
एक हालिया अध्ययन के अनुसार, फोटो-टूरिज्म (फोटोग्राफी पर्यटन) में वृद्धि के कारण पश्चिमी घाट से सात 'गैलेक्सी फ्रॉग' लुप्त हो गए हैं।
गैलेक्सी फ्रॉग (मेंढक) के बारे में
- प्रजाति: यह अपने वंश (मेलानोबैट्राकस इंडिकस/ Melanobatrachus indicus) की एकमात्र ज्ञात प्रजाति है। पर्यावास: दक्षिण-पश्चिमी घाट के पश्चिमी घाट की स्थानिक (Endemic) प्रजाति है।
- यह मुख्य रूप से उच्च ऊंचाई वाले सदाबहार वनों और शोला वनों में पाया जाता है।
- विशेषताएं:
- यह एक दुर्लभ मेंढक है, जिसका शरीर पतला, लंबा और एक समान चौड़ाई वाला होता है।
- यह स्थलीय प्रजाति है और उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वनों के पत्तों के अपशिष्ट, चट्टानों और अन्य जमीनी आवरणों पर पाई जाती है।
- IUCN स्थिति: वल्नरेबल।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 'पहुंच और लाभ साझाकरण' के तहत आंध्र प्रदेश के लाल चंदन के किसानों को ₹45 लाख वितरित किए।
लाल चंदन (रेड सैंडर्स) के बारे में
- यह एक भारतीय स्थानिक वृक्ष प्रजाति है। इसका भौगोलिक दायरा पूर्वी घाट, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश के वनों तक सीमित है।
- IUCN स्थिति: एंडेंजर्ड।
पहुंच और लाभ साझाकरण (ABS) के बारे में
- यह जैव विविधता अभिसमय (1992) और नागोया प्रोटोकॉल (2010) के तहत आनुवंशिक संसाधनों एवं पारंपरिक ज्ञान से होने वाले लाभों के उचित बंटवारे का एक फ्रेमवर्क है।
- भारत में: इसे जैव विविधता अधिनियम, 2002 और 2025 के पहुंच और लाभ साझाकरण (ABS) विनियमों द्वारा शासित किया जाता है।
भारत और पाकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया। यह 'परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं पर हमलों के निषेध पर समझौते' के तहत किया गया है। इस समझौते को “भारत-पाकिस्तान अनाक्रमण समझौता” भी कहा जाता है।
भारत-पाकिस्तान अनाक्रमण समझौते के बारे में
- हस्ताक्षर: इस समझौते पर 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षर किए गए थे और यह 27 जनवरी 1991 को लागू हुआ था।
- इसके तहत दोनों देशों को प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की अवस्थिति के बारे में जानकारी साझा करनी होती है।
- उद्देश्य: दोनों पक्षों को एक-दूसरे देश में किसी भी परमाणु प्रतिष्ठान या सुविधा को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नष्ट करने या नुकसान पहुंचाने से रोकना।
- महत्व: इसे भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु जोखिम को कम करने के लिए एक प्रमुख उपाय माना जाता है।
भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 'अंतर्राष्ट्रीय दवा निगरानी कार्यक्रम' (WHO-PIDM) के तहत फार्माकोविजिलेंस डेटाबेस में अपने योगदान में बहुत बेहतर सुधार किया है। भारत 2014 के 123वें स्थान से ऊपर उठकर 2025 में 8वें स्थान पर पहुंच गया है।
- रैंकिंग में इस सुधार का मुख्य श्रेय भारतीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (PvPI) को दिया गया है।
भारतीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (PvPI) के बारे में:
- शुरुआत: इसे 2010 में शुरू किया गया था।
- यह भारत सरकार का एक प्रमुख दवा सुरक्षा निगरानी कार्यक्रम है।
- यह दवाओं से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों का विश्लेषण करता है। साथ ही, उचित विनियामक कार्रवाई करने के लिए CDSCO (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) को सिफारिशें भेजता है।
WHO के 'अंतर्राष्ट्रीय दवा निगरानी कार्यक्रम' (WHO-PIDM) के बारे में:
- स्थापना: 1968 में की गई थी।
- उद्देश्य: दवाओं और टीकों की सुरक्षा को वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल सेवा के केंद्र में रखना।
- VigiBase (विजीबेस): यह दवाओं और टीकों के प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्ट का WHO वैश्विक डेटाबेस है।
Article Sources
1 sourceबोर्ड ऑफ ट्रेड (BoT) के अनुसार 50% के भारी अमेरिकी टैरिफ के कारण निर्यात में कमी आई है।
- परिचय: यह विदेश व्यापार नीति से संबंधित नीतिगत उपायों पर शीर्ष सलाहकार निकाय है। इसका उद्देश्य भारत के व्यापार तंत्र को मजबूत करना है।
- अध्यक्ष: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री।
- सदस्य: इसमें राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के व्यापार एवं वाणिज्य के प्रभारी मंत्री, निर्यात संवर्धन परिषदें, उद्योग संघ आदि शामिल हैं।
- पुनर्गठन: इसे 2019 में 'व्यापार विकास और संवर्धन परिषद' का BoT के साथ विलय करके पुनर्गठित किया गया था।
शोधकर्ताओं ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में घर के अंदर और बाहर दोनों वातावरणों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी 'स्टैफिलोकोक्सी' के उच्च स्तर पाए हैं।
स्टैफिलोकोकस के बारे में
- प्रकृति: ये ग्राम-पॉजिटिव कोक्सी (गोलाकार बैक्टीरिया) हैं, जो समूहों में पाए जाते हैं।
- इसे पहली बार वॉन रेकलिंगहौसेन (Von Recklinghausen) ने मनुष्यों में देखा था।
- ये पेनिसिलिन के प्रति सहनशीलता तथा एरिथ्रोमाइसिन, टेट्रासाइक्लिन और एमिनोग्लीकोसाइड्स जैसी चिकित्सकीय रूप से उपयोगी एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध दर्शाते हैं।
- प्रकार: स्टैफिलोकोकस ऑरियस और स्टैफिलोकोकस एपिडर्मिडिस।
सरकार ने बैटरी पैक आधार प्रणाली के लिए मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए।
बैटरी पैक आधार प्रणाली के बारे में:
- यह एक स्वदेशी डिजिटल पहचान और डेटा भंडारण प्रणाली है।
- इसे बैटरी की संपूर्ण उपयोग अवधि के दौरान शुरू से अंत तक ट्रेसेब्लिटी सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है।
- इसमें प्रत्येक बैटरी पैक के लिए एक विशिष्ट पहचान संख्या शामिल है। यह संख्या खनिजों के निष्कर्षण से लेकर अंतिम निपटान तक की महत्वपूर्ण जानकारी को रिकॉर्ड व स्टोर करती है।
- बैटरी की वे श्रेणियां, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के रूप में 'बैटरी पैक आधार' बनाए रखना अनिवार्य है, उनमें शामिल हैं:
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरियां; तथा
- औद्योगिक बैटरियां (जिनकी क्षमता 2kWh से अधिक हो)।
- महत्व: पुरानी बैटरियों का किसी अन्य उद्देश्य के लिए पुन: उपयोग सक्षम होगा; सरकारी विनियमों का पालन सुनिश्चित होगा; बैटरियों का कुशलतापूर्वक पुनर्चक्रण किया जा सकेगा आदि।
प्रधानमंत्री ने PRAGATI (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) प्लेटफॉर्म की 50वीं बैठक की अध्यक्षता की।
- यह प्रणाली मेगा परियोजनाओं और प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाई है।
PRAGATI के बारे में
- स्थापना: इसे 2015 में स्थापित किया गया था।
- अवलोकन: यह एक त्रि-स्तरीय प्रणाली है। ये तीन स्तर हैं- प्रधान मंत्री कार्यालय (PMO), केंद्र सरकार के सचिव और राज्यों के मुख्य सचिव।
- इसके उद्देश्य:
- परियोजना कार्यान्वयन में तेजी लाना (विभिन्न सरकारी एजेंसियों के मध्य समन्वय सुनिश्चित करना);
- परियोजना की निगरानी करना (प्रौद्योगिकी आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से);
- प्रभावी शिकायत निवारण सुनिश्चित करना (CPGRAMS/ विकेंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली के जरिये)।