भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) संपन्न हुआ | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • इंडिया-EU FTA से इंडिया को EU टैरिफ लाइनों में 97% खास एक्सेस मिलता है, जो ट्रेड वैल्यू का 99.5% कवर करता है।
  • टेक्सटाइल और लेदर जैसे ज़रूरी लेबर-इंटेंसिव सेक्टर को तुरंत ज़ीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलता है, जबकि सेंसिटिव सेक्टर को धीरे-धीरे किया जाता है।
  • दूसरे नतीजों में खुशहाली के लिए एक स्ट्रेटेजिक एजेंडा, सिक्योरिटी पार्टनरशिप, इनोवेशन हब और एक ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स शामिल हैं।

In Summary

यह दोनों पक्षों द्वारा अब तक किया गया सबसे बड़ा समझौता है। यह विश्व की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक एवं राजनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा।

भारत-यूरोपीय संघ FTA के बारे में

  • रणनीतिक बाजार पहुंच: भारत को यूरोपीय संघ के लगभग 97% टैरिफ लाइंस (उत्पादों) में अधिमान्य (preferential) पहुंच मिलेगी। इसके तहत व्यापार मूल्य का 99.5% कवर होगा।  
    • प्रमुख श्रम-गहन क्षेत्रक: वस्त्र, चमड़ा, रत्न व आभूषण जैसे श्रम-गहन क्षेत्रकों को तत्काल शून्य-शुल्क प्रवेश मिलेगा।
  • संवेदनशील क्षेत्रकों की सुरक्षा: डेयरी, अनाज, कुक्कुट, सोयाबीन मील और कुछ फलों व सब्जियों जैसे क्षेत्रकों को चरणबद्ध उदारीकरण के माध्यम से सुरक्षित रखा गया है।
  • उत्पाद विशिष्ट नियम: 'स्टेटमेंट ऑन ओरिजिन' (उत्पत्ति के विवरण) के माध्यम से स्व-प्रमाणन की सुविधा दी गई है। साथ ही, MSMEs के लिए विशेष लचीलापन, कोटा और संक्रमणकालीन अवधि का प्रावधान किया गया है।
  • गैर-प्रशुल्क (टैरिफ) बाधाओं को दूर करना: 
    • विनियामक सहयोग को मजबूत किया जाएगा; 
    • अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी;
    • सीमा शुल्क को सुव्यवस्थित किया जाएगा, स्वच्छता और पादप-स्वच्छता (Sanitary and Phytosanitary: SPS) प्रक्रियाओं पर सहयोग बढ़ाया जाएगा;
    • व्यापार के समक्ष तकनीकी बाधाओं (TBT) को दूर करने संबंधी नियमों को मजबूत किया जाएगा आदि।  
  • सेवा व्यापार: सूचना प्रौद्योगिकी (IT), शिक्षा, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और पेशेवर सेवाओं सहित यूरोपीय संघ के 144 सेवा उप-क्षेत्रकों में स्थिर बाजार पहुंच प्राप्त हुई है।
  • आवाजाही में आसानी: भारतीय कॉर्पोरेट्स के कर्मचारियों, व्यावसायिक संस्थाओं और स्वतंत्र पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाया गया है। 

भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के अन्य प्रमुख परिणाम

  • 2030 की ओर: भारत-यूरोपीय संघ संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा: इसमें समृद्धि व संधारणीयता, प्रौद्योगिकी और नवाचार, सुरक्षा एवं रक्षा, कनेक्टिविटी और वैश्विक मुद्दे जैसे प्रमुख क्षेत्रक शामिल हैं।
  • सुरक्षा और रक्षा साझेदारी: गोपनीय जानकारी के आदान-प्रदान को सक्षम करने के लिए 'भारत-यूरोपीय संघ सूचना सुरक्षा समझौते' पर वार्ता शुरू की गई। 
  • उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां: भारत-यूरोपीय संघ नवाचार केंद्रों का निर्माण किया जाएगा तथा भारत-यूरोपीय संघ स्टार्ट-अप्स साझेदारी की शुरुआत की गई।
  • ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स: इसका गठन भारत-यूरोपीय संघ स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु साझेदारी के ढांचे के भीतर किया जाएगा।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी: 2025-2030 की अवधि के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग पर भारत-यूरोपीय संघ समझौते का नवीनीकरण किया गया। साथ ही, यूरोपीय संघ के प्रमुख अनुसंधान एवं नवाचार कार्यक्रम 'होराइजन यूरोप' से भारत को जोड़ने के लिए वार्ता शुरू की गई। 
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