राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (NCVET) | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary


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हाल ही में, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) के सामान्य निकाय (जनरल बॉडी) की पहली बैठक आयोजित की गई।  

NCVET के बारे में

  • स्थापना: इसकी स्थापना 2018 में केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत की गई थी।
  • इसमें 'राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी' (NSDA) और 'राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद' (NCVT) का विलय कर दिया गया। 
    • इससे व्यावसायिक शिक्षा की अलग-अलग विनियामक प्रणालियों का एकीकरण हुआ।
  • यह कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय विनियामक संस्था है। यह संस्था व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के विकास, गुणात्मक सुधार और विनियमन के लिए उत्तरदायी है।
  • प्रमुख कार्य:
    • यह प्रमाणन प्रदान करने वाली संस्थाओंकौशल मूल्यांकन एजेंसियों और कौशल से संबद्ध सूचना प्रदाताओं को मान्यता प्रदान करती है और इनके कामकाज की निगरानी करती है।  

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने “प्राकृतिक संसाधनों के अनुसंधान एवं अनुप्रयोग द्वारा रूपांतरण, अनुकूलन और लचीलापन निर्माण हेतु राष्ट्रीय संस्थान (NIRANTAR)” की बैठक की अध्यक्षता की।

NIRANTAR के बारे में

  • यह केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ाने के लिए एक प्लेटफॉर्म है। 
    • इसके लिए किसी नए संस्थान की स्थापना या अतिरिक्त मानवबल की आवश्यकता का प्रावधान नहीं है।
  • उद्देश्य: मंत्रालय के तहत कार्यरत संस्थानों को तेजी से बदलती स्थानीय एवं वैश्विक चुनौतियों के प्रति अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाना। 

हाल ही में, PNGRB और जर्मनी की DVGW संस्था ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत भारत में हाइड्रोजन से जुड़े विनियमों एवं मानकों पर सहयोग हेतु एक फ्रेमवर्क स्थापित किया जाएगा।

PNGRB के बारे में

  • स्थापना: यह एक सांविधिक संस्था (Statutory body) है। इसकी स्थापना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 के तहत की गई थी।
  • मंत्रालय: यह केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत कार्य करता है। 
  • मुख्य कार्य:
    • प्राकृतिक गैस क्षेत्रक में निष्पक्ष व्यापार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना तथा प्रतिस्पर्धी बाजार सुनिश्चित करना।
    • पेट्रोलियम उत्पादों एवं प्राकृतिक गैस के शोधन, परिवहन और वितरण का विनियमन करना। 
      • इसके कार्य-क्षेत्र में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन का विनियमन शामिल नहीं है। , 
    • पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से संबंधित मुद्दों पर विभिन्न संस्थाओं के बीच उत्पन्न विवादों का निपटारा करना।
  • इसके निर्णयों के विरुद्ध अपील ‘विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal for Electricity)’ के समक्ष की जा सकती है।
    • विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत की गई है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने 2026–27 के लिए एक भारतीय राजनयिक को अपने ‘निरस्त्रीकरण मामलों पर सलाहकार बोर्ड (Advisory Board on Disarmament Matters)’ के अध्यक्ष के रूप में नामित किया।

निरस्त्रीकरण मामलों पर सलाहकार बोर्ड के बारे में

  • स्थापना: वर्ष 1978 में।
  • सचिवालय: न्यूयॉर्क।
  • कार्य:
    • हथियारों के उत्पादन, उपयोग इत्यादि की सीमा निर्धारित करना और निरस्त्रीकरण से संबंधित विषयों पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव को सलाह देना।
    • संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण अनुसंधान संस्थान (UNIDIR) के ट्रस्टी बोर्ड के रूप में कार्य करना।
  • सदस्य: महासचिव द्वारा विश्व के सभी क्षेत्रों से निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विषय में ज्ञान एवं अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को सदस्य के रूप में चुना जाता है।
    • बोर्ड के कुल 15 सदस्य हैं। 

संयुक्त राज्य अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत ने कहा कि भारत को पैक्स सिलिका पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा।

पैक्स सिलिका के बारे में

  • यह संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई एक पहल है। इसका उद्देश्य सुरक्षित, मजबूत और नवाचार-आधारित प्रौद्योगिकी प्रणाली का निर्माण करना है।
  • यह पहल संपूर्ण प्रौद्योगिकी की आपूर्ति श्रृंखला को शामिल करती है। इनमें निम्नलिखित घटक शामिल हैं:
    • सेमीकंडक्टर और AI अवसंरचना;
    • अति महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और ऊर्जा संसाधन;
    • उन्नत विनिर्माण और उच्च-स्तरीय हार्डवेयर;
    • कंप्यूटिंग तथा डेटा लॉजिस्टिक्स। 
  • उद्देश्य:
    • वर्चस्व वाले देश पर निर्भरता को कम करना।
    • संवेदनशील प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा करना और विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना का निर्माण।
  • वर्तमान सदस्य देश: जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम, इजरायल, आदि।

हाल ही में, ऑस्ट्रेलिया समूह ने अपनी 40वीं वर्षगांठ मनाई।

ऑस्ट्रेलिया समूह के बारे में

  • स्थापना: इसकी स्थापना 1985 में ईरान–इराक युद्ध के दौरान रासायनिक हथियारों के उपयोग की पृष्ठभूमि में की गई थी।
  • यह एक अनौपचारिक व्यवस्था है। इसमें भागीदार देशों पर कानूनी रूप से कोई बाध्यकारी दायित्व नहीं होते।
  • इस समूह का उद्देश्य निर्यातक या ट्रांस-शिपमेंट क्षमता वाले देशों को रासायनिक एवं जैविक हथियारों (CBW) के आगे प्रसार से जुड़े खतरों को कम करने में सक्षम बनाना है।
  • भागीदार/सदस्य: कुल 43 भागीदार (42 देश और यूरोपीय संघ)
    • भारत वर्ष 2018 में इसका सदस्य बना।
  • यह एक प्रमुख बहुपक्षीय निर्यात-नियंत्रण व्यवस्था है। अन्य बहुपक्षीय निर्यात-नियंत्रण व्यवस्थाएं निम्नलिखित हैं:
    • वासेनार अरेंजमेंट, 
    • परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG), और
    • मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR)।

हाल ही में, सरकार ने राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के तहत राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026 को अधिसूचित किया।

  • राष्ट्रीय खेल निकाय में शामिल हैं; राष्ट्रीय ओलंपिक समिति, क्षेत्रीय खेल महासंघ, आदि।

राष्ट्रीय खेल शासन नियम, 2026 के बारे में

  • प्रत्येक निकाय में एक सामान्य निकाय (General Body) तथा एक कार्यकारी समिति होगी।
    • सामान्य निकाय की संरचना: कम-से-कम 4 ‘उत्कृष्ट योग्यता वाले खिलाड़ी’ (SOMs) शामिल होंगे। इनकी न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। इनमें 50% महिलाएं होंगी।
    • कार्यकारी समिति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व: महिलाओं के लिए विशिष्ट पद आरक्षित किए जाएंगे, ताकि कम-से-कम 4 महिला-सदस्य सुनिश्चित हो सकें।
  • राष्ट्रीय खेल निर्वाचन पैनल: यह राष्ट्रीय खेल निकायों में होने वाले चुनावों की निगरानी करेगा। इस पैनल में प्रत्येक समय न्यूनतम 20 सदस्य होने अनिवार्य हैं।
  • सदस्य बनने के लिए पात्र नहीं: न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के पश्चात कारावास की सजा पाए व्यक्ति सदस्य बनने के पात्र नहीं होंगे।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित तीसरी पीढ़ी की मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का एक गतिशील लक्ष्य के खिलाफ सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया।

MPATGM के बारे में

  • यह कंधे से दागी जाने वाली पोर्टेबल मिसाइल प्रणाली है। इसे विशेष रूप से दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। 
  • इसमें निम्नलिखित अत्याधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकियां शामिल हैं:
    • इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर, 
    • ऑल-इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम,
    • अग्नि नियंत्रण प्रणाली।
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कौशल मूल्यांकन एजेंसियां

ये वे एजेंसियां हैं जो व्यक्तियों के कौशल को विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में उनकी दक्षता के अनुसार आंकती हैं। NCVET इन एजेंसियों को मान्यता देती है और उनके मूल्यांकन की गुणवत्ता सुनिश्चित करती है।

प्रमाणन प्रदान करने वाली संस्थाएं

ये ऐसी संस्थाएं हैं जो व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरा करने वाले व्यक्तियों को औपचारिक प्रमाण पत्र प्रदान करती हैं। NCVET इन संस्थाओं को मान्यता प्रदान करती है और उनके कामकाज की निगरानी करती है।

राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (NCVT)

यह एक पूर्व संस्था थी जिसका विलय राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) में कर दिया गया है। NCVT व्यावसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में मानकों को निर्धारित करने और प्रमाणन प्रदान करने के लिए जिम्मेदार थी।

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