
वीर सुरेन्द्र साय (1809–1884) :
भारत की राष्ट्रपति ने वीर सुरेन्द्र साय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
- वीर सुरेन्द्र साय का जन्म ओडिशा के संबलपुर के पास राजपुर–खिंडा गांव में हुआ था। वे चौहान राजवंश से संबंधित थे।
- वह ओडिशा के प्रमुख आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे।
- प्रमुख योगदान
- 1827 में, मात्र 18 वर्ष की आयु में, उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष शुरू किया।
- उन्होंने बिंझाल, गोंड जैसे आदिवासी समुदायों को साथ लेकर गुरिल्ला युद्ध शैली में आंदोलन चलाया।
- संबलपुर के शासक की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) के तहत 1849 में संबलपुर का विलय कर लिया।
- इस सिद्धांत के तहत सुरेन्द्र साय को वैध उत्तराधिकारी नहीं माना गया।
- 1857 के सिपाही विद्रोह के दौरान वे संबलपुर लौटे और अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष को फिर से तेज किया।
- कई आदिवासी ज़मींदार और गौंटिया (स्थानीय नेता) उनके आंदोलन में शामिल हुए।
- मूल्य: देशभक्ति, साहस, वीरता।