तमिल ब्राह्मी लिपि | Current Affairs | Vision IAS

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शोधकर्ताओं ने मिस्र की “किंग्स की घाटी (Valley of the Kings)” में तमिल ब्राह्मी लिपि के शिलालेखों की पहचान की है। ये शिलालेख  पहली से तीसरी शताब्दी के बीच के माने जा रहे हैं। 

  • ये खोजें भारत और मिस्र के बीच प्राचीन व्यापारिक संपर्कों को रेखांकित करती हैं।
  • इन शिलालेखों में तमिल ब्राह्मी लिपि में व्यापारियों के नाम अंकित हैं। जैसे— चिकै कोर्रन (राजमुकुटधारी नेता), कोपन, चतन, किरण।  
    • कोर्रन नाम का उल्लेख संगम साहित्य में भी मिलता है, जहां एक चेर राजा को सीधे ‘कोर्रन’ कहकर संबोधित किया गया है।

तमिल ब्राह्मी लिपि के बारे में:

  • यह ब्राह्मी लिपि का एक रूप है। इसका प्रयोग प्राचीन तमिल अभिलेखों को लिखने में किया जाता था।
  • कालावधि: लगभग 300 ईसा पूर्व से 100 ईस्वी।
  • महान कृति: तिरुक्कुरल।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC ) की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान से सक्रिय आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) दिल्ली के लाल किला आतंकी हमले से "जुड़ा" हुआ था। 

  • जैश-ए-मोहम्मद, संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित/प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है। 

‘1267 प्रतिबंध समिति’ के बारे में:

  • यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनुषंगी संस्था है। यह ISIL (दाएश), अल-कायदा तथा उनसे जुड़े आतंकियों और संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी करती है।
  • स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1999 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 1267 के तहत की गई थी।
    • प्रारंभ में यह संकल्प विशेष रूप से तालिबान के विरुद्ध हवाई-सेवा प्रतिबंध लगाने और संपत्ति जब्त करने के लिए पारित किया गया था।
  •  संरचना: इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य देश शामिल होते हैं। 
    • समिति के निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
  • कार्य:
    • व्यक्तियों और संगठनों को प्रतिबंध सूची में शामिल करना।
    • प्रतिबंध हटाने या छूट से संबंधित अनुरोधों पर विचार करना।
    • अपने कार्यों पर वार्षिक रिपोर्ट सुरक्षा परिषद को प्रस्तुत करना। 

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) ने आर्कटिक में सुरक्षा बढ़ाने के लिए 'आर्कटिक सेंट्री' (Arctic Sentry) नामक एक नया मिशन शुरू किया है।

  • NATO एक राजनीतिक और सैन्य गठबंधन है। इसकी स्थापना वर्ष 1949 में उत्तर अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर के बाद की गई थी। 
    • वर्तमान में इसमें 32 सदस्य हैं। 
    • इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है।

आर्कटिक सेंट्री के बारे में:

  • नेतृत्व: इसका नेतृत्व जॉइंट फोर्स कमांड नॉरफ़ॉक (JFC Norfolk) द्वारा किया जाता है। यह नाटो के लिए उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है।
  • सामरिक उद्देश्य:  
    • नाटो सदस्य देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
    • सदस्य देशों के प्रादेशिक क्षेत्रों की रक्षा करना।
    • रूस की बढ़ती सैन्य गतिविधियों तथा चीन के बढ़ते प्रभाव जैसे चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना।

भारत के उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) का दर्जा देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बारे में

  • विधिक आधार: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत दर्जा।
  • प्राधिकरण: वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नामांकन पर समिति द्वारा। इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (अध्यक्ष) और उच्चतम न्यायालय के 2 वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
  • पात्रता: अधिवक्ता के रूप में न्यूनतम 10 वर्ष का अनुभव, अथवा अधिवक्ता और जिला एवं सत्र न्यायाधीश/न्यायिक अधिकरण के सदस्य के रूप में कुल 10 वर्ष का संयुक्त अनुभव
  • यह दर्जा वकालत में क्षमता, बार में प्रतिष्ठा, या विधि के क्षेत्र में विशेष ज्ञान/अनुभव के आधार पर दिया जाता है। 
  • यह एक पद नहीं, बल्कि एक उपाधि/मानद पहचान है।
  • न्यूनतम आयु 45 वर्ष (जब तक कि छूट न दी गई हो)। अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय में अभ्यास कर रहा हो 
  • प्रतिबंध: 
    • वरिष्ठ अधिवक्ता वकालतनामा दाखिल नहीं कर सकते (अर्थात सीधे मुवक्किल का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते) और न ही किसी न्यायालय/अधिकरण में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) या निर्देशित कनिष्ठ अधिवक्ता के बिना पेश हो सकते हैं।
    • वे दलीलें ड्राफ्ट नहीं कर सकते या सीधे तौर पर मामले (briefs) स्वीकार नहीं कर सकते। उनका ध्यान केवल मामलों की बहस करने पर होता है। 

हाल ही में राज्य सभा के एक सांसद ने भारत के संसदीय लोकतंत्र में 'वापस बुलाने का अधिकार' यानी राइट टू रिकॉल पेश करने का विचार रखा है।

राइट टू रिकॉल के बारे में

  • यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का एक स्वरूप है। इसमें मतदाता अपने निर्वाचित प्रतिनिधि को कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही हटाने का अधिकार रखते हैं।
  • वर्तमान स्थिति: भारत में, यह केवल कुछ राज्यों (जैसे छत्तीसगढ़) में स्थानीय निकाय शासन स्तर पर लागू है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका  (कुछ राज्यों में), यूनाइटेड किंगडम जैसे कई अन्य देशों में 'राइट टू रिकॉल' के प्रावधान हैं।

प्रत्यक्ष लोकतंत्र के अन्य साधन: 

  • हालांकि, भारत  प्रतिनिधित्व वाला लोकतंत्र (Representative Democracy) है, लेकिन कुछ साधन नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से शक्ति का प्रयोग करने की सुविधा देते हैं। जैसे-
    • जनमत संग्रह (Referendum): इसमें किसी प्रस्तावित विधेयक को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए मतदाताओं से राय मांगी जाती है।
    • पहल (Initiative):  नागरिक स्वयं किसी विधेयक को बनाने और विधायिका के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रस्ताव रख सकते हैं।
    • जनमत सर्वेक्षण (Plebiscite): यह मुख्य रूप से संप्रभुता, क्षेत्रीय विवादों या राजनीतिक स्थिति से संबंधित विषयों पर आयोजित किया जाता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में ‘वंदे मातरम’ के गायन/प्रस्तुति से संबंधित औपचारिक प्रोटोकॉल को स्पष्ट करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

दिशा-निर्देश के मुख्य बिंदु:

  • जब वंदे मातरम और राष्ट्रगान (जन गण मन), दोनों प्रस्तुत किए जाएं, तो वंदे मातरम पहले गाया जाएगा।
  • वंदे मातरम गायन के समय श्रोताओं को सावधान की मुद्रा में खड़ा रहना होगा।
    • हालांकि, यदि यह किसी फिल्म या वृत्तचित्र का हिस्सा हो, तो सावधान की मुद्रा अनिवार्य नहीं होगी।

‘वंदे मातरम’ के बारे में:

  • इतिहास: संस्कृत भाषा में (बंगाली लिपि में) बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित। पहली बार 1875 में साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित, फिर वर्ष 1882 में उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित।
    • इसे वर्ष 1950 में संविधान सभा द्वारा भारत के राष्ट्र गीत के रूप में अपनाया गया।
  •  24 जनवरी, 1950 को यह घोषणा की गई कि वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के समान दर्जा प्राप्त होगा।
  • वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला अवसर था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। 

हाल ही में, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (National Medicinal Plant Board–NMPB) ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे किए।

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) के बारे में:

  • मुख्यालय: नई दिल्ली
  • स्थापना: वर्ष 2000 में भारत सरकार के एक संकल्प के माध्यम से स्थापित।
  • मंत्रालय: केंद्रीय आयुष मंत्रालय।
  • अध्यक्ष: केंद्रीय आयुष मंत्री।
  • दायित्व:
    • औषधीय पादपों से संबंधित सभी विषयों पर केंद्र और राज्य सरकारों तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देना।
    • औषधीय पादपों से जुड़े अन्य कार्य करना: नीतियों का कार्यान्वयन, निर्यात प्रोत्साहन, अनुसंधान एवं विकास, संरक्षण तथा सतत प्रबंधन।
  • औषधीय पादपों से संबंधित प्रमुख पहलें:
    • ई-चरक पोर्टल: विभिन्न हितधारकों के बीच सूचना के आदान-प्रदान हेतु एक ऑनलाइन बाजार तंत्र।
    • औषधीय पादपों के संरक्षण, विकास और संधारणीय प्रबंधन पर केंद्रीय क्षेत्रक योजना

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने “युवा AI फॉर ऑल” कार्यक्रम के अंतर्गत कौशल रथ का शुभारंभ किया। इसे अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर प्रौद्योगिकी सोसायटी (AISECT) के सहयोग से शुरू किया गया। 

  • कौशल रथ मोबाइल ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जागरूकता पहल’ है। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर AI शिक्षा का लोकतंत्रीकरण करना है।

‘युवा AI फॉर ऑल’ के बारे में:

  • यह निःशुल्क, 4.5 घंटे का स्व-गति (Self-paced) वाला राष्ट्रीय पाठ्यक्रम है। इसका लक्ष्य AI को प्रत्येक भारतीय के लिए सुलभ और समझने योग्य बनाना है।
  • यह फ्यूचरस्किल्स प्राइम, iGOT कर्मयोगी सहित अन्य प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है।
  • यह इंडिया AI  मिशन का हिस्सा है।
    • इंडिया AI  मिशन को मार्च 2024 में स्वीकृति दी गई थी। इसके लिए पांच वर्षों में ₹10,371.92 करोड़ का बजट निर्धारित है।
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तिरुकुरल

यह प्राचीन तमिल साहित्य की एक महान कृति है, जिसे तिरुवल्लुवर ने लिखा था। इसे नैतिकता, राजनीति और प्रेम पर आधारित माना जाता है और यह विश्व साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो आज भी प्रासंगिक है।

कोर्रन

संगम साहित्य में, 'कोर्रन' नाम का उल्लेख एक चेर राजा को संबोधित करने के लिए किया गया है, जो प्राचीन दक्षिण भारत में एक प्रमुख राजवंश था। यह नाम तमिल ब्राह्मी शिलालेखों में भी पाया गया है, जो प्राचीन व्यापारिक संबंधों का संकेत देता है।

संगम साहित्य

यह प्राचीन तमिल साहित्य का वह समूह है जो ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से ईसा पश्चात तीसरी शताब्दी के बीच रचा गया था। यह साहित्य तत्कालीन समाज, संस्कृति, धर्म, राजनीति और अर्थव्यवस्था की जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसमें चेर, चोल और पांड्य राजवंशों का उल्लेख मिलता है।

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