इनमें से एक केंद्र भारत के आंध्र प्रदेश में भी स्थापित किया जाएगा। मुंबई और तेलंगाना के बाद यह भारत में इस तरह का तीसरा केंद्र होगा।
चौथी औद्योगिक क्रांति क्या है?
- इस शब्द का प्रतिपादन 2016 में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के संस्थापक क्लाउस श्वाब ने किया था।
- IR 4.0 उस वर्तमान युग का वर्णन करता है जिसमें डिजिटल, भौतिक और जैविक तकनीकें आपस में मिल रही हैं, जैसे कि:
- AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता); रोबोटिक्स; इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT); क्वांटम कंप्यूटिंग आदि।
- पिछली क्रांतियों के विपरीत IR 4.0 भौतिक, डिजिटल और जैविक प्रणालियों के बीच की सीमाओं को अस्पष्ट कर रही है।
चौथी औद्योगिक क्रांति का महत्त्व

- आर्थिक संवृद्धि: यह स्वचालन, डेटा विश्लेषण और स्मार्ट विनिर्माण के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाती है तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं को लचीला बनाती है।
- समावेशी विकास की क्षमता: यह भारत जैसे विकासशील देशों को पुरानी तकनीकों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने और डिजिटल पहुंच का विस्तार करने का अवसर प्रदान करती है।
- पर्यावरणीय संधारणीयता: यह स्मार्ट ग्रिड, परिशुद्ध कृषि (precision agriculture) और चक्रीय अर्थव्यवस्था के माध्यम से कम कार्बन उत्सर्जक एवं संसाधन-दक्ष विकास का समर्थन करती है।
- उदाहरण के लिए: "लाइटहाउस" कारखानों ने प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स और IoT के माध्यम से CO2 उत्सर्जन एवं जल के उपयोग में महत्वपूर्ण कमी प्रदर्शित की है।
- लाइटहाउस कारखाने वे विनिर्माण केंद्र हैं, जो चौथी औद्योगिक क्रांति (IR 4.0) की तकनीकों को अपनाने में विश्व का नेतृत्व कर रहे हैं।
- उदाहरण के लिए: "लाइटहाउस" कारखानों ने प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स और IoT के माध्यम से CO2 उत्सर्जन एवं जल के उपयोग में महत्वपूर्ण कमी प्रदर्शित की है।
- मानव पूंजी की केंद्रीयता: यह शारीरिक श्रम की बजाय कौशल, नवाचार और आजीवन सीखने पर ध्यान केंद्रित करती है।
चुनौतियां और जोखिम
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