उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी स्कूल RTE अधिनियम की धारा 12(1)(c) के अनुसार कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए 25% नि:शुल्क सीटें उपलब्ध कराएं।
मुख्य निर्देश
- केंद्र और राज्य सरकारों को धारा 12(1)(c) को लागू करने के लिए RTE अधिनियम की धारा 38 के तहत नियम बनाने व उन्हें अधिसूचित करने का निर्देश दिया गया है।
- नियमों का निर्माण राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR), राज्य आयोगों (SCPCRs) और राष्ट्रीय/ राज्य सलाहकार परिषदों के परामर्श से किया जाना चाहिए।
- NCPCR और SCPCRs (बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत गठित) को RTE अधिनियम के तहत समीक्षा, निगरानी एवं शिकायतों के निवारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के बारे में
- इस अधिनियम का उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 21A द्वारा गारंटीकृत मूल अधिकार को साकार करना है।
- अधिनियम की धारा-3 6-14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बालक को प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक निकटवर्ती स्कूल में नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करती है।
- समुचित सरकार और स्थानीय प्राधिकरणों का कर्तव्य है कि वे निकटवर्ती स्कूलों की स्थापना करें।
- समुचित सरकार और स्थानीय प्राधिकरणों का यह कर्तव्य है कि वे स्कूल, अवसंरचना, शिक्षक तथा शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
- निजी स्कूल राज्य द्वारा प्रति-बालक व्यय की प्रतिपूर्ति के हकदार हैं।
संवैधानिक प्रावधान
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इस निर्णय का महत्त्व
- यह बचपन से ही मौलिक समानता और सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देता है।
- यह 'बंधुत्व' को एक मुख्य संवैधानिक सिद्धांत के रूप में लागू करने योग्य और कार्यात्मक अर्थ प्रदान करता है।
- यह कोठारी आयोग द्वारा परिकल्पित 'समान विद्यालय प्रणाली’ को मजबूत करता है।