विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार पृथ्वी का ऊर्जा असंतुलन 65 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँचा | Current Affairs | Vision IAS

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यह निष्कर्ष WMO द्वारा विश्व मौसम विज्ञान दिवस के अवसर पर जारी 'वैश्विक जलवायु की स्थिति 2025' (State of the Global Climate 2025) रिपोर्ट का हिस्सा है। 

  • विश्व मौसम विज्ञान दिवस 23 मार्च को मनाया जाता है। इस वर्ष इस दिवस की थीम थी-आज का अवलोकन, कल की सुरक्षा (Observing Today, Protecting Tomorrow)।
  • इस रिपोर्ट में पहली बार पृथ्वी के ऊर्जा असंतुलन (Earth’s Energy Imbalance—EEI) को प्रमुख जलवायु संकेतकों में शामिल किया गया।

पृथ्वी के ऊर्जा असंतुलन (EEI)  के बारे में

  • यह पृथ्वी द्वारा सूर्य से प्राप्त ऊर्जा की मात्रा (आने वाले सौर विकिरण - परावर्तित सौर विकिरण) और पृथ्वी द्वारा अंतरिक्ष में वापस छोड़ी जाने वाली ऊर्जा की मात्रा (जाने वाले दीर्घ-तरंग विकिरण) के बीच का अंतर है।
    • “धनात्मक” EEI: पृथ्वी ऊर्जा प्राप्त कर रही है और गर्म हो रही है
    • “ऋणात्मक” EEI: पृथ्वी ऊर्जा खो रही है और ठंडी हो रही है
  • EEI जलवायु प्रणाली में मानवजनित ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन के कारण ऊष्मा संचय की दर को मापता है और वैश्विक तापवृद्धि (वार्मिंग) की समग्र तस्वीर प्रस्तुत करता है।
  • पृथ्वी के ऊर्जा असंतुलन में वृद्धि के कारण:
    • ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती सांद्रता,
    • एरोसोल उत्सर्जन में कमी,
    • ट्रेस गैसों और जलवाष्प में वृद्धि (जिससे दीर्घ-तरंग विकिरण का उत्सर्जन घटता है),
    • बादलों और समुद्री बर्फ द्वारा परावर्तन में कमी।

रिपोर्ट के अन्य प्रमुख बिंदु

  • वर्ष 2025 अब तक का दूसरा या तीसरा सबसे गर्म वर्ष रहा, जो 1850–1900 के औसत से लगभग 1.43°C अधिक था।
  • 2015–2025 के बीच के 11 वर्ष अब तक के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं।
  • वर्ष 2024 में वायुमंडलीय CO₂ की सांद्रता पिछले 20 लाख वर्षों में सबसे अधिक दर्ज की गई।
  • महासागरीय ऊष्मा की मात्रा (Ocean heat content) वर्ष 2025 में एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई।

 

 

 

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महासागरीय ऊष्मा की मात्रा (Ocean heat content)

यह महासागरों में संग्रहीत ऊष्मा की कुल मात्रा को दर्शाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण महासागरों में ऊष्मा की मात्रा में वृद्धि देखी जा रही है, जो समुद्र के जल स्तर में वृद्धि और मौसम की चरम घटनाओं में योगदान करती है।

दीर्घ-तरंग विकिरण

पृथ्वी द्वारा अवशोषित सौर विकिरण के प्रतिक्रिया स्वरूप उत्सर्जित अवरक्त विकिरण। ग्रीनहाउस गैसें इस विकिरण को अवशोषित और पुनः उत्सर्जित करती हैं, जिससे पृथ्वी गर्म होती है।

ग्रीनहाउस गैस (GHG)

ग्रीनहाउस गैसें (Greenhouse Gases - GHG) वे गैसें होती हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल में गर्मी को रोकती हैं, जिससे ग्रह का तापमान बढ़ता है। इनमें कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4) और नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) प्रमुख हैं। विद्युत क्षेत्र, कोयला जैसे जीवाश्म ईंधनों के जलने के कारण GHG का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

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