भारतीय प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग में वे कंपनियां शामिल हैं, जो मुख्य रूप से आईटी सेवाओं, सॉफ्टवेयर विकास, डिजिटल परिवर्तन और संचालन के माध्यम से ग्राहकों के लिए तकनीकी समाधान डिजाइन, निर्माण, कार्यान्वयन और प्रबंधन व समर्थन करती हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग के बारे में
- योगदान: यह उद्योग भारत की जीडीपी में लगभग 7% का योगदान देता है और वार्षिक लगभग $265 बिलियन का राजस्व उत्पन्न करता है।
- विकसित भारत@2047 की परिकल्पना के अनुरूप, इस क्षेत्रक को 2035 तक 750-850 बिलियन डॉलर का वार्षिक राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखना होगा, ताकि जीडीपी में 7-8% की हिस्सेदारी बनाए रखी जा सके। साथ ही, वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी को वर्तमान 20% से बढ़ाकर 25% से अधिक किया जा सके।
- चुनौतियां: महामारी के बाद की बाधाओं (जिसमें व्यापक आर्थिक अनिश्चितता, AI-आधारित स्वचालन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा शामिल है) ने वार्षिक संवृद्धि दर को धीमा कर 4-5% कर दिया है।
- मौजूदा रुझानों के अनुसार निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में $250–300 बिलियन की कमी रह सकती है।
- विकास के पांच प्रमुख आधार: रोडमैप में विकास के लिए पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है:
- एजेंटिक एआई: हाइब्रिड 'मानव + एजेंट' सेवा मॉडल बनाने के लिए AI का लाभ उठाना।
- सॉफ्टवेयर और उत्पाद: वैश्विक 'सास' (SaaS - सेवा के रूप में सॉफ्टवेयर) राजधानी के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना।
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत को विश्व के डेटा सेवा और AI इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में स्थापित करना।
- नवाचार-आधारित इंजीनियरिंग: भारत स्थित नवाचार केंद्रों, उत्कृष्टता केंद्रों (CoEs) और अग्रणी प्रौद्योगिकी साझेदारियों के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास (R&D) व्यय निधियों का लाभ उठाना।
- भारत-के-लिए-भारत समाधान: अनुकूलित AI और बहुभाषी प्लेटफॉर्म्स के साथ भारत की तेजी से बढ़ती घरेलू मांग का लाभ उठाना।