इंदौर (मध्य प्रदेश) में पेयजल के संदूषित होने से स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो गया | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

In Summary

  • भारत में लगभग 72,368 मिलियन लीटर अपशिष्ट जल उत्पन्न होता है, जिसमें से 72% का उपचार नहीं किया जाता है, जिससे हैजा और टाइफाइड जैसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
  • चुनौतियों में पृथक संस्थान, पुरातन अवसंरचना, वित्तीय बाधाएं और यूडब्ल्यूएम के लिए कुशल प्रौद्योगिकियों का अभाव शामिल हैं।
  • समाधानों में विकेन्द्रीकृत उपचार, शून्य तरल निर्वहन जनादेश, एकीकृत निगरानी और सतत भूमिगत जल प्रबंधन के लिए प्रकृति-आधारित समाधान शामिल हैं।

In Summary

पेयजल में सीवेज अपशिष्ट जल का मिलना भारत में शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन (UWM) से जुड़ी चिंताओं और इससे होने वाले संभावित स्वास्थ्य संकट को उजागर करता है।

भारत में शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन (UWM) की स्थिति

  • वर्तमान स्थिति: नीति आयोग के अनुसार, वर्ष 2020-21 के लिए शहरी क्षेत्रों में अनुमानित अपशिष्ट जल सृजन लगभग 72,368 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) था। 
    • इस अपशिष्ट जल का 72% हिस्सा बिना उपचारित किए ही नदियों, झीलों या भूजल में छोड़ दिया जाता है।
  • संभावित स्वास्थ्य प्रभाव: हैजा, डायरिया, पेचिश, हेपेटाइटिस A, टाइफाइड, पोलियो आदि।
  • उपचार प्रणालियां
    • ऑन-साइट प्रणाली: इसमें अपशिष्ट जल को शौचालय के पास ही एक गड्ढे या टैंक में रोका जाता है, और समय-समय पर संचित हुई मल-गाद को हटाया जाता है।
    • ऑफ-साइट प्रणाली: इसमें सीवरेज नेटवर्क के माध्यम से अपशिष्ट जल को 'सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट' (STP) तक पहुंचाया जाता है।

भारत में शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन के समक्ष चुनौतियां

  • संस्थागत चुनौती: सरकारी विभाग बिना किसी समन्वय के कार्य करते हैं। इससे प्रयासों में दोहराव होता है। इसके अतिरिक्त, अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में क्षमता की भी कमी है।
  • पुराना अवसंरचना: समय पर रखरखाव और सुधार की कमी, और नए उपचार संयंत्र लगाने के लिए जमीन की सीमित उपलब्धता।
  • आर्थिक चुनौती: 'गैर-राजस्व जल' (यानी जल की बर्बादी/ चोरी), अवास्तविक शुल्क, कम वसूली दर और लागत की अपर्याप्त भरपाई के कारण अधिकांश शहरी जल सेवा प्रदाता वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
  • तकनीकी चुनौती: नवीन किफायती और कुशल तकनीकों का अभाव, तथा सीवेज बहाव प्रणालियों की कनेक्टिविटी की मैपिंग की कमी।

सतत UWM के लिए समाधान

  • विकेंद्रीकृत उपचार प्रणालियां: पारिस्थितिक दृष्टिकोण से, अपशिष्ट जल का उपचार उसके स्रोत के जितना संभव हो सके उतना निकट करना फायदेमंद होता है।
  • शहरी और औद्योगिक अपशिष्ट जल सुधार: शून्य तरल विसर्जन यानी जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) को अनिवार्य बनाना चाहिए; लैंडफिल को विनियमित करना चाहिए और अवैध रूप से अपशिष्ट जल प्रवाह पर दंड आरोपित करना चाहिए।
  • निगरानी का आधुनिकीकरण: शुरुआती पहचान के लिए जल गुणवत्ता डेटा को स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) जैसी स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियों के साथ एकीकृत करना चाहिए।
  • प्रकृति आधारित समाधान: इसमें निर्मित आर्द्रभूमियां, हरित छतें, प्राणवान भित्तियां (लिविंग वॉल्स), अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब, वर्मीफिल्ट्रेशन आदि शामिल हैं।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

निर्मित आर्द्रभूमियां

ये मानव निर्मित जलीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो अपशिष्ट जल के प्राकृतिक उपचार के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के पौधे और मिट्टी का उपयोग करके सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा दिया जाता है जो प्रदूषकों को अवशोषित करते हैं।

जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD)

यह एक जल प्रबंधन रणनीति है जिसका लक्ष्य औद्योगिक प्रक्रियाओं से किसी भी तरल अपशिष्ट को पर्यावरण में छोड़े जाने से रोकना है। इसमें अपशिष्ट जल को पुनर्चक्रित (recycled) और पुन: उपयोग (reused) किया जाता है, जिससे शुद्ध जल की हानि न्यूनतम होती है।

गैर-राजस्व जल

जल आपूर्ति प्रणालियों में, यह वह जल है जिसका उत्पादन तो किया जाता है लेकिन जिसका बिल उपभोक्ताओं से वसूला नहीं जाता। इसके कारणों में जल की चोरी, रिसाव, मीटरिंग में त्रुटियाँ और प्रशासनिक हानियाँ शामिल हो सकती हैं।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet