ई-अपशिष्ट और लिथियम-आयन बैटरी की चक्रीय अर्थव्यवस्था पर रिपोर्ट जारी की गई | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

In Summary

  • नीति आयोग और टेरी की रिपोर्ट ई-कचरा चक्रीयता की चुनौतियों पर प्रकाश डालती है: अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व, कमजोर ईपीआर और कम तकनीकी क्षमता।
  • भारत में ई-कचरा उत्पादन 6.19 मिलियन मीट्रिक टन (2024) है, जिसके 2030 तक 14 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें पुनर्चक्रण दर 10% है।
  • सिफारिशों में ईडब्ल्यूएमआर को मजबूत करना, पीएलआई और कार्बन बाजारों के माध्यम से बैटरी रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करना और अनौपचारिक क्षेत्र को एकीकृत करना शामिल है।

In Summary

यह रिपोर्ट नीति आयोग ने ऊर्जा और संसाधन संस्थान (TERI) के सहयोग से जारी की है।

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy): यह उत्पादन और उपभोग का एक मॉडल है। इसमें मौजूदा सामग्रियों व उत्पादों को साझा करना, पट्टे पर देना, पुन: उपयोग करना, मरम्मत करना, नवीनीकरण करना और पुनर्चक्रण करना शामिल है।

ई-अपशिष्ट की चक्रीयता में चुनौतियां

  • अनौपचारिक और अक्षम संग्रह: भारत के कुल ई-अपशिष्ट का लगभग 78% अनौपचारिक क्षेत्रक द्वारा संसाधित किया जाता है। इसमें सामग्री की पुनर्प्राप्ति दर केवल 10-20% होती है, जबकि औपचारिक सुविधाओं में यह 95-97% तक होती है।
  • कमजोर निगरानी और प्रवर्तन: विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) प्रणाली में हेरफेर देखा गया है। उदाहरण के लिए- फर्जी EPR प्रमाण-पत्रों का चलन।
    • सीमित EPR कवरेज: वर्तमान में केवल कुछ धातुओं का ही सर्वाधिक उपयोग होता है, जैसे लोहा (52%) और तांबा (18%)। इनके विपरीत, लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) उपेक्षित रह जाते हैं।
  • कम तकनीकी क्षमता: कुशल, सुरक्षित और बड़े स्तर पर पुनर्चक्रण के लिए कौशल एवं प्रौद्योगिकियों की कमी है।

सिफारिशें

  • अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को मजबूत करना: उच्च मूल्य वाली धातुओं को शामिल करने के लिए EPR कवरेज का विस्तार करके पुनर्चक्रणकर्ताओं की निगरानी करनी चाहिए। 
  • प्रोत्साहन प्रदान करना: उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत 'एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल' के निर्माताओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रस्ताव करना चाहिए।
  • कार्बन बाजार में एकीकरण: बैटरी पुनर्चक्रण को भारतीय कार्बन बाजार से जोड़ना चाहिए। इससे पुनर्चक्रणकर्ता ग्रीन हाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में कमी का मुद्रीकरण (monetize) कर सकेंगे।
  • अनौपचारिक क्षेत्रक का समेकन: सिंगल-विंडो सिस्टम का उपयोग करना चाहिए। साथ ही, राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) में विशेष रूप से पुनर्चक्रण के लिए एक अलग घटक स्थापित करना चाहिए।
  • अन्य: उपभोक्ता जागरूकता बढ़ानी चाहिए; कार्यबल का कौशल विकास करना चाहिए और पुन: कौशल विकास (Re-skilling) पर ध्यान देना चाहिए आदि।

भारत में ई-अपशिष्ट की स्थिति

  • ई-अपशिष्ट सृजन: यह 2024 में बढ़कर लगभग 6.19 MMT हो गया है और 2030 तक इसके 14 MMT तक पहुंचने का अनुमान है। भारत वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा ई-अपशिष्ट उत्पादक (वैश्विक मात्रा का 7%) है।
  • पुनर्चक्रण दर: भारत में यह केवल 10% है, जो वैश्विक औसत (लगभग 22%), यूरोपीय संघ (55%) और संयुक्त राज्य अमेरिका (56%) की तुलना में बहुत कम है।

भारत द्वारा की गई पहलें

  • ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियम (EWMR), 2022: ये विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) आदेश लागू करते हैं। इसके तहत उत्पादकों को EPR प्रमाण-पत्रों की खरीद के माध्यम से पुनर्चक्रण लक्ष्यों को पूरा करना आवश्यक है।
  • बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम (BWMR), 2022: ये संग्रह, पुनर्चक्रण और नवीनीकरण लक्ष्यों को अनिवार्य बनाते हैं तथा लैंडफिल निपटान व भस्मीकरण (incineration) को प्रतिबंधित करते हैं।

वैश्विक सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियां

  • दक्षिण कोरिया: यहां नियमों का पालन न करने पर सख्त दंड का प्रावधान किया गया है, जो पुनर्चक्रण लागत के 130% तक हो सकता है।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

पुनर्चक्रण दर (Recycling Rate)

उत्पादित या एकत्र किए गए कुल कचरे का वह प्रतिशत जिसे सफलतापूर्वक पुनर्चक्रित किया जाता है।

कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emissions)

वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों, विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उत्सर्जन, जो जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण है।

बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम (BWMR), 2022

भारत सरकार द्वारा बैटरी के जीवन-चक्र के अंत में प्रबंधन के लिए लागू नियम, जिसमें संग्रह, पुनर्चक्रण और नवीनीकरण के लक्ष्य निर्धारित हैं, तथा लैंडफिल निपटान प्रतिबंधित है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet