ये पायलट उप-योजनाएं ‘निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission)’ के निर्यात प्रोत्साहन घटक का हिस्सा हैं।
नई उप-योजनाओं के बारे में
- प्री- और पोस्ट-शिपमेंट निर्यात ऋण पर ब्याज सहायता:
- भारतीय रुपये में लिए गए निर्यात ऋण पर 2.75% (आधार दर) की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
- अधिसूचित कम-प्रतिनिधित्व वाले या उभरते बाजारों में निर्यात के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन।
- वार्षिक सीमा: प्रत्येक निर्यातक वित्त वर्ष 2025–26 के लिए 50 लाख रुपये की अधिकतम सहायता ले सकता है।
- पात्रता: हार्मोनाइज़्ड सिस्टम (HS) 6-अंकीय स्तर पर अधिसूचित सकारात्मक सूची के अंतर्गत आने वाली टैरिफ लाइनें तक सीमित। यह सूची भारत की लगभग 75% टैरिफ लाइनों (मदों) को शामिल करती है।
- निर्यात ऋण के लिए संपार्श्विक (कोलेटरल) सहायता:
- यह योजना सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) के साथ साझेदारी में लागू की जाएगी।
- गारंटी कवरेज:
- सूक्ष्म और लघु निर्यातकों के लिए 85% तक।
- मध्यम श्रेणी के निर्यातकों के लिए 65% तक।
- अधिकतम सीमा: प्रति वित्तीय वर्ष प्रति निर्यातक 10 करोड़ रुपये तक की बकाया गारंटीकृत ऋण राशि।
- पात्रता: प्रथम (ऊपर उल्लिखित) उप-योजना की शर्तों के अनुसार।
निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) के बारे में
- शुरुआत: नवंबर 2025 में, 6 वर्षों के लिए (वित्त वर्ष 2025–26 से 2030–31 तक)।
- वित्तीय परिव्यय: 25,060 करोड़ रुपये।
- उद्देश्य: विशेष रूप से MSME, श्रम-प्रधान क्षेत्रकों (जैसे वस्त्र क्षेत्रक) आदि को कम ब्याज दर पर व्यापार हेतु ऋण उपलब्ध कराना।
- मिशन की संरचना: दो अलग-अलग, किंतु परस्पर एकीकृत घटक:
- निर्यात प्रोत्साहन (वित्तीय सहायता): ब्याज सब्सिडी, संपार्श्विक (कोलेटरल) गारंटी, और ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड जैसे साधनों के माध्यम से।
- निर्यात दिशा (गैर-वित्तीय सहायता): इसके तहत निर्यात गुणवत्ता सुनिश्चित करने, नियमों का अनुपालन करने, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और लॉजिस्टिक्स के लिए सहायता दी जाएगी।
निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) का महत्व
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