भारत के अलग-अलग हिस्सों में फसल-कटाई के पारंपरिक त्योहार मनाए जाते हैं।
- देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाए जाने वाले ये त्योहार ऋतु परिवर्तन, सूर्य के उत्तरी गोलार्ध में यात्रा शुरू होने (उत्तरायण) तथा फसलों की कटाई के प्रतीक होते हैं।
फसल-कटाई के पारंपरिक त्योहार
- मकर संक्रांति (महाराष्ट्र): यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है।
- उत्तरायण (गुजरात और राजस्थान): पतंग उड़ाने के लिए प्रसिद्ध यह त्योहार सूर्य के उदय का प्रतीक है। यह आनंद और उल्लास का दिन माना जाता है।
- पोंगल (तमिलनाडु): यह चार दिनों तक मनाया जाने वाला फसल कटाई का त्योहार है। चार दिनों में थाई पोंगल, मट्टू पोंगल, कानुम पोंगल और भोगी पोंगल मनाए जाते हैं। इस दौरान चावल और दाल से बना व्यंजन ‘पोंगल’ बनाया जाता है।
- लोहड़ी (पंजाब): मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाने वाला यह त्यौहार रबी फसलों की कटाई का प्रतीक है। यह त्योहार अलाव के चारों ओर लोकगीतों, भांगड़ा और गिद्दा के आयोजनों के साथ मनाया जाता है।
- माघ बिहू (असम): यह फसल कटाई के मौसम के अंत का त्योहार है। इसे सामुदायिक भोज, पारंपरिक खेलों और ‘मेजी’ को जलाने के साथ मनाया जाता है।
- कनुमा (तेलंगाना): यह कृषि क्षेत्रक के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का त्योहार है।
Article Sources
1 sourceप्रमुख डिलीवरी एग्रीगेटर्स ने गिग कामगारों के लिए वस्तुओं की 10 मिनट में डिलीवरी की समय-सीमा हटाने पर सहमति जताई है।
- इस कदम का उद्देश्य गिग कामगारों की सुरक्षा, संरक्षा तथा कार्य-दशाओं में सुधार सुनिश्चित करना है।
गिग अर्थव्यवस्था (Gig Economy) के बारे में
- गिग अर्थव्यवस्था की विशेषताओं में अस्थायी, अनुबंध आधारित और फ्रीलांस कार्य शामिल हैं। यह स्थायी नौकरी से संबद्ध नहीं है।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुसार, गिग कर्मकार वह व्यक्ति है जो नियोक्ता–कर्मचारी के पारंपरिक संबंध के बाहर कार्य करता है।
- चुनौतियां: घरेलू जीवन और कार्य में संतुलन की कमी, आय में अस्थिरता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिलना, करियर विकास के कम अवसर, आदि।
- गिग कामगारों के लिए पहलें: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020; मजदूरी संहिता, 2019; ई-श्रम पोर्टल; प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), आदि।
खाद्य कीमतें वर्ष 2014 के बाद पहली बार अपस्फीति (-0.2%) की स्थिति में चली गईं।
अपस्फीति के बारे में
- इसे नकारात्मक मुद्रास्फीति भी कहा जाता है। इसका अर्थ वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य कीमत स्तर में निरंतर गिरावट से है।
- अपस्फीति के प्रमुख कारणों में समग्र मांग में कमी, उत्पादकता में वृद्धि तथा मौद्रिक नीति में परिवर्तन शामिल हैं।
पूर्वी, मध्य और दक्षिण भारत में कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है। इसे ला नीना के कारण वॉकर और हैडली परिसंचरण तंत्रों के मजबूत होने से संबद्ध किया जा सकता है।
वॉकर परिसंचरण तंत्र के बारे में
- प्रकार: यह उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के ऊपर पूर्व–पश्चिम (क्षैतिज) दिशाओं में वायुमंडलीय परिसंचरण तंत्र है।
- संचरण तंत्र: पश्चिमी प्रशांत में गर्म वायु ऊपर उठती है, ऊपरी स्तरों पर पूर्व की ओर जाती है, पूर्वी प्रशांत में नीचे उतरती है और व्यापारिक पवनों के रूप में फिर पश्चिम दिशा की ओर लौटती है।
- प्रभाव: मानसून और शीतकालीन विसंगतियों (असंबद्धता) सहित वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करता है।
हैडली परिसंचरण तंत्र के बारे में
- प्रकार: उत्तर–दक्षिण (देशांतर/मेरिडियन) वायुमंडलीय परिसंचरण।
- संचरण तंत्र: विषुवत वृत्त के निकट गर्म वायु ऊपर उठती है, ऊपरी स्तरों पर ध्रुवों की ओर जाती है, लगभग 30° अक्षांश पर नीचे उतरती है और सतह पर पुनः विषुवत वृत्त की ओर लौटती है।
- प्रभाव: ऊष्मा का पुनर्वितरण करता है तथा व्यापारिक पवनों, मरुस्थलों और उष्णकटिबंधीय वर्षा प्रणाली को दिशा देता है।
फूलों की घाटी (Valley of Flowers) के पास वनाग्नि की घटना दर्ज की गई है।
- फूलों की घाटी यूनेस्को विश्व विरासत स्थल (प्राकृतिक) है।
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के बारे में
- अवस्थिति: उत्तराखंड के चमोली जिले में।
- यह नंदा देवी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के दो कोर क्षेत्रों में से एक है। दूसरा कोर क्षेत्र नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान है।
- नंदा देवी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र यूनेस्को के ‘मैन एंड द बायोस्फियर (MAB) कार्यक्रम’ का हिस्सा है।
- दोनों कोर क्षेत्र समाहित रूप से जांस्कर और महान हिमालय पर्वत श्रेणियों के बीच एक विशिष्ट संक्रमण क्षेत्र (Transition zone) का निर्माण करते हैं।
- वन प्रकार: उप-अल्पाइन वन (मुख्यतः भोजपत्र/बिर्च)।
- वनस्पतियां: रोडोडेंड्रॉन, ब्रह्मकमल, ब्लू पॉपी, कोबरा लिली, सेक्सिफ्रेज, आदि।
- जीव-जंतु: हिम तेंदुआ, एशियाई काला भालू, हिमालयी कस्तूरी मृग, भूरा भालू, ब्लू शीप (भड़ल)।
पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने NPS वात्सल्य योजना, 2025 के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
NPS वात्सल्य योजना, 2025 के बारे में
- नोडल मंत्रालय: केंद्रीय वित्त मंत्रालय।
- विनियामक निकाय: पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA)।
- मुख्य उद्देश्य: बच्चों में कम उम्र से ही बचत की आदत डालना और लंबे समय के लिए अनुशासित निवेश को बढ़ावा देना। इससे बच्चों की वित्तीय सुरक्षा और भविष्य की पेंशन की तैयारी सुनिश्चित हो सके।
- प्रमुख विशेषताएं
- पात्रता: 18 वर्ष से कम आयु के सभी भारतीय नागरिक इस योजना के पात्र हैं। अनिवासी भारतीय (NRI) और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) भी पात्र हैं।
- लाभार्थी: इस योजना के तहत नाबालिग ही एकमात्र लाभार्थी होता है।
- खाता का संचालन: खाता नाबालिग के नाम पर खोला जाता है और माता-पिता या विधिक अभिभावक द्वारा संचालित किया जाता है।
- न्यूनतम अंशदान: न्यूनतम प्रारंभिक और वार्षिक अंशदान ₹250 है। अंशदान की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
Article Sources
1 sourceविश्व बैंक ने जनवरी 2026 के लिए “वैश्विक आर्थिक संभावनाएं (Global Economic Prospects: GEP)” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है।
- यह रिपोर्ट वर्ष में दो बार (जनवरी और जून) प्रकाशित की जाती है। यह वैश्विक आर्थिक संवृद्धि की संभावनाओं का आकलन करती है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- भारत की संवृद्धि दर के अनुमान में संशोधन: वित्त वर्ष 2025–26 के लिए 7.2% की संवृद्धि दर का अनुमान है। जून 2025 की रिपोर्ट में 6.3% संवृद्धि दर का अनुमान लगाया गया था।
- उच्च संवृद्धि दर के कारण: मजबूत घरेलू मांग, निजी उपभोग व्यय का बढ़ना, कराधान में सुधार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक घरेलू आय में वृद्धि।
- वैश्विक व्यापार संवृद्धि: 2025 की 3.4% दर से घटकर 2026 में 2.2% रहने का अनुमान।
- ऋण का उच्चतम स्तर: उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों (EMDEs) में सरकारी ऋण बढ़कर जीडीपी के लगभग 70% हो गया है। यह विगत 55 वर्षों का उच्चतम स्तर है।
हेनले पासपोर्ट सूचकांक 2026 में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है। भारत अब 80वें स्थान पर है, जबकि 2025 में इसकी रैंक 85वीं थी।
हेनले पासपोर्ट सूचकांक के बारे में
- यह विश्व के सभी देशों के पासपोर्ट्स की मूल और आधिकारिक रैंकिंग है। यह रैंकिंग इस आधार पर तय की जाती है कि उनके धारक बिना पूर्व-वीजा के कितने देशों में प्रवेश कर सकते हैं।
- यह सूचकांक अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (IATA) के विशेष आंकड़ों पर आधारित है।
- 2026 के सूचकांक में, सिंगापुर को विश्व का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट माना गया है। पिछले वर्ष भी सिंगापुर प्रथम स्थान पर था।
भारत ने शीत एवं अति-शीत परमाणु भौतिकी के क्षेत्र में प्रभावी और निरंतर वृद्धिशील उपस्थिति दर्ज की है। इस क्षेत्र में विभिन्न संस्थानों में अग्रणी शोध समूह शोध कर रहे हैं।
अति-शीत परमाणुओं के बारे में
- परमाणु हमेशा गतिमान रहते हैं। उनकी यह गति हमें तापमान के रूप में महसूस होती है।
- परमाणुओं को परम शून्य/Absolute zero (-273°C) से मात्र अंश भर अधिक तापमान तक ठंडा करके उनकी गति को इतना धीमा किया जा सकता है कि उनके अद्भुत क्वांटम व्यवहार को प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सके।
- इन नैनो-केल्विन तापमान पर परमाणु बिलियर्ड्स की छोटी गेंदों की तरह व्यवहार नहीं करते, बल्कि तरंगों की तरह व्यवहार करने लगते हैं।
- जब परमाणु अत्यधिक ठंडे हो जाते हैं, तो उनकी डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य बढ़ जाती है और एक-दूसरे के साथ ओवरलैप करने लगती है। यह ओवरलैप पदार्थ की एक अवस्था उत्पन्न करता है, जिसे बोस–आइंस्टीन संघनन (Bose–Einstein Condensate) कहा जाता है। इस अवस्था में अनेक परमाणु मिलकर एक एकीकृत क्वांटम पदार्थ की तरह व्यवहार करते हैं।
- क्वांटम भौतिकी के अनुसार, प्रत्येक कण की एक डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य होती है, जो उसके द्रव्यमान और वेग पर निर्भर करती है।