कोकिंग कोल को 'महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज' घोषित किया गया | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • घरेलू इस्पात क्षेत्र के लिए इसकी रणनीतिक भूमिका को मान्यता देते हुए, कोकिंग कोयले को एमएमडीआर अधिनियम की पहली अनुसूची के भाग डी में शामिल किया गया है।
  • इस प्रावधान का उद्देश्य अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करना, व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देना और अन्वेषण एवं खनन गतिविधियों में तेजी लाना है।
  • एमएमडीआर अधिनियम 1957 केंद्र सरकार को खनिज विनियमन का अधिकार देता है, जिसमें 2023 के संशोधनों के तहत महत्वपूर्ण खनिज रियायतों की विशेष नीलामी संभव हो पाती है।

In Summary

सरकार ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act), 1957 के तहत कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज (Critical and Strategic Mineral) के रूप में अधिसूचित किया है।

  • कोकिंग कोल को MMDR अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग D में शामिल किया गया है। इस अनुसूची में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों को सूचीबद्ध किया गया है।
  • यह निर्णय खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने और घरेलू इस्पात क्षेत्रक की आवश्यकताओं को पूरा करने में कोकिंग कोल की रणनीतिक भूमिका को मान्यता देता है।
    • वर्तमान में, इस्पात क्षेत्रक की कोकिंग कोल की लगभग 95% आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। इससे बहुत अधिक विदेशी मुद्रा देश से बाहर चली जाती है। 
  • इस निर्णय से तेजी से मंजूरी मिलने; 'व्यवसाय करने की सुगमता' में सुधार होने और गहरी परतों में दबे कोल निक्षेपों सहित अन्वेषण और खनन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।

कोकिंग कोल के बारे में

  • कोकिंग कोल ब्लास्ट फर्नेस (वात भट्टी) मार्ग के माध्यम से इस्पात उत्पादन में एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसका उपयोग सीमेंट, रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योगों में भी किया जाता है।
  • भंडार: अनुमानित 37.37 बिलियन टन भंडार, जो मुख्य रूप से झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में स्थित हैं।
  • चुनौतियां: अपर्याप्त घरेलू उत्पादन, उच्च राख (Ash) सामग्री, गहराई में निक्षेप, खानों से जुड़े मुद्दे (जैसे- भूमिगत आगजनी और जमीन धंसना), सीमित भूगर्भीय डेटा और भूमि अधिग्रहण संबंधी चुनौतियां।
  • पहलें: मिशन कोकिंग कोल, वाणिज्यिक कोयला खनन में 100% FDI, राजस्व-साझाकरण नीलामी, और 39 'फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी' परियोजनाएं आदि।

खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act), 1957 के बारे में

  • यह केंद्र सरकार को खानों के विनियमन और खनिज संसाधनों के विकास के संबंध में कानून बनाने का अधिकार देता है।
  • यह खनन से प्रभावित लोगों व क्षेत्रों के कल्याण के लिए जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) तथा अन्वेषण को बढ़ावा देने एवं अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास (NMET) की स्थापना का प्रावधान करता है।
  • इस कानून में 2023 में संशोधन किए गए थे। इन संशोधनों के माध्यम से निम्नलिखित बदलाव किए गए-
    • 12 परमाणु खनिजों की सूची से 6 खनिजों को हटा दिया गया;
    • केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अनन्य रूप से खनिज रियायतें नीलाम करने का अधिकार दिया गया;
    • 'गहराई में निक्षेपित' और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अन्वेषण लाइसेंस की शुरुआत की गई।
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2023 में MMDR अधिनियम में संशोधन

2023 में हुए संशोधनों ने 12 परमाणु खनिजों में से 6 को सूची से हटाया, महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अनन्य नीलामी का अधिकार केंद्र सरकार को दिया, और 'गहराई में निक्षेपित' खनिजों के लिए अन्वेषण लाइसेंस की शुरुआत की।

39 'फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी' परियोजनाएं

ये परियोजनाएं कोयला खदानों से कोयले को परिवहन के लिए सड़कों या रेलवे जैसे माध्यमों से जोड़ने पर केंद्रित हैं, जिससे कोयला परिवहन की दक्षता बढ़ती है।

राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास (NMET)

यह MMDR अधिनियम, 1957 के तहत अन्वेषण को बढ़ावा देने और अवैध खनन पर रोक लगाने के उद्देश्य से स्थापित एक न्यास है।

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