ओलंपिक पदक विजेता अभिनव बिंद्रा की अध्यक्षता में गठित एक टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट भारत के खेल शासन को एक पेशेवर, जवाबदेह और एथलीट-केंद्रित तंत्र में बदलने के लिए एक रोडमैप प्रदान करती है।
रिपोर्ट द्वारा उजागर की गई खेल प्रशासन की प्रणालीगत कमियां:
- पेशेवर विशेषज्ञता का अभाव: पदों को अक्सर सामान्य सिविल सेवकों या संविदात्मक कर्मचारियों द्वारा भरा जाता है। इनके पास क्षेत्रक-विशिष्ट विशेषज्ञता नहीं होती, जिससे तदर्थ (ad-hoc) निर्णय लेने की स्थिति उत्पन्न होती है।
- खंडित प्रशिक्षण: प्रशासकों के लिए मौजूदा प्रशिक्षण अपर्याप्त और अप्रासंगिक है। साथ ही, यह निरंतर पेशेवर विकास पर भी ध्यान केंद्रित नहीं करता है।
- खिलाड़ी से प्रशासक बनने में बाधाएं: खिलाड़ियों को खेल प्रतिस्पर्धा से प्रभावी शासनात्मक भूमिकाओं में स्थानांतरित करने में मदद करने के लिए संरचित "दोहरे करियर पथ" की कमी है।
- अस्पष्ट कार्यक्षेत्र: राष्ट्रीय खेल महासंघों में अक्सर 'गवर्नेंस बोर्ड' और 'संचालन' के बीच भूमिकाओं का स्पष्ट विभाजन नहीं होता है। इससे सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण होता है तथा पारदर्शिता में कमी आती है।
प्रस्तावित बहु-स्तरीय ढांचा
- सिविल सेवा एकीकरण: राष्ट्र-निर्माण में खेलों के महत्त्व के प्रति भविष्य के नौकरशाहों को संवेदनशील बनाने के लिए LBSNAA में IAS अधिकारियों के प्रशिक्षण में खेल शासन मॉड्यूल्स को एकीकृत करना चाहिए।
- प्रदर्शन की निगरानी: एक 'राष्ट्रीय प्रदर्शन प्रबंधन और निगरानी प्रणाली' प्रशासकों के मुख्य प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) को उनकी पदोन्नति एवं पोस्टिंग से जोड़ेगी।
- शीर्ष प्राधिकरण: खेल प्रशासन प्रशिक्षण को विनियमित करने, प्रत्यायन देने व प्रमाणित करने के लिए राष्ट्रीय खेल शिक्षा और क्षमता निर्माण परिषद (NCSECB) की स्थापना करनी चाहिए।
- परिचालन तंत्र: NCSECB की परिचालन शाखा के रूप में एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण और विकास प्रकोष्ठ निर्मित करना चाहिए। यह प्रकोष्ठ पाठ्यक्रम वितरण, समन्वय एवं परिणामों की निगरानी के लिए जिम्मेदार होगा।
- रिपोर्ट ने भविष्य के खेल नेताओं को प्रशिक्षित करने के लिए भारत-विशिष्ट पाठ्यक्रम विकसित करने की सिफारिश की है।
भारत में खेल शासन में सुधार के लिए उठाए गए कदम
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