केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होने वाली अगली पांच वर्षों की अवधि में कोयले और लिग्नाइट की खोज के लिए ₹5,925 करोड़ आवंटित किए हैं।
- साथ ही, सरकार कोयला आधारित ऊर्जा के प्रदूषणकारी प्रभाव को कम करने के लिए भी सक्रिय कदम उठा रही है।
भारत में कोयला क्षेत्रक की स्थिति
- कोयला भंडार: भारत विश्व का 5वां सबसे बड़ा कोयला भंडार वाला देश है। अप्रैल 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल अनुमानित कोयला संसाधन लगभग 401 बिलियन टन है।
- कोयला उत्पादन: यह वित्त वर्ष 2013-14 के 565.77 मिलियन टन (MT) से दोगुना होकर वित्त वर्ष 2024-25 में 1047.523 मिलियन टन हो गया है।
- भविष्य का दृष्टिकोण: कोयले की मांग 2030 तक बढ़कर लगभग 1.5 बिलियन टन होने का अनुमान है।
भारत के लिए कोयला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
- ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत: कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र अभी भी 72% विद्युत की आपूर्ति करते हैं। प्रदूषण संबंधी चुनौतियों के बावजूद, यह 24x7 एक विश्वसनीय 'बेस-लोड' सुनिश्चित करता है।
- महत्वपूर्ण उद्योगों को समर्थन: कोयला इस्पात, सीमेंट और भारी उद्योगों को ऊर्जा प्रदान करता है, जो आर्थिक संवृद्धि को गति देते हैं।
- उदाहरण के लिए- यह राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत 2030 तक 300 मिलियन टन कच्चे इस्पात के उत्पादन के लक्ष्य के लिए केंद्रीय भूमिका निभाता है।
- ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू कोयला उत्पादन आयात को कम करता है। इससे 2024-25 में लगभग $8 बिलियन की बचत हुई है।
- आर्थिक विकास: कोयला क्षेत्रक का विस्तार रोजगार सृजित करता है और बड़े निवेश को आकर्षित करता है।
कोयले के प्रदूषणकारी प्रभाव को कम करने के लिए उठाए गए कदम
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