सर्वेक्षण में यह रेखांकित किया गया है कि वर्ष 2050 तक महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) को लगभग 55% तक बढ़ाना, उच्च वार्षिक GDP विकास पथ को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
भारत में महिला श्रम बल भागीदारी (FLFP) की स्थिति
- बढ़ती भागीदारी: महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह 2017-18 की 23.3% से बढ़कर 2023-24 में 41.7% हो गई है।
- उद्यमशीलता: महिला नेतृत्व व स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों में सकारात्मक रुझान देखा गया है। 2021-22 में इनका प्रतिशत 24.2% था, जो 2023-24 में बढ़कर 26.2% हो गया है।
महिला श्रम बल भागीदारी के समक्ष प्रमुख चुनौतियां
- दोहरा कार्य बोझ: समय उपयोग सर्वेक्षण, 2024 के अनुसार महिलाएं प्रतिदिन औसतन 363 मिनट अवैतनिक कार्यों (बिना वेतन वाले घरेलू काम) पर व्यतीत करती हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह केवल 123 मिनट है।
- गतिशीलता और "पिंक टैक्स": सुरक्षा चिंताओं के कारण महिलाएं अक्सर सुरक्षित परिवहन साधनों के लिए अधिक लागत का भुगतान करती हैं, जिसे "पिंक टैक्स" कहा जाता है।
- विश्व बैंक के एक अध्ययन के अनुसार, 31% महिलाओं ने आवागमन को आजीविका में एक बड़ी बाधा बताया है।
- संरचनात्मक बाधाएं: जैसे कि किफायती आवास की कमी और कार्य के लचीलेपन का अभाव, जो अक्सर देखभाल की जिम्मेदारियों के साथ टकराते हैं।
- कौशल और शिक्षा का अंतर: STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) को पुरुषों का क्षेत्र मानने वाली धारणा और शिक्षा की उच्च लागत, इन उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में महिलाओं के प्रवेश को सीमित करती है।
