नववर्ष की पूर्व संध्या पर गिग वर्कर्स ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • भारत में गिग और प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले श्रमिकों की संख्या, जो कि 10 मिलियन है, शहरी खपत और लचीले कार्य मॉडलों के कारण 2029-30 तक 23.5 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
  • चुनौतियों में आय की अस्थिरता, आक्रामक वितरण समयसीमा से उत्पन्न व्यावसायिक खतरे, बीमा और पेंशन की कमी के कारण सामाजिक असुरक्षा और एल्गोरिथम प्रबंधन संबंधी समस्याएं शामिल हैं।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 का उद्देश्य कम से कम 90 दिनों के लिए कार्यरत श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों सहित एक सुरक्षा जाल प्रदान करना है, साथ ही पीएमएसबीवाई जैसी योजनाओं और राज्य-स्तरीय हस्तक्षेपों को भी शामिल करना है।

In Summary

नववर्ष की पूर्व संध्या पर स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स के डिलीवरी कर्मियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। उनकी प्रमुख मांग ‘10-मिनट में वस्तुओं की डिलीवरी प्रणाली’ पर प्रतिबंध लगाने की थी। 

भारत में गिग-अर्थव्यवस्था के बारे में 

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुसार गिग कर्मकार (वर्कर) वह व्यक्ति है जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के बाहर किसी कार्य-मॉडल में कार्य करता है और उससे आय अर्जित करता है।
  • इनकी मुख्य रूप से दो श्रेणियां हैं:
    • प्लेटफॉर्म-से संबद्ध गिग कर्मकार: इनका कार्य ऑनलाइन सॉफ्टवेयर ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म से संबद्ध होता है। उदाहरण के लिए: जोमैटो के डिलीवरी वर्कर
    • गैर-प्लेटफॉर्म-आधारित: पारंपरिक क्षेत्रों में अंशकालिक या पूर्णकालिक रूप से कार्य करने वाले अनियत (कैजुअल) मजदूरी वाले कर्मकार। उदाहरण के लिए: घरेलू नौकर।
  • संख्या: भारत में लगभग 1 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म कर्मकार हैं। इनकी संख्या 2029-30 तक बढ़कर लगभग 2.35 करोड़ हो जाने का अनुमान है।
  • संख्या में वृद्धि के कारक:
    • मांग-पक्ष वाले कारक: शहरी उपभोग में वृद्धि, क्विक-कॉमर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का प्रसार, आदि।
    • आपूर्ति-पक्ष वाले कारक: लचीले कार्य मॉडल, अपेक्षाकृत आकर्षक पारिश्रमिक। 

गिग-अर्थव्यवस्था से संबद्ध चुनौतियां

  • आय में अस्थिरता: प्रति-ऑर्डर भुगतान में कमी और कम मूल पारिश्रमिक (बेस पे) के कारण आय अनिश्चित बनी रहती है।
  • व्यवसाय से संबद्ध जोखिम: कम समय में वस्तुओं की डिलीवरी की गारंटी (जैसे 10-मिनट डिलीवरी) से सड़क दुर्घटना होने और तनाव में वृद्धि का खतरा बढ़ जाता है।
  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिलना: इन्हें सुनिश्चित स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है।
  • कवरेज में कमी:  सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए पात्र होने हेतु, गिग और प्लेटफार्म कर्मियों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक किसी एग्रीगेटर के साथ जुड़े होने की अनिवार्यता का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव की अत्यधिक प्रतिबंधात्मक होने के कारण आलोचना की जा रही है। 
  • एल्गोरिदम-आधारित प्रबंधन: ऑर्डर के आवंटन और किसी कर्मी को प्लेटफार्म से हटाने की प्रक्रियाएं अपारदर्शी हैं। इनके पास सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति भी कम है। 

गिग वर्कर्स के कल्याण हेतु उठाए गए कदम

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 एक औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढांचा प्रदान करती है।
    • पात्रता मानदंड (90-दिवसीय नियम): जो गिग कर्मी वर्ष में कम से कम 90 दिन (या विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर कुल 120 दिन) कार्य करते हैं, वे ई-श्रम पोर्टल और आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य व दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाने के लिए पात्र हैं।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): इस योजना के तहत सभी पात्र पंजीकृत असंगठित कामगारों (गिग कर्मी सहित) को 2 लाख रुपये तक की वार्षिक दुर्घटना बीमा-सुरक्षा प्रदान की गई है।
  • राज्य सरकारों द्वारा विधिक उपाय: राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग कर्मकार (रजिस्ट्रीकरण और कल्याण) अधिनियम-2023, आदि।
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राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग कर्मकार (पंजीकरण और कल्याण) अधिनियम-2023

यह राजस्थान सरकार द्वारा पारित एक कानून है जिसका उद्देश्य प्लेटफॉर्म आधारित गिग कर्मकारों के पंजीकरण, कल्याण और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)

यह भारत सरकार द्वारा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों सहित सभी पात्र व्यक्तियों को वार्षिक प्रीमियम पर दुर्घटना बीमा कवर प्रदान करने वाली एक योजना है।

ई-श्रम पोर्टल (e-Shram Portal)

यह भारत सरकार द्वारा असंगठित श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए लॉन्च किया गया एक वेब पोर्टल है, जिससे उन्हें विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सके।

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