हाल ही में, सरकार ने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म, 'भारतीय कृषि में जलवायु अनुकूलन का मानचित्र' (ACASA-इंडिया) लॉन्च किया। यह किसानों की जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने और बेहतर योजना बनाने में मदद करेगा।
- इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेतृत्व वाली 'राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान और विस्तार प्रणाली' (NARES) ने 'बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया' (BISA) – CIMMYT के सहयोग से विकसित किया है। इसका उद्देश्य जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए स्थान-विशिष्ट और डेटा-आधारित अनुकूलन योजना तैयार करना है।
- ACASA-इंडिया से प्राप्त अंतर्दृष्टि सरकारी एजेंसियों को जलवायु जोखिम न्यूनीकरण और विस्तार के अवसरों के लिए भविष्य की निवेश संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करने में मदद करेगी।
राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि नवाचार (NICRA) के बारे में:
- शुरुआत: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा वर्ष 2011 में।
- उद्देश्य:
- भारतीय कृषि की जलवायु परिवर्तन के प्रति सुभेद्यता को कम करना और लचीलापन/ अनुकूलन (Resilience) बढ़ाना; तथा
- किसानों के खेतों पर जलवायु-अनुकूल तकनीकों का सत्यापन और प्रदर्शन करना।
जलवायु अनुकूल कृषि (CRA) क्या है?
इसका अर्थ कृषि में ऐसी अनुकूलन और शमन प्रथाओं को अपनाना है, जो जलवायु के आघातों (जैसे- सूखा, बाढ़ आदि) को सहन करने तथा उनसे तेजी से उबरने की क्षमता बढ़ाती हैं।

CRA की आवश्यकता क्यों है?
- पैदावार के नुकसान को रोकना: जलवायु परिवर्तन से पैदावार में 4.5% से 9.0% तक की कमी आ सकती है। इससे प्रति वर्ष लगभग 1.5% GDP का नुकसान हो सकता है।
- आजीविका की सुरक्षा: लगभग 57% ग्रामीण परिवार आय के लिए खेती पर निर्भर हैं।
- वर्षा आधारित क्षेत्रों की संवेदनशीलता: भारत का 51% निवल बोया गया क्षेत्र वर्षा पर आधारित है, जो कुल खाद्यान्न का लगभग 40% उत्पादन करता है। यह क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक सुभेद्य है।
- खाद्य सुरक्षा: भारत कुपोषण, बच्चों में कम वजन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी जैसी बढ़ती समस्याओं का सामना कर रहा है, जिन्हें कृषि सुधार के बिना हल करना कठिन है।