इन पार्कों की स्थापना के लिए ₹600 करोड़ आवंटित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य क्लस्टर - आधारित और अवसंरचना के नेतृत्व वाले दृष्टिकोण के माध्यम से भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदलना है।
केमिकल पार्क्स के बारे में
- ये विशेष रूप से रसायन और पेट्रोकेमिकल्स विनिर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए नियोजित औद्योगिक क्लस्टर होंगे। यहां कई इकाइयां एक साथ कार्य करेंगी और विश्व स्तरीय अवसंरचना एवं सामान्य सेवाओं को साझा करेंगी।
भारत में रसायन उद्योग की स्थिति
- राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7% का योगदान।
- वित्त वर्ष 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण GVA (सकल मूल्य वर्धित) में 8.1% की हिस्सेदारी है।
- भारत वैश्विक स्तर पर छठा और एशिया में तीसरा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक है।

रसायन उद्योग के समक्ष चुनौतियां
- आयात पर निर्भरता: आयात पर अत्यधिक निर्भरता के कारण 2023 में 31 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा हुआ था।
- अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स: पुराने औद्योगिक क्लस्टर तथा उच्च लॉजिस्टिक्स लागत वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में मूल्य नुकसान उत्पन्न करते हैं।
- अवसरों की कमी: उच्च-मूल्य वाले विशिष्ट उत्पादों (डाउनस्ट्रीम) की बजाय अत्यधिक उत्पादन (अपस्ट्रीम) पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
- कम अनुसंधान एवं विकास (R&D): R&D में निवेश केवल 0.7% है। इसके विपरीत, वैश्विक औसत 2.3% है।
- पर्यावरण अनुपालन (EC) संबंधी बाधाएं: लंबी प्रसंस्करण अवधि, जटिल मंजूरी आवश्यकताएं और राज्य व केंद्र स्तर पर दोहरा विनियामक निरीक्षण।
- कौशल की कमी: विशेष रूप से ग्रीन केमिस्ट्री और नैनोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रकों में कुशल पेशेवरों की 30% तक की कमी।
रसायन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अन्य पहलें
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