'तकनीकी-कानूनी ढांचे के माध्यम से एआई गवर्नेंस को मजबूत करने' पर श्वेत-पत्र जारी किया गया | Current Affairs | Vision IAS
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  • श्वेत पत्र एआई शासन के लिए एक तकनीकी-कानूनी मॉडल का प्रस्ताव करता है, जिसमें डिजाइन-चरण एकीकरण, लचीलापन, जोखिम-अनुपातिक नियंत्रण, मानवीय पर्यवेक्षण और जीवनचक्र शासन पर जोर दिया गया है।
  • चुनौतियों में गोपनीयता और प्रदर्शन के बीच संतुलन बनाना, एआई उपयोगकर्ताओं को विषयों से अलग करना, सीमा पार संरेखण और अनुपालन उपायों के साथ सिस्टम की सटीकता बनाए रखना शामिल है।
  • आगे बढ़ने के रास्ते में एआईजीजी और टीपीईसी जैसे संस्थागत तंत्र, मशीन अनलर्निंग और सिंथेटिक डेटा जैसे तकनीकी सहायक तत्व और सहमति-आधारित डेटा साझाकरण के लिए डीईपीए का एकीकरण शामिल है।

In Summary

यह श्वेत-पत्र प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (OPSA) के कार्यालय ने जारी किया है। यह श्वेत - पत्र एआई गवर्नेंस के लिए पारंपरिक "कमान-और-नियंत्रण" विनियमों से हटकर एक “तकनीकी-कानूनी मॉडल” की ओर बढ़ने का प्रस्ताव करता है।

तकनीकी-कानूनी ढांचे के मुख्य सिद्धांत

  • डिजाइन द्वारा गवर्नेंस: कानूनी और नैतिक आवश्यकताओं को डिजाइन के चरण में ही AI प्रणालियों में शामिल कर लिया जाता है।
  • नवाचार-समर्थक और लचीला विनियमन: नवाचार के साथ जोखिम न्यूनीकरण का संतुलन बनाना।
  • जोखिम-आनुपातिक नियंत्रण: AI प्रणालियों के तैनाती के पैमाने और संभावित नुकसान के अनुसार एआई गवर्नेंस की तीव्रता अलग-अलग होती है। साधारण शब्दों में सरकार प्रत्येक AI प्रणाली पर एक ही तरह के सख्त नियम लागू नहीं करेगी। इसके बजाय, नियमों की सख्ती इस पर निर्भर करेगी कि वह प्रणाली समाज या व्यक्ति को कितना नुकसान पहुंचा सकती है।
  • मानवीय निरीक्षण: स्वत: होने वाले नुकसान को रोकने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय बिंदुओं पर मानवीय निगरानी को बनाए रखा जाता है।
  • उपयोग अवधि-आधारित गवर्नेंस: सुरक्षा उपाय डेटा संग्रह और प्रशिक्षण से लेकर तैनाती व उपयोग तक पूर्ण AI उपयोग अवधि में कार्य करते हैं। (इन्फोग्राफिक देखें)

AI उपयोग अवधि और प्रस्तावित नियंत्रण

कार्यान्वयन में चुनौतियां

  • गोपनीयता बनाम प्रदर्शन: विशेष रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले भाषाई और सांस्कृतिक समूहों के लिए बड़े पैमाने पर डेटा मिटाने से मॉडल का प्रदर्शन कम हो सकता है।
  • AI उपयोगकर्ताओं और AI विषयों के बीच अंतर: स्वास्थ्य सेवा और लोक सुरक्षा जैसे भारतीय कल्याणकारी संदर्भों में, नागरिक अक्सर उपयोगकर्ता की बजाय 'विषय' (subjects) होते हैं, जिनके पास परिणामों का विरोध करने की क्षमता कम होती है।
  • सीमा-पार अनुरूपता और प्रवर्तन: विदेशों में प्रशिक्षित मॉडल्स में भारतीय सुरक्षा उपाय शामिल नहीं हो सकते हैं। इससे विनियामक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
  • सटीकता के साथ अनुपालन का संतुलन: तकनीकी-कानूनी उपायों को लागू करने से संभावित रूप से AI प्रणालियों की सटीकता प्रभावित हो सकती है।

आगे की राह

  • संस्थागत तंत्र: विशिष्ट संस्थागत निकायों द्वारा समर्थित एक "समग्र-सरकार" (whole-of-government) दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जैसे:
    • एआई गवर्नेंस ग्रुप (AIGG): मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए।
    • प्रौद्योगिकी और नीति विशेषज्ञ समिति (TPEC): कानून, नीति और AI सुरक्षा में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए।
  • तकनीकी सक्षमकर्ता: मशीन अनलर्निंग (डेटा मिटाने के अधिकार के लिए), सिंथेटिक डेटा (गोपनीयता के लिए), और कंटेंट प्रमाणन (डीपफेक पहचान के लिए वॉटरमार्किंग/ मेटाडेटा) के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) (जैसे आधार, UPI) का एकीकरण चाहिए।
  • DEPA एकीकरण: सहमति-संचालित डेटा साझाकरण और विश्वसनीय निष्पादन परिवेश को लागू करने के लिए डेटा सशक्तीरकण और सुरक्षा संरचना (DEPA) का उपयोग करना चाहिए।
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डेटा सशक्तीरकण और सुरक्षा संरचना (DEPA)

यह एक ढाँचा है जो व्यक्तियों को उनकी सहमति से, सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से अपने डेटा को साझा करने के लिए सशक्त बनाता है। यह डेटा साझाकरण और विश्वास को बढ़ावा देता है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

साझा, सुरक्षित और अंतर्संचालनीय डिजिटल प्रणालियों का एक समूह है जो मुक्त मानकों पर आधारित होती है और सक्षमकारी नियमों द्वारा संचालित होती है। यह प्रभावी लोक सेवा वितरण, भुगतान क्रांति और ई-गवर्नेंस को सुगम बनाता है।

कंटेंट प्रमाणन

यह डिजिटल सामग्री की प्रामाणिकता और उत्पत्ति को सत्यापित करने की प्रक्रिया है, अक्सर वॉटरमार्किंग या मेटाडेटा जैसी तकनीकों का उपयोग करके। यह डीपफेक जैसी गलत सूचनाओं का मुकाबला करने में मदद करता है।

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