16वें वित्त आयोग का गठन 2023 में किया गया था। इसके अध्यक्ष नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया हैं।
- आयोग की मुख्य सिफारिशों को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है। ये सिफारिशें वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होंगी।
वित्त आयोग के बारे में
- वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। इसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 280 में है।
- इसका गठन राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक 5 साल में या जरूरत पड़ने पर पहले किया जाता है।
- संरचना: अध्यक्ष और 4 अन्य सदस्य। इन सभी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट अवधि के लिए की जाती है।
- अनुच्छेद 281 के अनुसार केंद्र सरकार वित्त आयोग की रिपोर्ट और उस पर कार्यवाही का ज्ञापन संसद के पटल पर रखती है।
16वें वित्त आयोग की प्रमुख सिफारिशें
- ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण (Vertical devolution): विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 41% ही रहेगी। यह प्रतिशत 15वें वित्त आयोग जैसा ही है।
- विभाज्य पूल में शामिल होता है सकल कर राजस्व। हालांकि, इसमें से कर संग्रह की लागत, उपकर (सेस) और अधिभार (सरचार्ज) शामिल नहीं होते।
- क्षैतिज हस्तांतरण (Horizontal devolution): यह 41% हिस्सेदारी को राज्यों में बांटने की पद्धति है।
- इस बार सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में राज्यों के योगदान को एक नया मानदंड बनाया गया है।
- राज्यों के बीच आय में अंतर (Income Distance) और राज्य का क्षेत्रफल को कम महत्व दिया गया है।
- इस बदलाव के फलस्वरूप दक्षिणी राज्यों को अधिक हिस्सा मिलने की संभावना है।
- समष्टि (मैक्रो) आर्थिक स्थिति और राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित करने की राह:
- राज्यों को राजकोषीय घाटा अपने राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का अधिकतम 3% तक सीमित रखना चाहिए।
- हालांकि पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (SASCI) योजना के तहत मिले ऋण को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
- राज्यों को राजकोषीय घाटा अपने राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का अधिकतम 3% तक सीमित रखना चाहिए।
