जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि 2025 में दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किए हैं और 2026 में राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष मना रहे हैं।
मुख्य परिणाम

- रक्षा और सुरक्षा: दोनों देशों ने आशय के एक संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए।इसका उद्देश्य रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप विकसित करना है। इसमें रक्षा प्लेटफॉर्म्स की प्रौद्योगिकी साझेदारी, सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर दिया गया है।
- जर्मनी ने भारत के प्रमुख नौसैनिक अभ्यास MILAN, हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) और वायु सेना अभ्यास तरंग शक्ति में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की।
- विदेश नीति और सुरक्षा के लिए 'ट्रैक 1.5 संवाद' तंत्र स्थापित किया गया।
- ट्रैक 1.5 कूटनीति तब होती है, जब सरकारी प्रतिनिधि और गैर-सरकारी विशेषज्ञ कम औपचारिक तरीकों से संवाद में शामिल होते हैं।
- व्यापार और अर्थव्यवस्था: आपूर्ति श्रृंखला की लोचशीलता सुनिश्चित करने के लिए, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज आदि पर केंद्रित समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
- वीज़ा और आवागमन: जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-मुक्त पारगमन सुविधा की घोषणा की।
- अन्य:
- एक नए द्विपक्षीय हिंद-प्रशांत परामर्श तंत्र की घोषणा की गई।
- शिक्षा और कौशल विकास: उच्चतर शिक्षा पर भारत-जर्मन व्यापक रोडमैप को अपनाया गया।
भारत-जर्मनी संबंधों के अन्य महत्वपूर्ण पहलू
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