भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक है। यह वैश्विक मत्स्य उत्पादन में 8% का योगदान देता है। इससे लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों को आजीविका प्राप्त होती है।
- मत्स्य उत्पादन वित्त वर्ष 2013-14 के 95.79 लाख टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया। इसने कृषि सकल मूल्य वर्धित (GVA) में 7.43% का योगदान दिया है, जो कृषि और संबद्ध क्षेत्रकों में सर्वाधिक है।
- औसत जलीय कृषि (Aquaculture) उत्पादकता बढ़कर 4.77 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है।
- भारत ने वर्ष 2023-24 के दौरान 16.98 लाख टन सीफ़ूड का निर्यात किया था।
मत्स्य क्षेत्रक के विकास के लिए प्रमुख पहलें
- प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): यह "नीली क्रांति" को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख योजना है। यह अवसंरचना की कमियों को दूर करने पर केंद्रित है। इसके तहत जाल (Cages), बायोफ्लॉक इकाइयां, री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और ब्रूड बैंकों को मंजूरी दी गई है।
- प्रधान मंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMMKSSY): इससे PMMSY के तहत 2024 में 4 वर्षों के लिए शुरू किया गया था। यह एक केंद्रीय क्षेत्रक की उप-योजना है। यह वित्तीय और तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से इस क्षेत्रक की आंतरिक कमजोरियों को दूर करने पर केंद्रित है।
- मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF): इसकी स्थापना 2018-19 में समुद्री व अंतर्देशीय दोनों क्षेत्रों में मात्स्यिकी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के लिए की गई थी।
- एकीकृत एक्वापार्क: 682.60 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत के साथ 11 एकीकृत एक्वापार्क के विकास को मंजूरी दी गई है।
- उपग्रह तकनीक का एकीकरण: इसमें 'पोत संचार और सहायता प्रणाली’ तथा ओशनसैट का उपयोग शामिल है।
भावी विकास के समक्ष चुनौतियां
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