केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने एक नई रिपोर्ट में भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में PSPs की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया है। ये परियोजनाएं ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने और लंबे समय तक ऊर्जा भंडारण की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं।
हाइड्रो पंप्ड-स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSPs) के बारे में
- यह एक जलविद्युत ऊर्जा भंडारण प्रणाली है। इसमें विद्युत संचय करने के लिए अलग-अलग ऊंचाई पर स्थित दो जलाशयों का उपयोग किया जाता है।
- कार्यप्रणाली: जब नवीकरणीय विद्युत अधिक उपलब्ध होती है, तब जल को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में पंप किया जाता है।
- बिजली उत्पादन: जब विद्युत की मांग बढ़ती है, तब भंडारित जल को टरबाइन से नीचे छोड़ा जाता है। इससे विद्युत उत्पन्न होती है। यह प्रणाली एक बड़े पैमाने की बैटरी की तरह कार्य करती है।
- क्षमता और स्थिति: भारत की वर्तमान में स्थापित हाइड्रो पंप्ड-स्टोरेज क्षमता लगभग 7 GW है।
- क्षमता: भारत में कुल पंप्ड-स्टोरेज क्षमता लगभग 267 GW है। इसमें 58 GW ऑन-स्ट्रीम और 209 GW ऑफ-स्ट्रीम PSPs शामिल हैं।
- प्रकार:
- ओपन-लूप: PSP प्रणाली किसी प्राकृतिक जल निकाय (नदी/ झील) से जुड़ी होती है।
- क्लोज्ड-लूप: प्राकृतिक जल निकायों से कोई संबंध नहीं होता। इसमें केवल कृत्रिम जलाशयों का उपयोग किया जाता है।
