कर्नाटक सरकार ने गिग कर्मकार कल्याण बोर्ड का गठन किया है।
‘गिग कर्मकार कल्याण बोर्ड’ के बारे में
- इसका गठन कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग कर्मकार (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण विकास) अधिनियम, 2025 के तहत किया गया है।
- राज्य के श्रम मंत्री इस बोर्ड के पदेन (ex-officio) अध्यक्ष होंगे।
- इसमें गिग कर्मकारों के संघों और गिग प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- इसमें एग्रीगेटर्स और गिग कर्मकारों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाया गया है और उन्हें एक विशिष्ट पहचान पत्र जारी किया जाएगा।
- यह एक विशेष वैधानिक निकाय के माध्यम से गिग कर्मकारों के लिए कल्याणकारी उपायों को लागू करने के राज्य सरकार के कदम को सुगम बनाएगा। इसके लिए एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स और गिग कर्मकारों, दोनों का अनिवार्य पंजीकरण आवश्यक है।
पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने ‘रणनीतिक परिसंपत्ति आवंटन और जोखिम शासन (SAARG)’ समिति का गठन किया है।
SAARG के बारे में
- इसका गठन NPS (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) की निवेश संरचना को मजबूत करने के लिए हुआ है।
- इसका लक्ष्य दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति परिसंपत्ति सृजन को बढ़ावा देना, निवेश में विविधीकरण बढ़ाना, जोखिम प्रबंधन कार्यों में सुधार करना तथा सब्सक्राइबर्स के लिए विकल्पों का विस्तार करना।
PFRDA के बारे में
- स्थापना: इसे 2003 में स्थापित किया गया था। इसे PFRDA अधिनियम, 2013 के तहत सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया था।
- उद्देश्य: राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसी पेंशन निधियों की स्थापना, विकास और विनियमन करके वृद्धावस्था में आय सुरक्षा को बढ़ावा देना।
- यह केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
Article Sources
1 sourceउत्तर कोरिया ने जापान सागर (Sea of Japan) की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
जापान सागर के बारे में
- इसे पूर्वी सागर (East Sea) भी कहा जाता है)
- अवस्थिति: पश्चिमी प्रशांत महासागर में।
- यह दक्षिण में त्सुशिमा जलडमरूमध्य और कोरिया जलडमरूमध्य के माध्यम से पूर्वी चीन सागर से जुड़ा हुआ है। यह उत्तर में ला पेरूज़ और टाटार जलडमरूमध्य के माध्यम से ओखोट्स्क सागर से जुड़ा हुआ है।
- पूर्व दिशा में यह कानमोन जलडमरूमध्य के माध्यम से जापान अंतर्देशीय सागर (Inland Sea of Japan) से तथा त्सुगारु जलडमरूमध्य के माध्यम से प्रशांत महासागर से जुड़ा है।
- सीमाएं:
- पूर्व में: जापान और सखालिन द्वीप
- पश्चिम में: रूस और कोरियाई प्रायद्वीप।
भारत और यूरोपीय संघ ने भारत–यूराटॉम (India-Euratom) समझौते के तहत परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है।
यूराटॉम के बारे में
- यूराटॉम वास्तव में ‘यूरोपीय परमाणु ऊर्जा समुदाय’ (European Atomic Energy Community) का संक्षिप्त रूप है। इसकी स्थापना 1957 में रोम संधि के तहत की गई थी।
- उद्देश्य: परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना, अनुसंधान में सहयोग को प्रोत्साहित करना और तकनीकी ज्ञान का प्रसार करना।
- यह नागरिक (सिविल) परमाणु सामग्री के सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने से रोकने का कार्य करता है।
- भारत और यूरोपीय संघ ने जुलाई 2020 में यूराटॉम के साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोगों पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) समझौता किया था।
- भारत वर्ष 2017 से CERN का सहयोगी सदस्य है।
संयुक्त राज्य अमेरिका आधिकारिक तौर पर दूसरी बार पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौता से बाहर हो गया है।
‘पेरिस समझौता’ के बारे में
- पृष्ठभूमि: इसे 2015 में पेरिस में आयोजित UNFCCC-COP21 में अपनाया गया था। यह 2016 में लागू हुआ।
- यह जलवायु परिवर्तन को एक वैश्विक आपात स्थिति के रूप में मान्यता देता है जिसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
- प्रकृति: यह विधिक रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि है।
- पक्षकार: 195 (194 देश + यूरोपीय संघ)। भारत इसका पक्षकार है।
- मुख्य उद्देश्य:
- वैश्विक तापवृद्धि को औद्योगिक क्रांति से पूर्व से स्तर से 2°C से काफी नीचे रखना।
- वैश्विक तापवृद्धि को 1.5°C तक सीमित करने के प्रयास जारी रखना, यह स्वीकार करते हुए कि इससे जलवायु जोखिमों में काफी कमी आएगी।
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1 sourceब्रह्मांड के 6-वर्षीय गहन अध्ययन में 'ब्रह्मांड-विज्ञान का मानक मॉडल' (Standard Model of Cosmology) सटीक पाया गया है।
‘ब्रह्मांड-विज्ञान का मानक मॉडल’ के बारे में
- यह एक सैद्धांतिक ढांचा है। यह व्यापक स्तर पर ब्रह्मांड की संरचना और उसके उद्विकास का वर्णन करता है।
- यह ब्रह्मांड के शुरुआती पलों से लेकर इसकी वर्तमान स्थिति तक के इतिहास की एक विस्तृत समझ प्रदान करता है।
- यह सामान्य सापेक्षता (General Relativity) के सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें भौतिकी के नियमों को शामिल किया गया है।
- प्रमुख घटक: बिग बैंग सिद्धांत, डार्क मैटर, डार्क एनर्जी, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन (CMB)।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के अनुसार, पिछले वर्ष दिसंबर से अब तक पश्चिम बंगाल से निपाह वायरस संक्रमण के केवल दो मामलों की पुष्टि हुई है।
निपाह वायरस के बारे में
- प्रकृति: ज़ूनोटिक वायरस (जो पशुओं से मनुष्यों में फैलता है)।
- संक्रमण के प्राकृतिक स्रोत: 'फ्रूट बैट', जिन्हें 'फ्लाइंग फॉक्स' के नाम से भी जाना जाता है।।
- संक्रमण के तरीके:
- जानवर से मनुष्य में: संक्रमित चमगादड़ों या सूअरों के प्रत्यक्ष संपर्क में आने से, या चमगादड़ों से संक्रमित कच्चे खजूर के रस (डेट पाम सैप) या फलों के सेवन से।
- मनुष्य से मनुष्य में: संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के निकट संपर्क से।
- पहली बार पहचान: 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में हुए प्रकोप के दौरान (चमगादड़ → सूअर → मनुष्य)।
- लक्षण सामने आने की अवधि: 4–14 दिन।
- प्रारंभिक लक्षण: बुखार, सिरदर्द, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई।
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1 sourceशोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष के मलबे पर नजर रखने के लिए एक नई विधि विकसित की है। इसमें भूकंप का पता लगाने वाले सिस्मोमीटर का उपयोग करके सोनिक बूम की मदद से गिरते हुए अंतरिक्ष मलबे पर नजर रखा जाता है।
सोनिक बूम के बारे में
- सोनिक बूम वह तेज़ ध्वनि है जो किसी विमान या अन्य वस्तु के ध्वनि की गति से अधिक गति प्राप्त करने पर उत्पन्न होती है।
- इस तीव्र गति के कारण झटकेदार तरंगें (शॉक वेव्स) बनती हैं, जो तेज, धमाके जैसी आवाज के रूप में महसूस होती हैं।
- कारण:
- आमतौर पर विमानों की उड़ान से;
- प्राकृतिक घटनाएं: ज्वालामुखी उद्गार, उल्का बौछार और भूकंप से।
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1 sourceसर्न (CERN) के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) में ALICE सहयोग ने यह स्पष्ट किया है कि उच्च-ऊर्जा कणों की टक्कर के दौरान नाजुक 'ड्यूटेरॉन' कैसे सुरक्षित बच जाते हैं।
ड्यूटेरॉन के बारे में
- यह हाइड्रोजन का एक स्थिर समस्थानिक है। इसके नाभिक में एक प्रोटॉन और एक न्यूट्रॉन होते हैं, जो प्रबल नाभिकीय बल द्वारा जुड़े रहते हैं।
- प्रतीक: इसे "²H" या "D" के रूप में दर्शाया जाता है।
- गुणधर्म:
- आवेश: +1 का शुद्ध धनात्मक आवेश।
- द्रव्यमान: लगभग एक प्रोटॉन के द्रव्यमान का दोगुना।
- उपयोग:
- नाभिकीय संलयन अभिक्रियाओं में ईंधन के रूप में।
- न्यूट्रॉन उत्पादन में, जिनका उपयोग कैंसर उपचार, न्यूट्रॉन रेडियोथेरेपी आदि में किया जाता है।