पेयजल में सीवेज अपशिष्ट जल का मिलना भारत में शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन (UWM) से जुड़ी चिंताओं और इससे होने वाले संभावित स्वास्थ्य संकट को उजागर करता है।
भारत में शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन (UWM) की स्थिति
- वर्तमान स्थिति: नीति आयोग के अनुसार, वर्ष 2020-21 के लिए शहरी क्षेत्रों में अनुमानित अपशिष्ट जल सृजन लगभग 72,368 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) था।
- इस अपशिष्ट जल का 72% हिस्सा बिना उपचारित किए ही नदियों, झीलों या भूजल में छोड़ दिया जाता है।
- संभावित स्वास्थ्य प्रभाव: हैजा, डायरिया, पेचिश, हेपेटाइटिस A, टाइफाइड, पोलियो आदि।
- उपचार प्रणालियां
- ऑन-साइट प्रणाली: इसमें अपशिष्ट जल को शौचालय के पास ही एक गड्ढे या टैंक में रोका जाता है, और समय-समय पर संचित हुई मल-गाद को हटाया जाता है।
- ऑफ-साइट प्रणाली: इसमें सीवरेज नेटवर्क के माध्यम से अपशिष्ट जल को 'सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट' (STP) तक पहुंचाया जाता है।
भारत में शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन के समक्ष चुनौतियां
- संस्थागत चुनौती: सरकारी विभाग बिना किसी समन्वय के कार्य करते हैं। इससे प्रयासों में दोहराव होता है। इसके अतिरिक्त, अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में क्षमता की भी कमी है।
- पुराना अवसंरचना: समय पर रखरखाव और सुधार की कमी, और नए उपचार संयंत्र लगाने के लिए जमीन की सीमित उपलब्धता।
- आर्थिक चुनौती: 'गैर-राजस्व जल' (यानी जल की बर्बादी/ चोरी), अवास्तविक शुल्क, कम वसूली दर और लागत की अपर्याप्त भरपाई के कारण अधिकांश शहरी जल सेवा प्रदाता वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
- तकनीकी चुनौती: नवीन किफायती और कुशल तकनीकों का अभाव, तथा सीवेज बहाव प्रणालियों की कनेक्टिविटी की मैपिंग की कमी।
सतत UWM के लिए समाधान
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