भारत ने मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल करने के लिए नामांकन दस्तावेज प्रस्तुत किया है।
- इसे “जिंगकिएंग जरी / ल्यू चराई सांस्कृतिक परिदृश्य” नाम से विरासत सूची में शामिल किया जा सकता है।
मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज के बारे में
- स्थानीय भाषा में इन्हें जिंगकिएंग जरी (Jingkieng Jri) कहा जाता है।
- ये 'भारतीय रबर वृक्ष' की जड़ों से बनी प्राकृतिक संरचनाएं हैं।
- ये मेघालय के घने उप-उष्णकटिबंधीय आर्द्र वन क्षेत्र में पाए जाते हैं।
- निर्माता: इन्हें खासी जनजाति के देशज समुदायों द्वारा तैयार किया जाता है।
- उपयोग: पुल, सीढ़ियाँ और रास्ते के रूप में (आवागमन हेतु); मंच और टावर (मनोरंजन और सुरक्षा के लिए) के रूप में; मृदा अपरदन और भूस्खलन रोकने में मदद करने हेतु।
- निर्माण की तकनीक
- नदी के दोनों किनारों पर रबर के पेड़ लगाए जाते हैं।
- पेड़ों की जड़ों को हाथों से मोड़ा, घुमाया और आपस में बुना जाता है।
- सहारे के लिए सुपारी (Areca) के तने, बाँस और पत्थरों का उपयोग किया जाता है।
- एक लिविंग रूट ब्रिज को पूरी तरह उपयोगी बनने में 10–15 वर्ष लगते हैं।
हाल ही में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस कालबेलिया समुदाय द्वारा मृतकों को दफ़नाने के अधिकार की माँग से जुड़े मामले में दिया गया है।
कालबेलिया समुदाय के बारे में
- यह राजस्थान के थार मरुस्थल की एक खानाबदोश जनजाति है। ये मुख्य रूप से पाली, अजमेर और उदयपुर जिलों में प्राप्त होते हैं।
- इन्हें पारंपरिक रूप से 'सपेरों' के रूप में जाना जाता था।
- सांप पकड़ने पर प्रतिबंध लगने के बाद, इस समुदाय ने अपना ध्यान निष्पादन कला (Performing Arts) की ओर केंद्रित कर लिया है।
- कालबेलिया नृत्य को 2010 में यूनेस्को की 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया।
- इस नृत्य शैली में महिलाएं नृत्यांगना होती हैं और पुरुष पुंगी (बीन), डफली, खंजरी जैसे वाद्य यंत्र बजाकर साथ देते हैं।
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1 sourceएक हालिया अध्ययन के अनुसार, पश्चिमी भारत से उठने वाली तेज धूल भरी आंधियां सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करती हैं। ये हवाएं अपने साथ वायुजनित बैक्टीरिया और रोगाणु लेकर चलती हैं, जो अंततः हिमालय की चोटियों पर जमा हो जाते हैं।
अध्ययन के मुख्य बिंदु
- तेज़ हवा रोगाणुओं से भरी धूल को सिंधु-गंगा के मैदान के पार ले जाती हैं।
- रास्ते में यह धूल स्थानीय प्रदूषण के साथ मिलकर
- ऊँचाई वाले क्षेत्रों के सूक्ष्मजीव (microbial) तंत्र को बदल देती है।
- स्वास्थ्य के लिए खतरा: श्वसन संबंधी बीमारियों, त्वचा संक्रमण, पेट व आंतों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
धूल भरी आंधी के बारे में
- धूल भरी आंधी मौसम संबंधी परिघटना है। इसमें तेज़ हवाएँ शुष्क या अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की ढीली मृदा और रेत को हवा में उड़ा ले जाती हैं। यह धूल बहुत दूर-दूर तक ले जाई जा सकती है।
- ये आमतौर पर मौसमी होती हैं और मानसून-पूर्व (गर्मी के महीनों) में इनकी तीव्रता सबसे अधिक होती है।
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1 sourceहाल ही में, PAIMANA नामक एक नया वेब-आधारित पोर्टल क्रियान्वित किया गया है।
PAIMANA के बारे में
- इसका पूर्ण रूप है: राष्ट्र निर्माण के लिए परियोजना मूल्यांकन, अवसंरचना निगरानी और विश्लेषण (Project Assessment, Infrastructure Monitoring & Analytics for Nation-building) .
- PAIMANA एक वेब-आधारित पोर्टल है। इसे केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा संचालित किया गया है।
- इसने OCMS-2006 (ऑनलाइन कंप्यूटरीकृत निगरानी प्रणाली) की जगह ली है। इसका उपयोग ₹150 करोड़ और उससे अधिक मूल्य की केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के लिए किया जाएगा।
- यह पोर्टल "वन डेटा, वन एंट्री" सिद्धांत पर कार्य करता है।
- यह APIs के माध्यम से उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के 'इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग पोर्टल' (IPMP/IIG-PMG) के साथ जुड़ा हुआ है। इससे डेटा का प्रवाह स्वचालित रूप से होता है।
- यह उन्नत एनालिटिक्स, डैशबोर्ड, भूमिका-आधारित पहुंच और डेटा अंतराल की पहचान के साथ एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय डेटा भंडार के रूप में कार्य करता है।
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1 sourceहाल ही में उत्तरी अमेरिका में एक बम चक्रवात आया। इससे कड़ाके की सर्दी, तेज हवाएं और भारी बर्फ़बारी जैसी गंभीर मौसम संबंधी स्थितियाँ उत्पन्न हो गई।
बम चक्रवात के बारे में
- बम चक्रवात तब उत्पन्न होता है जब निम्न दाब वाली वायुराशि उच्च दाब वाली वायुराशि से टकराती है। इस प्रक्रिया को बॉम्बोजेनेसिस (Bombogenesis) कहा जाता है।
- इसकी मुख्य विशेषताएं हैं:
- 24 घंटे के भीतर वायुमंडलीय दाब में कम से कम 24 मिलीबार (mb) की भारी गिरावट दर्ज की जाती है।
- दाब में इस अचानक गिरावट के कारण दाब प्रवणता (Pressure Gradient) बढ़ जाती है, जिससे हवाएं प्रबल हो जाती हैं (80 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक)।
- उत्पन्न क्षेत्र: बम चक्रवात सबसे अधिक पश्चिमी उत्तरी अटलांटिक महासागर में उत्पन्न होते हैं। इसका कारण है उत्तरी अमेरिका की ठंडी वायु और अटलांटिक महासागर के ऊपर की गर्म वायु का आपस में टकराना।
लद्दाख के हानले में स्थित भारतीय खगोलीय वेधशाला ने खून जैसा लाल अरोरा की दुर्लभ परिघटना को कैमरे में दर्ज किया है।
हानले डार्क स्काई रिजर्व (HDSR) के बारे में
- यह भारत का पहला डार्क स्काई रिजर्व है।
- अवस्थिति: यह लद्दाख के चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है।
- लाभ: इसकी अत्यधिक ऊंचाई और न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण विशाल अंतरिक्ष के अवलोकन के लिए बिल्कुल स्पष्ट वायुमंडलीय स्थितियां प्रदान करते हैं।
- यहाँ भारतीय खगोलीय वेधशाला (IAO) स्थित है, जिसमें हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप लगा हुआ है।
नोट: लाल अरोरा 200 किमी से अधिक की ऊंचाई पर बनते हैं, जहाँ वायुमंडल सघनता कम होती है।
हाल ही में, ईरान द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई हिंसक कार्रवाई के जवाब में यूरोपीय संघ (EU) ने IRGC को अपनी आतंकवादी सूची में शामिल कर लिया है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बारे में
- इसे ईरान का सबसे शक्तिशाली सशस्त्र बल माना जाता है।
- गठन: इसकी स्थापना 1979 की इस्लामिक क्रांति के तुरंत बाद ईरान की इस्लामिक व्यवस्था की रक्षा के लिए की गई थी।
- क्षमताएं: इसके पास थल, नभ और जल तीनों क्षेत्रों में सैन्य क्षमताएं हैं। इसके अलावा, यह ईरान के सामरिक हथियारों की निगरानी भी करता है।
- यह ईरान के भीतर अर्धसैनिक बल 'बासिज रेजिस्टेंस फोर्स' को भी नियंत्रित करता है।
- यह ईरान की नियमित सेना से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और प्रत्यक्ष तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेह है।
विश्व परमाणु संघ (WNA) ने 'विश्व परमाणु परिदृश्य रिपोर्ट' (World Nuclear Outlook Report) जारी की है। यह रिपोर्ट परमाणु ऊर्जा के भविष्य के लिए एक अत्यंत सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
विश्व परमाणु परिदृश्य रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
- वर्ष 2050 तक वैश्विक परमाणु ऊर्जा क्षमता 1,446 GWe (गीगावाट इलेक्ट्रिक) तक पहुँच सकती है।
- यह 'परमाणु ऊर्जा क्षमता को तिगुना बढ़ाकर 1,200 GWe करने के लक्ष्य से भी अधिक है। यह लक्ष्य 2023 में दुबई में आयोजित UNFCCC-COP28 में तय किया गया था।
- 2050 तक विश्व की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता में लगभग 980 GWe हिस्सेदारी केवल पाँच देशों की होगी। ये देश हैं; चीन, फ्रांस, भारत, रूस और अमेरिका।
- रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि परमाणु ऊर्जा को दीर्घकालिक डी-कार्बोनाइजेशन और ऊर्जा सुरक्षा योजनाओं में एक अहम हिस्से के रूप में शामिल किया जाए।
- साथ ही, बिजली बाजारों में सुधार की जरूरत बताई गई है ताकि परमाणु ऊर्जा को अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के समान और न्यायसंगत स्थान मिल सके।
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1 sourceजेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के अवलोकनों के आधार पर, खगोलविदों ने डार्क मैटर का एक विस्तृत मानचित्र जारी किया है।
डार्क मैटर के बारे में
- यह पदार्थ का एक परिकल्पित रूप है जो अदृश्य है। हालांकि तारों, ग्रहों और चंद्रमाओं जैसे सामान्य पिंडों पर इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के आधार पर इसके अस्तित्व का अनुमान लगाया जाता है।
- यह प्रकाश को उत्सर्जित, अवशोषित या परावर्तित नहीं करता है और सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम अभिक्रिया करता है।
- ब्रह्मांड की संरचना: ब्रह्मांड में सामान्य या दृश्यमान पदार्थ (5%), डार्क मैटर (27%) और डार्क एनर्जी (68%) शामिल हैं।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के बारे में
- इसका लक्ष्य बिग बैंग परिघटना के बाद ब्रह्मांड के इतिहास के हर प्रमुख चरण का अध्ययन करना है। इनमें प्रथम चमकदार पिंडों से लेकर आकाशगंगाओं, तारों और ग्रहीय प्रणालियों के निर्माण और हमारे अपने सौर मंडल के विकास का अध्ययन शामिल है।
- प्रक्षेपण वर्ष: 2021
- अवस्थिति: यह सूर्य की परिक्रमा दूसरे लाग्रेंज बिंदु (L2) पर रहकर करता है।