • स्पेन ने 16 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर आयु सत्यापन अनिवार्य कर दिया है।
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डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy)

Digital literacy is the ability to use information and communication technologies to access, manage, understand, integrate, communicate, evaluate, and create information safely and appropriately. For UPSC aspirants, it is crucial for understanding online content and navigating digital environments responsibly.

साइबर बुलिंग (Cyberbullying)

Cyberbullying is the use of electronic communication to bully a person, typically by sending messages of an intimidating or threatening nature. It is a significant social issue with legal implications that UPSC aspirants should be aware of.

आयु सत्यापन (Age Verification)

ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर उपयोगकर्ताओं की आयु की पुष्टि करने की प्रक्रिया, विशेष रूप से बच्चों को आयु-प्रतिबंधित सामग्री या सेवाओं से बचाने के लिए। यह डिजिटल लत को रोकने के उपायों का एक हिस्सा हो सकता है।

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