न्यायालय ने केंद्र सरकार की 'स्कूली छात्राओं के लिए राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता नीति' को पूरे भारत के स्कूलों में (कक्षा 6 से 12 तक की किशोरियों के लिए) लागू करने का निर्देश दिया है।
निर्णय के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- मासिक धर्म स्वास्थ्य एक मूल अधिकार: संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' में मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है।
- अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) से संबंध: मासिक धर्म स्वच्छता के उपायों की कमी छात्राओं को स्कूलों में समान स्तर पर भागीदारी करने के अधिकार से वंचित करती है।
- बालिकाओं की गरिमा: गरिमा का अर्थ ऐसी जीवन स्थितियों से है, जो अपमान, हेय दृष्टि और बहिष्कार से मुक्त हों।
- संरचनात्मक भेदभाव: स्वच्छता संबंधी उत्पादों की अनुपलब्धता संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत शिक्षा के मूल अधिकार और शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम को प्रभावित करती है।
- अनिवार्य संस्थागत उपाय: सभी स्कूलों को पुरुष शिक्षकों और छात्रों का संवेदीकरण करना होगा; अलग शौचालय बनाने होंगे, मुफ्त सैनिटरी नैपकिन (अधिमानतः वेंडिंग मशीनों के माध्यम से) और समर्पित मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (MHM) कॉर्नर प्रदान करना अनिवार्य है आदि।
मासिक धर्म स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलें
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