केंद्रीय वित्त मंत्री ने ‘बायोफार्मा शक्ति/ Biopharma SHAKTI (ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा उन्नति के लिए रणनीति)’ की घोषणा की। यह पहल भारत को वैश्विक जैव-विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।
बायोफार्मा शक्ति/ Biopharma SHAKTI के बारे में
- उद्देश्य: भारत को बायोफार्मास्यूटिकल विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना। इसका मुख्य ध्यान 'बायोलॉजिक्स' और 'बायोसिमिलर्स' के घरेलू उत्पादन के लिए एक मजबूत तंत्र तैयार करने पर है।
- बायोलॉजिक्स: ये वे दवाएं हैं, जो प्राकृतिक और जीवित स्रोतों जैसे पशु, पादप कोशिकाओं और सूक्ष्मजीवों से बनाई जाती हैं। इनमें टीके, रक्त व रक्त के घटक, सोमेटिक सेल्स, जीन थेरेपी, प्रोटीन आदि शामिल हैं।
- बायोसिमिलर्स: ये दवाएं बायोलॉजिक्स की ही नकल होती हैं। ये मूल जैविक उत्पाद के समान ही प्रभावशाली होती हैं और इनमें कोई महत्वपूर्ण चिकित्सकीय अंतर नहीं होता है।
- वित्त-पोषण: अगले 5 वर्षों के लिए ₹10,000 करोड़ का प्रावधान।
- रणनीति:
- 3 नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) स्थापित किए जाएंगे तथा 7 मौजूदा संस्थाओं को अपग्रेड किया जाएगा।
- पूरे देश में 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त नैदानिक (क्लिनिकल) परीक्षण केंद्रों का एक नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
- केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत बनाया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों और एक समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा संवर्ग (कैडर) की नियुक्ति की जाएगी, ताकि दवाओं की मंजूरी में लगने वाला समय कम हो सके।
- संभावित परिणाम:
- उन्नत जैव-विनिर्माण अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा; नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और हाई-वैल्यू (अत्यधिक सटीक व प्रभाव) वाली अगली पीढ़ी की थेरेपी में भारत की क्षमताओं में वृद्धि होगी।
- भारत में नैदानिक शोध की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में बढ़ोतरी होगी और दवा विकास में तेजी आएगी।
- अत्यधिक कुशल कार्यबल विकसित होगा; उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्रक के विकास में सहायता प्राप्त होगी।
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था
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