2025 की 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण' पर वैश्विक मूल्यांकन रिपोर्ट (GAR 2025) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर वनाग्नि के कारण कुल लगभग 106 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है।
वनाग्नि क्या है?
- खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, वनस्पति में लगने वाली कोई भी अनियोजित और अनियंत्रित आग (चाहे उसका स्रोत कुछ भी हो), जो सामाजिक, आर्थिक या पर्यावरणीय मूल्यों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है और जिसके लिए सरकारी नीति के अनुसार शमनकारी प्रतिक्रिया या अन्य कार्रवाई की आवश्यकता होती है, उसे 'वनाग्नि यानी वाइल्डफायर' कहा जाता है।
- हालांकि, वनाग्नि भूमि पारिस्थितिकी-तंत्र को वायुमंडल से जोड़कर तथा पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण, मृदा के स्वास्थ्य को बनाए रखने और पादप प्रजनन में सहायता करके एक प्राकृतिक पारिस्थितिक भूमिका भी निभाती है।
- वनाग्नि के प्रतिकूल प्रभाव:
- पर्यावरणीय: विशेष रूप से पीट भूमि और वर्षावनों से भारी मात्रा में CO2 उत्सर्जन; जलवायु फीडबैक लूप (प्रतिक्रिया पाश): आगजनी-> तापन-> अधिक आगजनी; जैव विविधता की हानि आदि।
- मानवीय और सामाजिक: श्वसन और हृदय संबंधी विकार; समुदायों का विस्थापन आदि।
वनाग्नि की घटनाओं में वृद्धि क्यों हो रही है?
- जलवायु परिवर्तन: बढ़ते तापमान, सूखे की दीर्घावधि और बिना वर्षा के वज्रपात (Dry lightning) से आगजनी संबंधी मौसम लंबा और अधिक तीव्र हो गया है।
- भूमि-उपयोग में परिवर्तन: वनों की कटाई, एकल फसली कृषि (Monoculture), तथा पीट भूमि से जल निकासी से आगजनी का खतरा और बढ़ जाता है।
- मानवीय गतिविधियां: आग अक्सर अनजाने में लगती है या जानबूझकर कृषि अवशेष जलाने या भूमि की सफाई के दौरान लगाई जाती है, जो चरम मौसम में तेजी से अनियंत्रित हो जाती है तथा वनाग्नि में परिवर्तित हो जाती है।
- ईंधन की उपलब्धता: घास, पत्तियों और झाड़ियों जैसे शुष्क व निरंतर ईंधन की भारी मात्रा आग को तेजी से फैलने में मदद करती है। इससे आगजनी की तीव्रता बढ़ जाती है और इसे बुझाना कठिन हो जाता है।
वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए भारत में की गई पहलें
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