नीति आयोग द्वारा विकसित यह दूसरा चरण, केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना 2025-30’ पर आधारित है।
- परिसंपत्ति मुद्रीकरण का अर्थ सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाले बिना, राजस्व उत्पन्न करने के लिए मौजूदा या कम उपयोग की गई अवसंरचनात्मक परिसंपत्तियों का लाभ उठाना है।
NMP 2.0 की मुख्य विशेषताएं
- उद्देश्य: यह लोक परिसंपत्तियों के स्वामियों के लिए एक मध्यम अवधि का रोडमैप प्रदान करती है। साथ ही, निजी क्षेत्रक को संभावित परिसंपत्तियों के बारे में स्पष्टता उपलब्ध कराती है।
- कुल मुद्रीकरण क्षमता: 5 वर्षों (वित्त वर्ष 2026-वित्त वर्ष 2030) के दौरान 12 क्षेत्रकों से संबंधित ₹16.72 लाख करोड़ अनुमानित है। इसमें ₹5.8 लाख करोड़ का निजी क्षेत्रक द्वारा निवेश भी शामिल है।
- प्रमुख क्षेत्रक: राजमार्ग (मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क/MMLPs व रोपवे सहित) (26%), विद्युत (17%), रेलवे (16%), बंदरगाह (16%), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नागर विमानन, भंडारण और वेयरहाउसिंग, शहरी अवसंरचना, कोयला, खदान, दूरसंचार और पर्यटन।
- राजस्व का वितरण: NMP 2.0 के तहत प्राप्त राशि का सबसे बड़ा हिस्सा भारत की संचित निधि में जाएगा। इसके बाद प्रत्यक्ष निवेश (निजी), PSU या पत्तन प्राधिकरण आवंटन और राज्य संचित निधि का स्थान है।
- संपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत
- कोर बनाम गैर-कोर परिसंपत्ति: NMP 1.0 की तरह, NMP 2.0 भी केवल कोर परिसंपत्तियों (जो सरकार के सेवा उद्देश्यों के लिए केंद्रीय हैं) पर ध्यान केंद्रित करती है।
- गैर-कोर परिसंपत्ति: भूमि, भवन और रियल एस्टेट जैसी गैर-कोर परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण को केवल वहां शामिल किया गया है, जहां परियोजना उनके आगे के विकास की परिकल्पना करती है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) परियोजनाओं में निजी क्षेत्रक द्वारा निवेश: इसमें DBFOT (डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर) जैसे मॉडल्स पर विचार किया गया है।
- कोर बनाम गैर-कोर परिसंपत्ति: NMP 1.0 की तरह, NMP 2.0 भी केवल कोर परिसंपत्तियों (जो सरकार के सेवा उद्देश्यों के लिए केंद्रीय हैं) पर ध्यान केंद्रित करती है।
- परिसंपत्ति मुद्रीकरण के चरण: मुद्रीकरण क्षमता के आकलन की कार्यपद्धति को पांच चरणों में विभाजित किया गया है (इन्फोग्राफिक देखें)।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन-1.0 (NMP 1.0) के बारे में
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