केंद्रीय बजट 2026-27 में NSQF (राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क) के अनुरूप कार्यक्रमों के माध्यम से एक वर्ष में 1.5 लाख देखभालकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की योजना की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य भारत में बुजुर्गों की देखभाल (जेरियाट्रिक) और दीर्घकालिक देखभाल संबंधी कार्यबल को मजबूत करना है।
बुजुर्गों की देखभाल को मजबूत करने की आवश्यकता क्यों है?
- बुजुर्गों की जनसंख्या: वरिष्ठ नागरिक (60+) वर्तमान में जनसंख्या का 10% से अधिक (लगभग 104 मिलियन) हैं और 2050 तक इनके 19.5% (319 मिलियन) तक पहुंचने का अनुमान है।
- स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव: 75% बुजुर्ग एक या अधिक चिरकालिक बीमारियों से ग्रसित हैं और इस आयु वर्ग के लिए चिकित्सा व्यय सामान्य से दोगुने से भी अधिक है।
- ग्रामीण संकेंद्रण: लगभग 71% बुजुर्ग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जहाँ अक्सर चिकित्सा अवसंरचना का अभाव होता है।
- सामाजिक समर्थन का क्षरण: पारंपरिक पारिवारिक सहयोग में कमी, कानूनी अधिकारों के प्रति कम जागरूकता और घरेलू दुर्व्यवहार जैसी समस्याएं।
- अपर्याप्त वित्तीय सुरक्षा: वित्तीय धोखाधड़ी के प्रति सुभेद्यता, वित्तीय निर्भरता (78% के पास कोई पेंशन कवर नहीं), और कम बीमा कवरेज (केवल 18%)।
- डिजिटल डिवाइड: बुजुर्गों में डिजिटल निरक्षरता का उच्च स्तर विद्यमान है। लगभग 85.8% बुजुर्ग डिजिटल रूप से निरक्षर हैं।
बुजुर्गों की देखभाल से संबंधित सरकारी पहलें
- नीतिगत और कानूनी फ्रेमवर्क: माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 लागू किया गया है; राष्ट्रीय वृद्धजन नीति (NPOP) बनाई गई है।
- स्वास्थ्य संबंधी पहलें: बुजुर्गों के स्वास्थ्य देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम कार्यान्वित किया गया है तथा आयुष्मान भारत, वयो मित्र आदि योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
- सामाजिक और आर्थिक सहायता: अटल वयो अभ्युदय योजना, राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY), एल्डर लाइन (14567), सेज (सीनियर केयर एजिंग ग्रोथ इंजन- SAGE) पहल, सेक्रेड (सक्षम वरिष्ठ नागरिक को आत्म-सम्मान के साथ पुन: रोजगार प्रदान करने के लिए पोर्टल- SACRED) पोर्टल आदि।
बुजुर्गों की देखभाल को मजबूत करने के लिए आगे की राह (Way Forward)
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