ग्रे-ज़ोन युद्ध रणनीति के उपयोग में वृद्धि हो रही है | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • ग्रे-ज़ोन युद्ध शांति और युद्ध के बीच संचालित होता है, जिसमें सशस्त्र संघर्ष की सीमा से नीचे साइबर ऑपरेशन और प्रॉक्सी हिंसा जैसी रणनीति का उपयोग किया जाता है।
  • प्रमुख विशेषताओं में क्रमिक वृद्धि, कमजोरियों का दोहन और विश्वसनीय अस्वीकार्यता शामिल हैं, जिससे विरोधी की प्रतिक्रिया कठिन हो जाती है।
  • भारत को चीन और पाकिस्तान से ग्रे-ज़ोन खतरों का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए एकीकृत साइबर रक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की नियमित रेड-टीमिंग की आवश्यकता है।

In Summary

संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ की गई कार्रवाइयां ग्रे-ज़ोन युद्ध रणनीति के उपयोग को दर्शाती हैं।

ग्रे-ज़ोन युद्ध रणनीति के बारे में

  • यह प्रत्यक्ष शांति (या सहयोग) और युद्ध (या सशस्त्र संघर्ष) के बीच एक अस्पष्ट स्थिति होती है।
    • इसका उद्देश्य किसी विरोधी को इस तरह से नुकसान पहुंचाना है कि उसे कोई खतरा महसूस ही न हो या उसे यह एहसास न हो कि उस पर हमला हो रहा है।
  • इस्तेमाल की जाने वाली रणनीतियां:
    • साइबर ऑपरेशन: पावर ग्रिड, दूरसंचार नेटवर्क आदि को बाधित करने के लिए मैलवेयर का उपयोग करना;
    • छापेमारी और विशेष अभियान;
    • छद्म हिंसा; तथा 
    • सलामी स्लाइसिंग: यह चीन की रणनीति है। इसमें विरोधी देश के क्षेत्र को टुकड़ों में जीतने के लिए छोटी सैन्य कार्रवाइयां की जाती हैं।
  • मुख्य विशेषताएं
    • युद्ध की सीमा से नीचे के क्रियाकलाप: हमलावर देश गैर-सैन्य उपकरणों का उपयोग करता है, जिनके खिलाफ सैन्य प्रतिक्रिया को उचित नहीं ठहराया जाता है।
    • क्रमिक और लंबे समय तक चलने वाला तनाव: कार्रवाइयाँ धीरे-धीरे व कभी-कभी वर्षों या दशकों तक चलती हैं। इससे निर्णायक जवाबी प्रतिक्रिया के अवसर कम हो जाते हैं।
    • लक्षित कमजोरियों का लाभ उठाना: ये कार्रवाइयां लक्षित देश की राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी या सामाजिक सुभेद्यताओं के अनुसार तैयार की जाती हैं।
    • उत्तरदायित्व/ जवाबदेही का अभाव: हमलावर अपनी संलिप्तता को स्वीकार करने से बचता है, जिससे जवाबदेही तय करना कठिन हो जाता है।

भारत को चीन और पाकिस्तान से निरंतर ग्रे-ज़ोन युद्ध खतरों का सामना करना पड़ता है। भारत इससे निपटने के लिए निम्नलिखित कदम उठा सकता है:

  • सैन्य योजना में साइबर रक्षा को एकीकृत करना; महत्वपूर्ण अवसंरचना की नियमित रेड-टीमिंग करना आदि।
    • रेड-टीमिंग साइबर सुरक्षा प्रभावशीलता के परीक्षण की एक विधि है। 
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रेड-टीमिंग (Red-Teaming)

यह साइबर सुरक्षा प्रभावशीलता का परीक्षण करने की एक विधि है, जिसमें एक संगठन के सिस्टम की सुरक्षा का मूल्यांकन करने के लिए एक बाहरी या आंतरिक टीम (रेड टीम) द्वारा वास्तविक हमलों का अनुकरण किया जाता है।

गैर-सैन्य उपकरण (Non-military Tools)

ग्रे-ज़ोन युद्ध में इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे साधन हैं जिनके खिलाफ सीधे सैन्य प्रतिक्रिया को उचित नहीं ठहराया जा सकता, जैसे कि दुष्प्रचार, आर्थिक दबाव, या साइबर हमले।

सलामी स्लाइसिंग (Salami Slicing)

यह चीन द्वारा अपनाई जाने वाली एक रणनीति है जिसमें किसी विरोधी देश के क्षेत्र को धीरे-धीरे, छोटे-छोटे सैन्य कार्रवाइयों के माध्यम से जीतना शामिल है।

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