भू-अर्थशास्त्र (Geo-Economics): अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया मोर्चा | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

In Summary

  • भू-राजनीति भू-अर्थशास्त्र की ओर अग्रसर हो रही है, जिसमें भू-राजनीतिक लाभ के लिए व्यापार और प्रतिबंध जैसे आर्थिक साधनों का उपयोग किया जा रहा है।
  • भारत को खनिज अन्वेषण, अनुसंधान एवं विकास व्यय और नीतिगत कमियों से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो इसकी भू-आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं।
  • भारत को भू-आर्थिक बदलावों से निपटने के लिए साझेदारी स्थापित करनी होगी, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना होगा और आईएमईसी जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं का विकास करना होगा।

In Summary

पारंपरिक भू-राजनीति की सीमाएं अब भू-अर्थशास्त्र के प्रभाव से पुनः परिभाषित हो रही हैं। इस वजह से भारत को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

  • भू-राजनीति (Geopolitics): यह भौगोलिक स्थिति और अवस्थिति तथा सैन्य शक्ति जैसे पारंपरिक कारकों के माध्यम से शक्ति का निर्धारण है।
  • भू-अर्थशास्त्र (Geo-economics): यह राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा और उन्हें मजबूत करने तथा लाभकारी भू-राजनीतिक परिणाम प्राप्त करने के लिए आर्थिक साधनों (व्यापार, प्रतिबंध आदि) का उपयोग है। 

भू-अर्थशास्त्र किस प्रकार भू-राजनीति को आकार दे रहा है?

  • ऊर्जा एवं संसाधन कूटनीति का उपयोग: उदाहरण के लिए- संयुक्त राज्य अमेरिका ने सेमीकंडक्टर, AI और अति-महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु हाल ही में “पैक्स सिलिका” पहल शुरू की। इस नौ-सदस्यीय समूह से भारत को बाहर रखा गया है। 
  • ‘परस्पर निर्भरता’ का हथियार के रूप में उपयोग करना: उदाहरण के लिए-संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंधों का उपयोग। जैसे कि रूसी बैंकों को स्विफ्ट (SWIFT) प्रणाली से बाहर कर दिया गया है।
  • सामरिक उपकरण के रूप में व्यापार नीति का उपयोग: उदाहरण के लिए- संयुक्त राज्य अमेरिका–चीन व्यापार युद्ध। इसमें सेमीकंडक्टर जैसी प्रौद्योगिकियों पर प्रभुत्व  स्थापित करना प्रमुख कारक है।
  • भू-आर्थिक स्तर पर विश्व का विखंडन: उदाहरण के लिए: यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के तहत उत्सर्जन कटौती का बोझ ग्लोबल साउथ के देशों पर डाल दिया गया है। 

भू-अर्थशास्त्र के क्षेत्र में भारत की प्रमुख चुनौतियां

  • खनिज संसाधन एवं प्रौद्योगिकी की कमी: ऑस्ट्रेलिया के समान भूवैज्ञानिक संभावनाओं के बावजूद, भारत ने अपने निक्षेपित खनिज संसाधनों का केवल 25–30% ही अन्वेषण किया है। इस कारण लिथियम जैसे अति-महत्वपूर्ण खनिजों के लिए भारत 100% आयात पर निर्भर है। 
  • अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर कम व्यय और प्रौद्योगिकी-अनुकूल परिवेश का अभाव: भारत अपनी GDP का केवल 0.6–0.7% ही R&D पर व्यय करता है। यह चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका (2.5–3%) जैसे देशों की तुलना में काफी कम है। 
  • नीति एवं शासन के स्तर पर कमियां: जैसे कि नौकरशाही संबंधी लालफीताशाही के कारण खनिज अन्वेषण में निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश को प्रोत्साहन नहीं मिल पाता है।

भारत के लिए आगे की राह

  • अधिक भू-आर्थिक साझेदारियां विकसित करना: जैसे कि जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पहल (SCRI) और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हिंद-प्रशांत आर्थिक फ्रेमवर्क' (IPEF) पहल शुरू की गई हैं। 
    • इसी तरह, भारत के नेतृत्व में वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (Global Biofuels Alliance: GBA) आरंभ किया गया ताकि OPEC जैसे पारंपरिक जीवाश्म-ईंधन उत्पादक समूहों का भू-आर्थिक विकल्प तैयार किया जा सके।
  • नवाचार एवं R&D को प्रोत्साहन देना: उदाहरण के लिए: अनुसंधान विकास और नवाचार (RDI) योजना शुरू की गई है।
  • अति-महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं संपर्क को बढ़ावा देना: भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के विकास में तेजी लाने की जरुरत है। इससे भारत के व्यापार मार्गों और ऊर्जा हितों को सुरक्षित करने वाला एक भू-आर्थिक सेतु स्थापित किया जा सकेगा।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC)

भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी अवसंरचना और परिवहन परियोजना, जिसका उद्देश्य व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग को बढ़ाना है।

OPEC

ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (Organization of the Petroleum Exporting Countries)। यह पेट्रोलियम उत्पादक देशों का एक कार्टेल है जो तेल की कीमतों को प्रभावित करने की कोशिश करता है।

वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (Global Biofuels Alliance: GBA)

जैव ईंधन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात में तेजी लाने के उद्देश्य से भारत के नेतृत्व में शुरू किया गया एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन, जिसका लक्ष्य पारंपरिक जीवाश्म-ईंधन पर निर्भरता कम करना है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet