उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से चिकित्सा पेशेवरों (डॉक्टरों) को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के इलाज के रूप में स्टेम सेल थेरेपी (SCT) प्रदान करने से रोक दिया है।
- ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एक स्नायु-विज्ञान विषयक (न्यूरोलॉजिकल) और विकासात्मक विकार है। यह लोग दूसरों के साथ कैसे अंतर्क्रिया करते हैं, संवाद करते हैं, सीखते हैं और व्यवहार करते हैं इन सभी को प्रभावित करता है।
ASD के लिए स्टेम सेल थेरेपी के उपयोग से जुड़े नैतिक मुद्दे
- प्रभावकारिता का प्रमाण: इसमें सुरक्षा और प्रभावशीलता के ठोस प्रमाणों की कमी है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा इसकी सिफारिश नहीं की जाती है।
- अनैतिक व्यावसायिक उपयोग: इसे नियमित उपचार के रूप में प्रस्तुत करना स्वीकृत चिकित्सा मानकों और नैतिकता (बोलम टेस्ट) का उल्लंघन है।
- सहमति परमाधिकार नहीं है: संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत रोगी की स्वायत्तता (स्वतंत्रता) अप्रमाणित और असुरक्षित उपचारों को चुनने तक विस्तारित नहीं है।
- केवल अनुसंधान की अनुमति: इसकी अनुमति केवल स्वीकृत नैदानिक परीक्षणों में है, वह भी विनियामक और नैतिक सुरक्षा उपायों के साथ।
- पेशेवर कदाचार: इसका उपयोग, प्रचार या विज्ञापन करना NMC मानदंडों के तहत पेशेवर कदाचार माना जाएगा।

स्टेम सेल थेरेपी (SCT) क्या है?
- यह किसी स्वास्थ्य स्थिति या बीमारी के इलाज के रूप में स्टेम सेल्स का उपयोग करती है।
- स्टेम सेल्स: ये विशेष कोशिकाएं होती हैं, जो आमतौर पर भ्रूण और वयस्क कोशिकाओं में पाई जाती हैं। ये विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं। कुछ मामलों में इनमें स्वयं को नवीनीकृत करने की क्षमता भी होती है।
- मानक अनुप्रयोग: ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), लिंफोमा, पार्किंसंस रोग आदि।
- ICMR ने (दिशा-निर्देश, 2021) स्टेम सेल थेरेपी को केवल हेमेटोलॉजिकल विकारों (रक्त और रक्त बनाने वाले अंगों के विकार) के लिए मानक उपचार के रूप में मान्यता दी थी।
- लाभ:
- ऊतक पुनर्जनन को सक्षम बनाती है;
- विशेष रूप से उन बीमारियों में जहां पारंपरिक उपचार सीमित हैं, लक्षित उपचार और संभावित इलाज प्रदान करती है, आदि।