सरकार ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act), 1957 के तहत कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज (Critical and Strategic Mineral) के रूप में अधिसूचित किया है।
- कोकिंग कोल को MMDR अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग D में शामिल किया गया है। इस अनुसूची में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों को सूचीबद्ध किया गया है।
- यह निर्णय खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने और घरेलू इस्पात क्षेत्रक की आवश्यकताओं को पूरा करने में कोकिंग कोल की रणनीतिक भूमिका को मान्यता देता है।
- वर्तमान में, इस्पात क्षेत्रक की कोकिंग कोल की लगभग 95% आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। इससे बहुत अधिक विदेशी मुद्रा देश से बाहर चली जाती है।
- इस निर्णय से तेजी से मंजूरी मिलने; 'व्यवसाय करने की सुगमता' में सुधार होने और गहरी परतों में दबे कोल निक्षेपों सहित अन्वेषण और खनन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
कोकिंग कोल के बारे में
- कोकिंग कोल ब्लास्ट फर्नेस (वात भट्टी) मार्ग के माध्यम से इस्पात उत्पादन में एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसका उपयोग सीमेंट, रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योगों में भी किया जाता है।
- भंडार: अनुमानित 37.37 बिलियन टन भंडार, जो मुख्य रूप से झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में स्थित हैं।
- चुनौतियां: अपर्याप्त घरेलू उत्पादन, उच्च राख (Ash) सामग्री, गहराई में निक्षेप, खानों से जुड़े मुद्दे (जैसे- भूमिगत आगजनी और जमीन धंसना), सीमित भूगर्भीय डेटा और भूमि अधिग्रहण संबंधी चुनौतियां।
- पहलें: मिशन कोकिंग कोल, वाणिज्यिक कोयला खनन में 100% FDI, राजस्व-साझाकरण नीलामी, और 39 'फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी' परियोजनाएं आदि।
खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act), 1957 के बारे में
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